मोदी जी के मंत्री ने जुमले का दागा है ऐसा गोला, क्या मंदी के पीछे सच में है उबर, ओला?

ALL INDIA CONGRESS COMMITTEE

24, AKBAR ROAD, NEW DELHI

COMMUNICATION DEPARTMENT

Dr. Abhishek Manu Singhvi, MP, Spokesperson AICC addressed the media today at AICC Hdqrs.

डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि “मोदी जी के मंत्री ने जुमले का दागा है ऐसा गोला, क्या मंदी के पीछे सच में है उबर, ओलाये आशु कवि का नहीं है, ये देश का बड़ा कड़वा सच हो गया है कि मंडियां पड़ी हैं सूनी, बाजार पड़ा है मंदा, मंत्री जी जुमलेबाजी का अब बंद किजिए धंधा

ये अचरज की बात है कि भारत के वित्त मंत्री एक नया अर्थशास्त्र हम सबको सिखा रहे हैं, जिसके अंतर्गत उबर, ओला कम से कम आर्थिक ढांचे के एक बहुत बड़े सेक्टर, ऑटो सेक्टर के लिए जो मंदी चल रही है, उसके लिए जिम्मेवार है।

This remarkable, unbelievable statement by the Finance Minister of India reflects the inefficiency, the immaturity and the inexperience, the three Is, as Shri Modi would say of the BJP in governance. The gross overstatement made by the Finance Minister is a grave joke on the economy, on the country. Why, because the dip in the GDP is the real new normal for this Government. You have all seen the quotation, I need not repeat I, but, those of you missed it, quote “It is the automobile and components industry has been affected – one reason is BS6 and the mindset of millennial who now prefer to have Ola and Uber rather than committing to buying an automobile”. And the second thing is a dip of GDP “is part of growth”. That is why I said, it is new normal because the growth should be normal. So, the new normal for the BJP Government is a dip in GDP. I am sure that she will not, what is deserved to be done. So May I request Modi Ji to do it for us – expunge her remarks and seek an apology from her to the Nation.

मैं डिटेल में नहीं जाऊंगा क्योंकि हमने आर्थिक ढांचे पर कुछ दिन पहले आपके समक्ष कुछ आंकड़े रखे हैं, लेकिन ये तो सबको, बड़े लोगों को प्राथमिक कक्षा से पता है कि उबर और ओला कई वर्षों से इस देश में है। ये भी पता है कि जो मंदी है वो कुछ समय से चल रही है। ये उबर, ओला का कारण अचानक कहाँ से आयाउसके बाद Twitter के hashtags चल रहे हैं, ‘#BoycottMillenials’ एक हैशटैग का नाम है और दूसरा है ‘#SayItLikeNirmalaTai’ तो ये Millennials के ऊपर भी और वृद्ध लोगों के ऊपर भी बहुत ही कड़वा मजाक है। अब मैं आपके साथ माननीय वित्त मंत्री के इस लोजिक को 10 प्रश्नों के अंतर्गत अप्लाय करने का प्रयत्न करता हूं।

लोजिक आपने नोट कर लिया है कि ऑटो सेक्टर में मंदी का एक मुख्य कारण है, दो ही कारण दिए थे, एक मुख्य कारण है – उबर, ओला।

And the logic of the Finance Minister on economic slowdown, if applied to ten questions in ten sectors, ten issues will make it comical, though of course it is tragic for the Nation.

मैं आपको ये मजाकिया, यद्दपि ये दुर्भाग्यपूर्ण है इस देश के लिए, वैसे मजाकिया है, वो 10 प्रश्न और पक्ष रखता हूं।

पहला, The ‘millennial mindset’ and ‘Ola and Uber’ are responsible. मैंने आपको बता दिया है, इसके आंकड़े आपके समक्ष है। इस प्रेस वार्ता के बाद हम आपको वो आंकड़े देंगे कि कितने महीनों से कितनी जबरदस्त 31 प्रतिशत गिरावट हुई है। बेचारे उबर और ओला तो तालियां बजा रहे होंगे कि 31 प्रतिशत गिरावट उन्होंने अकेले इस सेक्टर में कर दी। बहुत जबरदस्त उनको मान-सम्मान मिला है कि इतनी शक्तिशाली दो कंपनियां हैं।

My second question applying Madam FM’s logic, are landlords and millennial who go for rented accommodation responsible for the recession in the real estate market?

