13-Jan-2019 कांग्रेस मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन संबोधित करते हुए

ALL INDIA CONGRESS COMMITTEE

24, AKBAR ROAD, NEW DELHI

COMMUNICATION DEPARTMENT

ड़ॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि इन तथ्यों से बड़ा स्पष्ट है कि राफेल की जाँच से बचने के लिए चौकीदार ने सीवीसी को कठपुतली बना दिया है। अगर मोदी सरकार में रत्तीभर भी शर्म बाकी है तो तत्काल और हम ये कांग्रेस पार्टी की तरफ से ये मांग कर रहे हैं कि सीवीसी को तुरंत हटाना चाहिए। चाहें वो इस्तीफा दें या हटाए जाएं, निरस्त किए जाएं वो एक डीटेल की बता है, लेकिन इस प्रकार कि लुका छिपी, इस प्रकार की असंवैधानिक, कठपुतली वाला व्यवहार सीवीसी से अपेक्षित नहीं है। हाँ, Collaborator for violating the constitution (CVC) से जरुर ऐसी अपेक्षा की जा सकती है।

आज आपने क्या देखा है? आपने देखा है स्पष्ट रूप से कि ऑब्जेक्टिव तथ्य, जिनका आप और हम पुष्टिकरण कर सकते हैं, वो लिखित रुप से पब्लिक डोमेन में आए हैं। सीवीसी एक दूत बन गए हैं, अस्थाना के लिए। सीवीसी एक एजेंट बन गए हैं, एक नौकर बन गए हैं। सरकार के लिए एक संदेश ले जाने वाले मैसेंजर बन गए हैं। सरकार के सब गलत और काले कारनामे करने के लिए एक वकील बन गए हैं और सरकार में अस्थाना के लिए लॉबिस्ट बन गए हैं, जो अस्थाना को सपोर्ट कर रहे हैं।

ये ऑब्जेक्टिव तथ्य क्या हैं? जिनके पुष्टीकरण की भी जरुरत नहीं है, क्योंकि वो साफ पारदर्शी रुप से आपके सामने हैं। पिछले वर्ष एक तिथि को अक्टूबर में एक घंटे से ज्यादा सीवीसी मिलने गए सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा से, ये रिकॉर्डेड है, लिखित है। क्या इस मीटिंग की पुष्टिकरण करने की आवश्यकता है?, क्या ये किसी ने इसकी मनाही की है? क्या इसको किसी के द्वारा नकारा गया है? उसी एक घंटे की मीटिंग में बार-बार ये कहा गया कि All will be well, everything will be OK. ऐसा कहा गया है कि अस्थाना के खिलाफ जो सीबीआई डायरेक्टर द्वारा आरोपों की जो एंट्री है, उनकी सर्विस रिकॉर्ड में एंट्री है- अस्थाना की डाउटफुल इंटीग्रिटी वाली अगर उसको बदल दिया जाए, उसको सुधार कर दिया जाए। ये सब तो लिखित है, इसका भी तो डिनाइल नहीं आया अभी तक और मैं वापस स्पष्ट कह रहा हूँ कि इनमें से कुछ लिखित चीजें सौ प्रतिशत पटनायक जी को नहीं दिखाई गई होंगी। मैं इसके आगे आरोप लगा रहा हूँ कि इसमें पूरा संदेह है हमें कि इसमें से सौ प्रतिशत या 99 प्रतिशत उच्चतम न्यायालय को भी नहीं दिखाई गई। इससे जाहिर है कि आप जनहित के लिए, राष्ट्र हित के लिए विजिलेंस कमिश्नर नहीं हैं, आप विजिलेंस रखते हैं- आप सतर्कता रखते हैं सिर्फ अस्थाना के लिए और अस्थाना के राजनैतिक मालिकों के लिए, ये इस देश के लिए बहुत दुर्भाग्य की बात है ।

