BJP silent on sting video showing confession of 10 Cr bribe to Soma Patel-Gujarat ex MLA

Highlights of Press Briefing                                                       02 November, 2020

Dr. Abhishek M. Singhvi, Shri Rajeev Satav and Shri Arjun Modhwadia addressed media via video conferencing, today

डॉ अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि मेरे साथ मेरे विशिष्ठ मित्र हैं, मोढवाडिया जी, सातव जी। जो अभी प्रणव झा ने कहा 18 अक्टूबर के बारे में, उसकी विचित्र विडम्बना देखिए। विडम्बना ये कि मैंने 18 अक्टूबर को भी और उस दिन तो सातव जी भी साथ थे। शुरुआत की ये कह कर कि मेरा दुर्भाग्य है कि कुछ ही हफ्तों में मैं वापस आपके सामने प्रस्तुत हुआ हूँ, फिर से भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण लेकर। हालाकिं उस समय मेरा संकेत था कर्नाटक में भ्रष्टाचार की घटनाओं को लेकर।

अब आप देखिए दो हफ्ते बाद हम फिर आपके सामने हैं क्योंकि ये जो श्रंखला है, ये जो कड़ी है, ये बीजेपी की अलग-अलग प्रदेशों में और विशेष रुप से जो दो हमारे देश के विशिष्ठ युवराज हैं, उनका जो संबंध है गुजरात से, तो गुजरात में ये बार-बार ऐसे उदाहरण हम देखते हैं। मैंने आपको उस वक्त उदाहरण दिया था कि किसी एक प्रदेश में ही ऐसा होता है, ऐसी बात नहीं है। कर्नाटक में कई उदाहरण दिए हमनें, गुजरात में आज हम दूसरी बार आपके समक्ष हैं, चौथे उदाहरण को लेकर।

लोकायुक्त रिपोर्ट मध्य प्रदेश से व्यापम इत्यादि-इत्यादि; चूंकि संस्थागत स्मृति को याद दिलाना पड़ता है इसलिए मैं इसका जिक्र वापस कर रहा हूँ। लेकिन प्रमाणित क्या चीज होती है- प्रमाणित इन सभी उदाहरणों से ये होता है और जो आज उदाहरण देने वाला हूँ मैं उससे भी कि भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर, प्रादेशिक स्तर पर खरीद-फरोख्त की सरकार है। इन्होंने राजनीति और दुकानदारी में फर्क और भिन्नता करीब-करीब शून्य कर दी है। विधायिका को शर्म से गिरा दिया है। ये सब आपको अतिश्योक्ति नहीं लगते होंगे कि जब हम लगभग 3-4 हफ्ते से 4 ऐसे उदाहरण लेकर आए हैं। अब हम पिछले बार के अक्षय पटेल के उदाहरण जिसके बारे में आपने टेप देखा, काकड़िया जी के, प्रद्युमन जी के, इत्यादि-इत्यादि छोड़कर एक नए उदाहरण को आपके सामने प्रस्तुत करते हैं, जो है श्री शोमा भाई पटेल, पूर्व एमएलए।

अब इस विषय में मेरे कॉलीग्स आपको कुछ समय बाद विस्तृत रूप से उन्हीं की आवाज, उन्हीं की बातचीत वीडियो पर दिखाएंगे। आपको याद है, पिछली बार जो दिखाया था हमने वीडियो उसमेंम छाती ठोककर गर्व के साथ बताया जा रहा था आपको कि इतने करोड़ रुपए भाजपा ने एक ‘पैसे की फैक्ट्री’ की हैसियत से वितरण किया था। आज एक और महोदय, जो टेप में दिखेंगे आपको, वापस छाती ठोककर गर्व के साथ बता रहे हैं कि ‘हमको दल बदली के लिए, सरकार गिराने के लिए, अनैतिक कार्य करने के लिए, संविधान का उल्लंघन करने के लिए कम से कम दस करोड़ रुपए दिए गए हैं’। और ये महाशय नाम भी लेते हैं उस उच्चतम श्रेणी का, जिसको मैं, चाहे आपको अच्छा लगे तो शहंशाह और युवराज कह सकता हूँ। आपको दूसरा लगे अच्छा तो मैं ‘दो युवराजों की जोड़ी’ कह सकता हूँ। वो नाम लेते हैं जिनके बारे में बताया जाता है कि भ्रष्टाचार का श्रोत वहाँ से है, षड़यंत्र वहाँ से है, वितरण वहाँ से है, आदेश वहाँ से है। इन सबको संदर्भ रखते हुए मैं आपको वापस जो ज्यादा व्यापक मुद्दा है, उसके बारे में 10-12 संकेतात्मक बिंदु आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। बाकि गुजरात से जो तथ्य हैं वो मेरे दोनों काबिल मित्र सातव साहब और मोढवाडिया साहब आपको अवगत करवाएंगे, लेकिन इसका जो व्यापक प्रसंग है, वो क्या है!