लोजिक का बड़ा प्रभावशाली परिणाम होता है, तो इस लोजिक का दूसरा प्रश्न, वही लोजिक है बिल्कुल, Millennials और landlords जो हैं या व्यक्ति जो यंग लोग हैं, वो लोग rented accommodation के लिए जाते हैं। इसी कारण से रियल एस्टेट सेक्टर बैठ गया है। क्या उत्तर देंगी, मुझे पता नहीं, मैं प्रश्न पूछ रहा हूं। वैसे मैं बता दूं आपको, कुछ समय पहले बताया था, रियल एस्टेट सेक्टर की दुर्दशा जो है, 250 एंसिलरी सेक्टर से संबंध रखती है। ये एक सेक्टर और कंसलटेंसी फर्म के आंकड़े प्रकाशित हुए हैं – 30 मुख्य शहरों में लगभग 13 लाख घर बिकने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आंकड़े दिए हैं, कोच्चि के, जयपुर के, चेन्नई के कि 5-5 वर्ष तक, साढ़े 5 वर्ष तक इंनवेंटरी नहीं बिक रही है। ये जरुर उन Millennials के कारण है जो रेंट पर ले रहे हैं आजकल घर खरीद नहीं रहे हैं। तो दोषी कौन हैं, सरकार नहीं, वो यंग लोग, जो रेंट करते हैं।

तीसरा – माननीय वित्त मंत्री के लोजिक का एप्लिकेशन, I ask the third question – are spendthrift overspending homemakers similarly responsible for rising fiscal deficit, applying the same logic. Is the money overspent by spendthrift overspending home makers leading to an imbalance in the economy’s balance-sheet? This logic must apply if the first logic is correct. हमने आपके समक्ष ये आंकड़े रखे थे कि सीएजी ने recalculate किया, आपको बताया था। कुछ ही दिन पहले 5 जुलाई को, जब बजट हुआ था उसके बाद का वास्तविक फिसकल डेफिसिट (fiscal deficit) 5.85 प्रतिशत है, जो आपको बताया जा रहा है, 3.46 प्रतिशत। फेक आंकड़ों के आधार पर, वो आंकडे मैं लिख दे रहा हूं आज। लेकिन मेरा तीसरा प्रश्न महत्वपूर्ण है कि ये लोग जो खर्चा करते हैं या ओवर स्पेंड करते हैं उसके कारण फिसकल डेफिसिट बढ़ रहा है।

चौथा – सेम लोजिक के आधार पर कि पारिवारिक बिजनेस बढ़ रहे हैं, इससे रोजगार कम हो रहा है। क्योंकि परिवार में सेल्फ इंम्पलोयमेंट हो रहा है, जबरदस्त क्रांति आ गई है पारिवारिक बिजनेस की, खूब बिजनेस दौड़ रहे हैं तो रोजगार तो कम होगा ही। ये भी लोजिक सही है। इसीलिए माननीय वित्त मंत्री, वर्क फोर्स लगभग 9 मिलियन, 90 लाख से कम हुआ है, 2012-13 से लेकर 2017-18 में। यानि एक करोड़ से थोड़ा कम। कृषि में लगभग 26.7 मिलियन यानि 260 लाख, ढाई करोड़ गिरावट हुई है। मैं फिर आंकड़े नहीं दूंगा, मैं सिर्फ आपको रोजगार का वित्त मंत्री के अनुसार लोजिक बता रहा हूं।

पांचवा प्रश्न – इसी लोजिक के अनुसार रुपया कमजोर हो रहा है क्योंकि यूएसए दमदार हो रहा है, विकासशील हो रहा है।

The growth and development of USA is responsible for the weakening of the Rupee, no fault of the Government, no fault of the NDA, no fault of the Indian economy, only U SA’s fault.