मैं याद दिलाऊँ कि ये वही सीवीसी है, जो 23 अक्टूबर को डेनमार्क जा रहे थे। अंतिम क्षण में अपनी यात्रा को निरस्त किया, कैंसिल किया। साढ़े आठ से 12 बजे रात तक बैठकर सिर्फ एक काम किया, सरकार के आदेश पर, प्रधानमंत्री जी के आदेश पर कि किस प्रकार से वर्मा को हटाना है, रोकना है। उस ऑर्डर को लेकर वर्मा को 1-2 बजे सर्व किया गया, रोका गया। अब रोचक बात सुनिए, वो हटाना तो उच्चतम न्यायालय ने निरस्त कर दिया इस आधार पर कि ऐसा सिर्फ समिति कर सकती है, सीवीसी नहीं कर सकता है क्योंकि सीवीसी न नियुक्त करने वाली संस्था है, न हटाने वाली। उसी  सीवीसी रिपोर्ट को आधार बनाकर, जिसको उच्चतम न्यायालय ने नहीं देखा था, क्योंकि उच्चम न्यायालय ने किसी और लीगल ग्राउंड पर हटाया था, उसी का आधार बनाकर वापस तुरंत प्रधानमंत्री जी की समिति ने टू-वन के आधार पर फिर हटा दिया। कौन सी रिपोर्ट है ये? कौन सी सीवीसी है ये? आप पहले वकील बनते हैं, दूत बनते हैं, एजेंट बनते हैं, संदेश वाहक बनते हैं, अस्थाना के और फिर अस्थाना के आरोपों को लेकर, रिपोर्ट में लिखकर उसकी रिपोर्ट बनाते हैं और वही पुलिंदा आपकी पैरवी का और अस्थाना के आरोपों का वही पुलिंदा समिति के निर्णय का आधार बन जाता है। मैं चुनौती दे रहा हूँ कि आपने पटनायक साहब को इसमें से कितना दिखाया, शेयर किया और मैं आगे चुनौती दे रहा हूँ कि हमारे पास कागजात नहीं हैं, लेकिन पूरा संदेह है कि इसका आंशिक रूप भी उच्चतम न्यायालय से शेयर नहीं हुआ होगा। तो ये हो क्या रहा है? हमने ‘केज पैरेट’ सुना है सीबीआई के बारे में, आज हम देख रहे हैं कि कोई नया एक सतर्कता का एजेंट और दूत सरकार का और अस्थाना का ‘New Vigilant Slave’ of the Government and Asthana has been born. हम कहना चाहेंगे बड़े स्पष्ट रूप से कि प्रधानमंत्री जी रामलीला मैदान से देश को, आम नागरिकों को बार-बार सच्चाई का दम्भ भरते हैं और संदेश देने का प्रयत्न करते हैं। रामलीला मैदान से वो ऐसी बातें करते हैं, क्योंकि मर्यादा पुरुषोत्तम राम को सच्चाई का प्रतीक माना जाता है। क्या ये आपकी सच्चाई की परिभाषा है? क्या आपकी सतर्कता, स्पष्टता, सच्चाई का द्योतक या मापदंड यही है? क्या आप सच्चाई को झूठ से हराने की कोशिश कर रहे हैं?

हम प्रधानमंत्री मोदी जी को बड़ा स्पष्ट कहना चाहते हैं, कि आपने तत्काल अगर सीवीसी को नहीं हटाया, तो आपका सच, पूरे देश के सामने बहुत जल्दी सामने आने वाला है।  

एक प्रश्न पर कि क्या कांग्रेस सीवीसी को हटाने का कोई अभियान चलाएगी के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि निश्चित रुप से हमने अभियान आज शुरु किया है। आपके जरिए शुरु किया है, क्योंकि खबर अभी आई है और आप ही लोगों से अपील करता हूँ। जब प्रेस ऐसी सूचनाएँ, ऐसे तथ्य प्रकाशित करती है। क्योंकि जो तथ्य है इसको अभी तक नकारा नहीं किसी ने। इसका निरंतर एक अभियान चलेगा, चलना चाहिए और हमारी बात नहीं, हमने तो उठाया है, देश का हर अंग ये जवाबदेही चाहता है, सिर्फ राजनैतिक पार्टी ही नहीं आम नागरिक भी इसकी जवाबदेही चाहता है।