  1. ये आरोप-प्रत्यारोप के क्षेत्र से बाहर है, ये कैमरे में आपके सामने, स्वयं स्वीकारिता है, डींग है, घोषणा है, हौसलेदार भाषण है, कि हाँ, इतना दिया गया था।
  2. जाहिर है इसमें सत्तारूढ़ पार्टी लिप्त है। केन्द्र की सत्तारूढ़ पार्टी हो या प्रदेश की हो और उसका नाम आप सब जानते हैं।
  3. जिन आंकड़ों की हम बात कर रहे हैं, वो कोई आम आंकड़े नहीं है, आज का टेप आपको 10 करोड़ का दावा बताएगा एक व्यक्ति के लिए। पिछली बार दावा बड़ा था इससे भी ज्यादा। अब आप औसतन रेट लगाएं या सबसे ऊँचा वाला आंकड़ा लें, ये आपके ऊपर निर्भर करता है। लेकिन अगर आप एमएलएज के जो नंबर हैं, अलग-अलग प्रदेशों में जो देख रहे हैं, उनसे इसकी गिनती करें, तो आपको जाहिर है कि इस सरकार की, इस सत्तारूढ़ पार्टी का सिर्फ एक उद्देश्य है कि खरीद-फरोख्त के लिए वॉर चेस्ट बनाकर रखे, एक पिटारी बनाकर रखें, सिर्फ़ इसी काम के लिए।
  4. ये देने वाले का चरित्र, उसकी नैतिकता, उसकी राजनैतिक सोच दर्शाता है। जो है लोलुपता सत्ता के लिए- एक घृणात्मक लोलुपता- असीमित लोलुपता मैं कहूँगा, पद के लिए, सत्ता के लिए।
  5. इन दो ‘युवराजों की जोड़ी’ के बिना न ये अनुमति होती है, न ये किया जाता है औऱ जो टेप अब दिखाएंगे, उसमें तो माननीय गृहमंत्री का नाम लिया है इन महाशय ने और ये आपको एक शीर्षतम स्थान पर दिखाता है कि क्या हो रहा है।
  6. मेरा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मैं समझता हूँ, छठा है कि हमारे इतने प्रखर और मुखर प्रधानमंत्री, भाषण में इतने तीव्र शब्दों का प्रयोग, इतनी निपुणता दिखाने वाले, जब ऐसे मुद्दे हम उठाते हैं तो उन्हें क्या सांप सूंघ जाता है? क्यों चुप्पी साथ लेते हैं? जो अंग्रेजी में कहते हैं कि Silence is eloquent, ये चुप्पी कहाँ से आती है? एक शब्द नहीं सुना हमने 18 अक्टूबर के बाद, एक शब्द नहीं सुना युदियुरप्पा जी के विषय में मैंने? आपसे विस्तृत आंकड़े के साथ, तथ्यों के साथ, व्हाट्सएप चैट के प्रमाण के साथ प्रेस ब्रीफिंग ली थी। मैं आपको पुनः विश्वास दिला सकता हूँ कि एक शब्द नहीं सुनेंगे हम आज के बाद, क्योंकि ये युवराज की जोड़ी या शहंशाह- युवराज की जोड़ी या राजा और महाराजा की जोड़ी, इन मुद्दे पर कुठ नहीं बोलेंगे। ये सिर्फ जुमलेबाजी से आपको बताएंगे, कुशासन के जो तथ्य हैं और तत्व हैं, उसके बारे में कोई जवाब नहीं सुनेंगे आप।
  7. मैंने जो दूसरी बात कही थी, पिछली बार, जो मेरा आज का सातवां पॉइंट है, जो दूसरा पहलू था, वो है कि ये कोई आम चीज़ नहीं है। हमने संविधान में इतना माथा-पच्ची करके, हमारे संसद के डिबेट्स पढ़िए 1984-85 में, ये कानून क्यों पास किया था, दल बदली का? उस कानून की तो आपने धज्जियाँ उड़ा दी। उस कानून की तो आपने अवमानना कर ली। उस कानून की मूल सांस्कृतिक संवैधानिक स्पिरिट क्या थी- उसकी आत्मा क्या थी? विधायिका के उन मामलों मैं नैतिकता रखना- वो कानून जो हमने दल-बदली का बनाया है, उसका सबसे ज्यादा अपमान, उल्लंघन और जैसा मैंने कहा धज्जियाँ उड़ाने की प्रक्रिया अगर की है किसी ने, तो भाजपा ने की है। हर प्रदेश में हमारे पास हर दिन उदाहरण आ रहे हैं और दूसरी पार्टियों में चुनाव के वक्त आप इंकम टैक्स रेड करवाते हैं। खुद की पार्टियों में खुद आप पैसे का वितरण करते हैं, ये कहाँ का न्याय है, मुझे पता नहीं है?