आपको आंकड़े पता है ना रुपए के बारे में। अगस्त में एशिया की सबसे बैड परफोर्मिंग करंसी मानी गई है। इस लोजिक के अनुसार ये बहुत बड़ा एक हर्ष का विषय होना चाहिए। 71.70 रुपयों पर चल रहा है डॉलर।

छठा – क्रेडिट रेटिंग एजेंसी सब बदमाश हैं, गलत हैं जो भारत की क्रेडिट रेंटिंग को कम कर रही हैं, हमारी कोई गलती नहीं है। हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी है, ये गलती तो आपकी है। आप क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है, क्योंकि आपने डाउन ग्रेड 167 बार किया, 167 times in the last 6 months, अपग्रेड उसके आधे बार किए – 73 बार। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी 6 महीने, 3 महीने या 1 महीने में कितनी बार डाउन ग्रेड करती है या अपग्रेड करती हैं, उसके आधार पर ये आंकड़े दिए जाते हैं। तो गलती सरकार की नहीं है, गलती क्रेडिटएजेंसी की है, उन्होंने क्यों 167 बार डाउन ग्रेड as against 73 अपग्रेड किया, रेशो 2:1.

सांतवा प्रश्न- निर्यात के आंकड़े खराब हो रहे हैं क्योंकि स्वदेशी वकालत करने वाले लोग गलत हैं, जो स्वदेशी की बात करते हैं, वो गलत हैं। निर्यात हमारा खराब नहीं है, उनके कारण निर्यात के फिगर खराब हो रहे हैं। मैंने आपके समक्ष एक आंकड़ा रखा था, निर्यात के 30 महत्वपूर्ण सेक्टर माने जाते हैं, निर्यात में सेक्टर वाइज लिस्ट बनती है, उसमें से 21 sectors out of 30 sectors have registered their steepest decline in the last few months.  और उसके उदाहरण आप लोग जानते हैं, जवाहारात, जेम्स, इंजिनियरिंग गुड्स, पेट्रोलियम गुड्स, इत्यादि- इत्यादि। ये गलती किसकी है, ये गलती है स्वदेशी वकालत करने वालों की, सरकार की नहीं है।

आठवां प्रश्न-  फॉरेन डॉयरेक्ट इनवेस्टमेंट गिर गया है क्योंकि साहूकार और लोकल मनी लैंडर का काम बढ़ गया है। भारत के जो लोकल मनी लैंडर हैं और साहूकार हैं, उनका खूब अच्छा काम चल रहा है, इसलिए फॉरेन डॉयरेक्ट इनवेस्टमेंट कम हो गया है। फॉरेन डॉयरेक्ट इनवेस्टमेंट अप्रैल से दिसंबर में 7 प्रतिशत गिरा है, 7 FDI into India, there is declineपूरा साल देखें 2018-19 के फिसकल में तो 1 प्रतिशत गिरावट है, मैं आंकड़े आपको देने वाला हूं। 