किस प्रकार से ये कॉन्स्पिरेसी है, 23 अक्टूबर की रात से लेकर हर अंग को subordinate  करना, subvert करना, उसको पंगू बनाना, ये सरकार इसमें माहिर है।

एक अन्य प्रश्न पर कि जस्टिस सीकरी को पिछले महीने सरकार ने लंदन वेस्ड सीसैट ट्राईनल में उनको एक पोस्ट के लिए सिलेक्ट किया था और उसको स्वीकार भी कर लिया था जस्टिस सीकरी का सीबीआई डायरेक्टर के खिलाफ फैसला देना, कांग्रेस का क्या स्टैंड है के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि आप एक गंभीर मुद्दा उठा रहे हैं, मैंने अभी-अभी आते हुए देखा है, मेरे सहकर्मी इसके तथ्यों को जानकर हम आपके समक्ष होंगे, इसके विषय में, लेकिन मैं अभी कह नहीं पा रहा हूँ क्योंकि मेरे पास अभी तथ्य नहीं हैं, लेकिन हाँ, आपके मुद्दे के विषय में कांग्रेस पार्टी विचार करके आज या कल में आपके सम्मुख होगी।

उनकी आड़ में ये सब हो रहा है और इसलिए हमें कोई विश्वास या आशा नहीं है कि जिस कंधे की आड़ में आप ये गोलियाँ चला रहे हैं उसी कंधे को आप हटाएंगे और या वही कंधा अपने आप इस्तीफा देगा।

एक अन्य प्रश्न पर कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बयान दिया है कि मोदी अच्छा काम कर रहा है तभी विरोधी अवसरवादी गठबंधन बना रहे हैं? विपक्ष के अंदर confidence नहीं है अकेले लड़ने का, के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि ये विकृत कुतर्क क्या है? क्या इस देश में कभी भी गठबंधन सरकार बनी नहीं इससे पहले? क्या मोदी जी मजबूर, लाचार और बेकार बताते हैं उस सरकार को जिसमें मोदी जी की पार्टी जनता दल के साथ 1977 में जो शामिल हुई थी, वो कौन सी सरकार थी, मिलीजुली जिसको आप कहते हैं? जब आप चाहें तो मिलीजुली, जब वो चाहें तो मजबूर। उसके बाद कितनी बार हुई हैं सरकारे, 1989 में, जिस सरकार का आपने समर्थन किया, स्व. श्री राजीव गांधी के विरुद्ध, वो कौन सी सरकार थी? वो गठबंधन की थी या नहीं? 1991 में भी एक प्रकार से गठबंधन की ही सरकार थी अगर आप उसको टेक्निकली देखा जाए तो माइनोरिटी सरकार थी, तो सब सरकारें निकम्मी हैं, सिर्फ भाजपा सरकार अच्छी है। सबसे महत्वपूर्ण वाजपेयी जी की सरकार, कौन सी सरकार थी? तो ये क्या एक नया इतिहास लिखना, बरगलाना और एक प्रकार से देश के रीति-रिवाज, प्रादेशिक पार्टियाँ गठबंधन की प्रक्रिया, सबको गाली-गलौज देना है, अपमानित करना है। प्रादेशिक पार्टियाँ और साथ मिलना-जुलना असंवैधानिक नहीं है, अपना संविधान पढ़कर आईए और मैं एक चीज और बता दूँ आपको, गठबंधन की सरकारों में कई ऐसे फेज आए हैं, विशेष रुप से 1991 के बाद, जबकि विकास की दर सबसे उत्तीर्ण रही है। कई गोल्डन बजट्स आए हैं, देवगौड़ा जी की सरकार के वक्त, तो इसलिए अपने उल्लू सीधे करने और आपको झुठलाने या बरगलाने के लिए कहने की बातें होती हैं ये, इसमें कोई  तथ्य नहीं है, कोई आधार नहीं है।

Sd/-

(Vineet Punia)

Secretary

Communication Deptt.

AICC

 

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