मैं आपको तकनीकि चीजों से बोर नहीं करना चाहता, लेकिन हमारे कम से कम दस उच्चतम न्यायालय के निर्णय है, एक नहीं, पाचं नहीं, दस, जहाँ पर इसप्रकार की दल-बदली कर कॉन्स्टीट्यूशनल सिन, संवैधानिक पाप किया गया। अरे भाई, ये बीजेपी से प्रश्न पूछना चाहिए कि कितनी बार इस पाप को करेंगे आप? दस बार पाप करके चुप्पी साधना और उसके लिए कोई प्रायश्चित नहीं करना, कोई मानना नहीं, स्वीकारना नहीं, अजीबोगरीब उत्तर देना, क्या यही आपकी अस्मिता और पहचान है?

मैंने आज पढ़ा अखबार में और मेरे मित्र ज्यादा बताएंगे आपको कि बीजेपी के प्रादेशिक अध्यक्ष का एक बड़ा रोचक जवाब आया कि जब ये हुआ था, तो मैं था ही नहीं अध्यक्ष,मैं तो बाद में आया, मेरे से मिले नहीं, इत्यादि-इत्यादि। ये एक प्रकार से तो जो हम कह रहे हैं उसकी पुष्टि करता है। हम ये थोड़े  ही कर रहे हैं कि आप थे या नहीं थे। तो मुद्दा नहीं है कि आप ये इरेलिवेंट चीज है कि आप थे नहीं थे। हम दिखा रहे हैं आपकी बीजेपी की निरंतरता, प्रादेशिक स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर माननीय प्रधानमंत्री जी की आँख और नाक के नीचे की निरंतरता। कभी आप हैं, कभी ‘ए’ है, कभी ‘बी’ है, कभी ‘सी’ है, लेकिन ये चलता रहता है निरंतर ये प्रक्रिया और जवाब कुछ नहीं आता है सिवाए इसके कि मैं नहीं था, वो थे। अप्रासंगिक जवाब है और मैं समझता हूँ कि हम जो आरोप लगा रहे हैं उसका पूरा पुष्टिकरण है। जैसा मैंने आपको याद दिलाया, ये हर प्रदेश की कहानी है, बीजेपी की जुबानी और मैंने आपको उदाहरण दिए थे, मणिपुर से लेकर गोवा के, गुजरात से लेकर कर्नाटक के, इत्यादि-इत्यादि।

मैं आपनी बात अंत करूँगा, आपको ये याद दिला कर कि जब सबसे भीषण हमारे यहाँ देश में पैंडेमिक चल रहा है, मानवता का सबसे भीषण पैंडेमिक, इन 8-9 महीने में हमने आपको कम से कम 10 ऐसे उदाहरण दे दिए हैं, जहाँ आपको पैंडेमिक कोविड के वक्त माइग्रेंट लेबर की तरफ देखने का समय नहीं है, सहायता और हीलिंग टच का समय नहीं है? इतने ही रुपए हैं आपके पास वितरण करने को तो मैं आपको दस और अच्छी चीजें बता सकता हूँ, सुशासन की जिसमें आप इन रुपयों का वितरण कर सकते हैं, उपयोग कर सकते हैं। आप ऐसे समय में भी इससे ज्यादा गिरावट क्या हो सकती है, ऐसे समय में भी ऐसे कार्य कर रहे हैं आप।