मेरा नौंवा प्रश्न – Researchers of Finance Ministry drafting the Annual Budget and the Economic Survey are responsible for the falling GDP figures because they keep applying different methodologies. GDP fall is not our fault, is not the Finance Ministry’s fault, is not the Prime Minister’s, Government’s fault, it is because the Researchers who keep recalculating these figures, whether in the Budget or in the Economic Survey keep changing methodologies and keep confusing us. यहाँ बड़ा रोचक भी है, बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण भी है आंकड़ा, वैसे भी हम दो स्थान गिर गए हैं, 7th largest हो गए हैं, हम ब्रिटेन और फ्रांस के आगे थे, अब ब्रिटेन और फ्रांस के पीछे हो गई है इकॉनमी हैं। लेकिन उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हमें माननीय प्रधानमंत्री के 5 ट्रिलियन डॉलर के उद्देश्य तक पहुंचने के लिए, मैं दोहरा रहा हूं, इस वर्ष 3 ट्रिलियन होना आवश्यक है और वो आप होंगे सरकारी एस्टिमेट के अनुसार 5.7 वाले विकास की दर पर। कई लोग मानते हैं कि वास्तविक विकास की दर 4 के आस-पास है या साढ़े तीन के आस-पास है, लेकिन सरकार खुद स्वीकार करती है कि 5.8 प्रतिशत पर है। कृपया बताएं कि करंट ईयर में कैसे 3 ट्रिलियन पहुँचेंगे, उत्तर, गलती उन रिसर्चर की है, उन आंकड़े लिखने वालों की है, हमारी नहीं है।

दसवां प्रश्न- माननीय वित्त मंत्री के लोजिक के अनुसार जो जबरदस्त, 17 वर्ष में सबसे ज्यादा गिरने वाला स्टोक मार्केट है, वो भूकंप के कारण है, सरकार की आर्थिक व्यवस्था के कारण नहीं है। याद रहे 5 जुलाई को बजट आया था, जुलाई में 17 वर्ष से ज्यादा जो नहीं हुआ, वो जुलाई में उतना गिरा है। BSE ले लीजिए, निफ्टी ले लीजिए, मैं आंकड़े नहीं दे रहा हूं, जबरदस्त गिरावट है। बजट के एक महीने के अंदर 13 लाख करोड़ की निवेशकों को क्षति हुई थी। ये आंकड़े भी आपके पास है, हमने पहले दिए हैं और आपको आज वापस देंगे।

तो मैं अपने दस प्रश्नों का माननीय वित्त मंत्री के लोजिक के अनुसार उत्तर दे चुका हूं, अब मैं चाहूंगा कि वो अपने तर्क के अनुसार माननीय मोदी जी कोई नया उत्तर दें। मैं अपनी बात का अंत करना चाहता हूं, दो और पक्ष आपके समक्ष रखकर। 

एक तो है कि आपने नोटिस किया कि नहीं कि ये बैंक फ्रॉड की जो इतनी बात होती है, हर देश की जो तकलीफ है, लेजेसी समस्या जिसे कहा जाता है, उसका एक बड़ा रोचक आंकड़ा, लेजेसी समस्या का अभी कुछ दिन पहले प्रकाशित हुआ। आरटीआई के उत्तर के अनुसार 2,480 फ्रॉड के केस 31,000 करोड़ रुपयों के विषय में 18 पब्लिक सेक्टर बैंक के प्रकाश में आए हैं, 2019 के फर्स्ट फिसकल क्वार्टर में। 

In 2019 first fiscal quarter, 2480 new cases of frauds involving Rs. 31,000 crores were discovered and the highest share of this is 38% with SBI – the Government’s premier Bank. The value of bank frauds – this word ‘legacy’ has become a fashionable word – has increased 74% only in one year from 2018 to 2019 when  I hope there was no legacy except the legacy of Shri Modi.

So, Shri Modi’s legacy to himself was from financial year 2018 to financial year 2019 – I have the figure – from Rs. 41,000 crore to Rs. 71,000 crore which is 74% increase.

Therefore, I would end by saying four supplementary questions to the ten questions I have already asked. The ten questions were asked by giving satirical reasons based on the same logic as the Finance Minister applied to Ola Uber.

Now these are non-satirical, non-rhetorical real questions.

  • Why is the Finance Minister more interested in cracking jokes and finding excuses instead of putting India at least on some sober path as far as the economy is concerned?
  • How and with which magical wand does the Prime Minister and the Finance Minister intend to make this usually under-performing ten sectoral economy into a 5 Trillion economy.

तो ये दो प्रश्न हैं, पहला था कि वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री ये मजाक क्यों कर रहे हैं, बहाने क्यों बना रहे हैं, उसकी जगह आर्थिक स्थिति को वापस ट्रेक पर क्यों नहीं रख रहे हैं?

दूसरा, कृपय़ा ये बताएं कि कौन सी जादुई छड़ी के अंतर्गत आप 5 ट्रिलियन इक्नॉमी बनाएंगी?

तीसरा, ये जो ऑटो सेक्टर का जिसका जिक्र किया माननीय वित्त मंत्री ने, वो एक साल से अत्यंत कठिनाईयों में है, रो रहा है, चिल्ला रहा है। आपका ओला-उबर का कारण तो अभी आया है। एक साल में कृपया बताएं कि आपने ऑटो सेक्टर के विषय में 1,2,3 क्या ठोस कदम उठाए?

The auto sector has been shouting from the roof tops in pain and agony for at least 9 to 12 months. Kindly disclose to the Nation, what concrete steps you have taken Mr. Prime Minister and Madam Finance Minister to put it even partially on the right track.

And lastly but most importantly – why is the Hon’ble Prime Minister hiding behind this inefficient, under-performing, non-performing Finance Minister. Why is he not stepping forward and taking ownership. Why is he not taking steps concretely and addressing the Nation – he addresses the Nation so marvelously and beautifully with eloquence on so many issues, why is he not addressing on this, why is he silent and hiding on this issue.

मेरा अंतिम प्रश्न, माननीय प्रधानमंत्री जो इतने प्रखर वक्ता हैं, इतने मुद्दों पर बोलते हैं, वो क्यों अपने वित्त मंत्री के पीछे छुपे रहते हैं, चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? वो इऩ 10 सेक्टोरल मुद्दों पर कभी खुद बयान क्यों नहीं देते, सामने क्यों नहीं आते देश के और क्यों नहीं बताते देश को कि या तो कुछ खराबी है, या नहीं, अगर नहीं तो क्यों त्राही-त्राही हो रही है, और अगर है तो आप क्या ठोस कदम उठा रहे हैं?

एक प्रश्न पर कि आपको इस बात की खुशी नहीं है कि वित्तमंत्री ने जो मुद्दे बताए मंदी के उनमें से एक भी कारण के लिए न तो कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया गया है और न ही नेहरु जी को ठहराया गया है, डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि आपने वैसे बड़ी एक आश्चर्यचकित बात जरुर प्रकाशित कर दी, लेकिन बहानेबाजी की भी एक हद होती है 2019 और 2020 में 5 वर्ष की सरकार के बाद आप इतनी आसानी से और बेशर्मी से लेगेसी और नेहरु जी को नहीं ला सकते, जो आप बहानेबाजी के तौर पर 2014 में ले आए थे, लेकिन मैं खुश होता जरुर अगर देश की दुर्दशा नहीं होती। अब खुशी कैसे करें जब देश की इतनी दुर्दशा हो रही है, जो 10 आंकडे मैंने, आपको 20 नहीं दिए सिर्फ 10 महत्वपूर्ण सैक्टर्स की बात की है, इतनी दुर्दशा में मैं कहाँ ताली बजाऊँ, क्यों ताली बजाऊँ और कैसे ताली बजाऊँ।

On another question Shri Singhvi said – that is a question like the answer  Mr. Modi gives.  I find him today speaking not on the Economy but on the ‘Cow and Om’. Somebody else speaks on how the Congress is doing. Is that the answer to the economy which I am raising, that is exactly divert, digress  two Ds.