तो दोस्तों अब गुजरात में हल्ला है कि माननीय प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की ‘युवराज जोड़ी’ ने वहाँ की राजनीति को सेठों का गल्ला बना दिया है। जो न खाऊँगा, न खाने दूँगा के शब्द हैं, ये व्यंग्य लगते हैं। ये मजाक लगते हैं, बड़ा अपमान का मजाक, देश के साथ, जनता के साथ और प्रश्न उठता है कि वो प्रखर और मुखर चौकीदार कहाँ है, जो सिर्फ बोलने में चौकीदार है और करने में कसूरवार है।

Dr. Abhishek Manu Singhvi said- Friends, I will not take much time, you have been very patient and my colleague respected Mr. Satav and Mr. Modhwadia will add context and facts from Gujarat to it. My colleagues in the AICC will show you the fourth of such chain of videos in hardly 2-3 weeks.

This is a 4th example. It is supremely ironical that I started the briefing hardly two weeks ago on 18th October by apologizing for my misfortune in having to take briefings on this subject and said that because that was about two weeks after the Yediyurappa briefing I had then taken. Now again in less than two weeks I am before you to tell you the Chal, Chehra and Chalan, the identity of the BJP party, be it at the centre, be it at the state level. I must put it in context that this is certainly not a flash in the pan. This is certainly not a isolated one of incident. From Manipur to Goa, from Karnataka to Gujarat, time and again, time and again shamelessly, we have had this excessive greed for power, bordering on paranoia, we will win or lose election but, we must be in power. We will have a fair fight and we will lose but, we must get power at all costs. This is the real point which all these incidents illustrate and by this shameless action legislature has become a forum for business for the BJP. I had used the phrase trade, trafficking and transactional analysis of BJP in the legislatures, the three Ts, aggressively indulged in by the BJP.

 I will not repeat the three names I have brought to you on 18th from Gujarat MLAs, from the Akshay Patel’s, the Kakdia’s, and the Pradyuman Jadeja’s to the 4th example today of Mr. Soma Bhai Patel, where with great pride, great confidence, great assertion and accomplishment, he claims and accepts and repeats and asserts that Rs. 10 crores minimum was the price for defections. That video he also asserts that this has the blessings of one of the two Yuvrajs of this country, whether you like to call it the combination of two Yuvrajs or the Shahenshah and the Yuvraj, but, Mr. Home Minister’s name has specifically been taken on Camera. But, I want to look less at the facts and more at my 7 issues of the larger prospective, partly repetitive, but, they need to be repeated underlined because institutional memory is short and the BJP hopes that the people of this country have even short a memory, that they eat grass and they will condon repeatedly these kind of egregious conduct. So, I am repeating the fact that this is candid camera. It is not a case of argument and counter argument or proof. It is candid camera, ‘Pratyaksh Praman’.

  1. It is clear which party at the centre and at the state level is indulging in this with relentless frequency.
  2. The amounts we are talking of are humongous. There are ordinary amounts; we are talking in this case in this tape of Rs. 10 crores and for one MLA. Of course, the figures in the last set of tapes on 18thOctober were larger but, let us take lower figures and multiply them by the number of defections which this party has engineered across India in diverse states. You will immediately realize that a war chest of enormous proportions is maintained by the BJP for this dirty tricks department, for these nefarious activities. If half of that was used for social welfare, we would not have the long lines of migrant labour and the pitiable condition of ordinary people during Covid times. But, then the focus of this ruling party at the Centre and in Gujarat, the focus has never been social welfare. It has been to break Governments and make Governments, by hook or by crook and more usually by crook, not by hook.

I have repeatedly said that of this double combination of the two Yuvrajs, all that we get a silence, not a word and eloquent Prime Minister with great Jumlas is suddenly seized by silence whenever we point out these things. There is neither reprimand, nor admonishes, nor action, nor suspension, nor dismissal, not even an acknowledgement. It is time the Prime Minister reacted at least his own home state to such repeated clear proved allegations.

I had mentioned last time and I am duty bound to repeat that the whole country participated in thinking out a strategy as far back 1984-85 to prevent what the Supreme Court of India has ten times, more than ten but, minimum ten times called a constitutional sin. A constitutional sin of defection of immorality, of lack of any principle in parliamentary or assembly life and then they passed this law which we know as the 10th schedule.