इसी से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि जैसा आपने प्रश्न पूछा वो उसी बात का द्योतक है, उसी बात का उदाहरण है कि मुद्दे पर बात नहीं करो, बड़े प्रभावशाली तौर-तरीके से मुद्दे को डायवर्ट कर दो। हमारे प्रखर और बड़े जबरदस्त वक्ता माननीय प्रधानमंत्री कभी गाय की बात करते हैं, कभी ओम की बात करते हैं, लेकिन कभी भी इतने महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्रों की बात नहीं करते, इतने महत्वपूर्ण दुर्भाग्यवश हों, या अच्छे हों आंकड़ों की बात नहीं करते, हल की बात नहीं करते, अपने वित्त मंत्री के बहानों की बात नहीं करते।

प्रधानमंत्री जी के दिए बयान कि गाय और ओम की बात करने से आप बचते हैं से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि इस देश में जो लोग गाय और ओम की बात करते हैं उनको शायद व्यथा हो उससे, मैं नहीं समझता कि इस देश में किसी को एक भी व्यक्ति है, जिसको किसी रुप में लेशमात्र तकलीफ है गाय या ओम से। तकलीफ है हमें इन ठोस आंकड़ों की जवाबदेही नहीं होने से। माननीय प्रधानमंत्री हमें इन ठोस आंकड़ों का जवाब दें, हम लोग घास नहीं खाते, जिससे कि हमारा माइंड डायवर्ट हो जाएगा, मुद्दे गायब हो जाएंगे और देश में अचानक एक नई स्फूर्ति आ जाएगी।

On another question related to the Motor Vehicle Amendment Act, Dr. Singhvi said- I think you have to understand the architecture of the Motor Vehicles Amendment Act which was passed in the last session and I think that question arises from some amount of endurance of the architecture. The architecture is simple, there are two parts through the amendments, and one is a mandatory, non-derogable part. The non-derogable part relates to drunk driving, you cannot change it by state level, it relates to some other serious offences, like I am running you over deliberately or grossly, negligently hitting you in the car. I don’t think those should be liable to alter at the state level. The second part is things like slight over speeding or over packing your car or over loading your car etc. that part is liable to be changed by states.

Now, I think since states are elected through democratic processes at their local level, they have to bear the brunt if they take this option and Gujarat is the first one to take the action, Gujarat is the first one, then they have to evaluate on the touchstone on the local democratic will of the people who have elected them. But the law gives them that power and I think it is fair to find distinctions, which, ultimately will vary from state to state, you may decide and your state to have ‘X’, I may decide my state to have ‘Y’.

शरद पवार जी और सोनिया गांधी जी की मुलाकात से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि यह बड़ा स्पष्ट है और इसका स्पष्टीकरण और भी आ गया मैं आपके समक्ष कुछ और स्पष्ट कर दूँ। ये मुलाकात महाराष्ट्र स्पेसिफिक बिल्कुल नहीं थी, ये गलतफहमी है। माननीय पवार जी और सोनिया जी व्यापक डिस्कशन्स अखिल भारतीय स्तर पर बातचीत कर रहे थे, देश में जो मुद्दे हैं, इस सरकार की जो असफलताएं हैं, जो प्रतिशोध की राजनीति है, इत्यादि-इत्यादि उस पर बात थी, ये किसी रुप से महाराष्ट्र स्पेसिफिक डिस्कशन नहीं था। जो आप जानते हैं, ये जनरल सेक्रेटरीज के लेवल पर होता है, आप जानते हैं इंटिग्रिटी, सीट एडजस्टमेंट्स और मुद्दों पर होते हैं, इसलिए इसको गलत मत समझना।

On another question Dr. Singhvi said – that is precise, why I clarify what  I did one minute ago except for you who might be the elephant in the room, nobody else was in the room; therefore, please go by my official reaction.

ज्योतिरादित्य सिंधिया जी से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि बिल्कुल नहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया जी की किसी और विषय पर मुझसे  अभी बात हुई आते हुए। उनको अपनी एक अपॉइंटमेंट कैंसल करनी पड़ी, क्योंकि वो महाराष्ट्र में बीच में बैठे हुए हैं, और वो मीटिंग लंबी चलेगी। ये आपको कौन बता रहा है? आज ही हो रही है बात, बावरिया साहब आए हुए हैं, तो ये सब चीजें चल रही हैं, ये सब मिथ्या प्रचार है।

Sd/-

(Vineet Punia)

Secretary

Communication Deptt.

AICC

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