Well, have you even seen a 10th schedule been blown to smithereens? Have you ever seen the 10th Schedule being so blatantly insulted as by the BJP? The law prevents change of parties. So, simple way is found. Don’t change your parties, no 10th schedule, simply take money and resign. What a nice way to circumvent the law! Then number two, when you resign, while you are not elected, you become a minister, no violation of 10th Schedule! Now while you are a minister, you spend six months and by virtue of your ministry-ship you get reelected somehow in a bye election! What a beautiful way of blowing the 10th Schedule sky high. It has happened repeatedly from Karnataka, to Goa, to Manipur, to Gujarat, it is not the first time, Haryana also. This is, as I said the true Chal, Charitra, Chehra of this party which preaches to you with Jumlas and with sermons. This is the true Chal, Charitra, Chehra of the two Yuvrajs of the ruling Party. Silence, I would say their silence is incrementing, their silence is eloquent, their silence is culpable, and may I end by saying that it is tragic, it is terrible, it is insensitive to the core to do all these in the 8-10 months of Corona. The worst pandemic faced by Humanity in current times and instead of providing the healing touch, distributing much needed resources, instead of reacting to the misery of migrants, MSMEs, you have war chests of this kind of nefarious immoral activity.

So, friends, I would end by saying, that Na Kahunga, Na Khane Dunga sounds like Alice in Wonderland. It is hurtful to call yourself a Chowkidar is to say what Alice in Wonderland said that words mean what I say they mean. They have no other meaning then what I said the meaning.

Of course, at the end of our address you will see the video, but, may I now request my colleagues to address you, but, end by reminding you that you are and the people of India through you are the ultimate sentinels to demolish this kind of nefarious activity day in and day out, week in and week out, month in and month out.

श्री राजीव सातव ने कहा कि वरिष्ठ नेता आदरणीय अभिषेक मनु सिंघवी जी, अर्जुन भाई और सभी प्रेस के साथी। जैसे 18 अक्टूबर को अभिषेक जी ने पीसी की थी और उन्होंने तो कई सारे वीडियोज आपके सामने लाए थे और बीजेपी का भांडाफोड़ किया था। 2014 में भाजपा ने हर वक्त ये कहा था कि गुजरात में उन्होंने बहुत अच्छा सुशासन दिया है और उसकी चर्चा उन्होंने की। 25 साल में आपने देखा होगा कि गुजरात में भाजपा की सरकार है। पिछले लोकसभा में भी 26 में से 26 सीट गुजरात की जनता ने भाजपा के पक्ष में दिए थे। जब ये बात है, जब गुजरात की जनता ने इनको सत्ता चलाने के लिए दिया था, 150 सीट नहीं आई थी, लेकिन 99 सीट तो उनकी आई, लेकिन भाजपा फिर भी आत्मनिर्भर क्यों नहीं बन पाई? प्रधानमंत्री जी कहते हैं आत्मनिर्भर बनो, लेकिन कांग्रेस की धारा से कांग्रेस के एमएलए इनको क्यों  बार-बार तोड़ने पड़ रहे हैं और किसलिए ये हो रहा है और क्यों ये कालाधन का इस्तेमाल इस प्रकार से हो रहा है ये सवाल है।

2017 को जब अहमद पटेल जी का चुनाव था, तब भी 14 एमएलएज को तोड़ने की कोशिश हुई और 14 में से 12 एमएलए हार गए विधानसभा तक बाद में पहुंच नहीं पाए। यही बात 2019 के राज्यसभा चुनाव में भी दो एमएलएज को रिजाइन उन्होंने करवाया और दोनों के दोनों उसमें हार गए। कोरोना के कहर सारे विश्व में है। गुजरात में तो कोरोना का हालत इतना खराब है, न अस्पताल में जगह है, न सरकार पूरी तरह से इस कोरोना की महामारी को मैनेज कर पाई है और इसमें पूरे मीडिया ने इसके बारे में चलाया। सोशल मीडिया में ये रहा कि कोरोना में पूरी तरह से गुजरात की सरकार फेल हुई और ऐसी महामारी में इस प्रकार से 8 एमएलए जो पैसे देने की कोशिश की। अभिषेक जी ने जैसा कहा कि अक्षय पटेल का वीडियो आपने देखा, काकड़िया का वीडियो आपने देखा और प्रद्युमन जड़ेजा के भी स्टेटमेंट आपने देखे, उसी कड़ी में सोमा भाई का भी ये वीडियो सामने आया है और उसमें स्पष्ट वो कहते हैं कि 10-10 करोड़ तो मिला ही  है, कुछ को टिकट मिला, औऱ सबको पैसे मिले। ये वीडियो सामने आया है और उससे स्पष्ट दिखता है कि पिछले तीन साल में 2017 में 14 विधायकों को पैसे देने की कोशिश हुई, 2019 में राज्यसभा इलेक्शन में  दो विधायकों को पैसे देने की कोशिश हुई और अभी 8 लोगों को ये बीजेपी ने पैसा दिया, भाजपा को ये पूरी तरह से एक्सपोज करता है और कालाधन सही मायने में कौन इस्तेमाल कर रहा है और कालाधन अगर किस के पास है और कैसे इसका इस्तेमाल हो रहा है, ये इसमें स्पष्ट है। ये जनादेश का पूरी तरह से अपमान है औऱ जो प्रधानमंत्री और गृहमंत्री गुजरात की बात करते हैं, तो ये गुजरात का भाजपा का मॉडल इस प्रकार से सबके सामने आया है और इससे स्पष्ट दिखता है कि पूरे देश में इसी मॉडल पर भाजपा काम करना चाह रही है। जो अभी बाई इलेक्शन्स हैं, इसमें तो गुजरात की जनता सबक सिखाएगी ही लेकिन देश की जनता के सामने ये पूरी तरह से भाजपा एक्सपोज हुई है, क्योंकि गुजरात की ये बात करते थे, गुजरात में अगर विकास किसी का हुआ है, तो सिर्फ विधायक फोड़ना और विधायकों को पैसे देना यही एजेंडे पर भाजपा का काम है, इससे स्पष्ट दिखता है।

श्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि कल जो वीडियो सामने आया है वो तो एक सिर्फ जो बोलते हैं कि दो मिनट का वीडियो है और रिलेवेंट पार्ट ही हमने डिस्प्ले किया है। गुजरात में जब भी राज्यसभा का चुनाव आता है, उसी समय ही वो डिफेक्शन करवाते हैं, मंत्रियों की खरीद-फरोख्त करते हैं, किसी को कैश देकर छुट्टी करते हैं, किसी को कैश प्लस टिकट दे दी जाती है। सवाल ये उठता है कि ये गुजरात मॉडल में जो प्रधानमंत्री बार-बार कहते हैं और आज भी बिहार चुनाव हो या कहीं का चुनाव हो, वो कहते हैं कि भ्रष्टाचार नहीं होना चाहिए, कालाधन का उपयोग बंद होना चाहिए और कालाधन, जो बंद करने के लिए तो बहुत सारी कोशिशें होती है, ऐसे ही उन्होंने बताया। तो बात ये है कि ये 10-10 करोड़ रुपए जो डॉ सिंघवी जी ने बताया कि मिनिमम मान लें। 50 करोड़ से लेकर 10 करोड़ तक है, लेकिन हम 10 करोड़ का ही आंकड़ा देंगे, तो 80 करोड़ रुपया यहाँ खर्च हुआ है तो ये 80 करोड़ रुपया कैश में दिया गया है। कालाधन और कालाधन भ्रष्टाचार से ही आता है। तो गुजरात में ही या मध्य प्रदेश में या गोवा में, या कर्नाटक में, या मणिपुर में सरकार गिरानी होती है, तो कहीं 25 करोड़, कहीं 10 करोड़ ये कालाधन का एकदम व्यापक उपयोग सिर्फ़ भाजपा के ट्रेजरी में ही क्यों आ रहा है? सवाल ये है कि ये कालाधन भ्रष्टाचार से आता है और भाजपा की सरकारें उसको जनरेट करती हैं।

On a question that BJP has been repeatedly indulging in such activities as you said buying of MLAs and MPs and ahead of every election and you have said that they have repeatedly violated with 10th Schedule and Courts have already considered this as a constitutional sin, so, why doesn’t the Congress Party moves the court to get a permanent solution to this so that this does not happen yet, Dr. Singhvi said- This is a fundamental mistake to think         that such kind of activities are movable in Courts. On the contrary this is about the BJP will want us to do. They will want a legitimation function of the Courts on technical grounds. Whereas what is the method, how is it? It is a larger issue, it will take nine months, so they want you to get lost in myriads of small details, so that the real issue is lost. Somebody may say that technically there is no violation of 10th Schedule because the man has resigned. The real issue is moral, is political! It is also the constitutional but, Court decisions come on technical law and in the fullness and rightness of time. And it allows frequently the wrong doer to get away.

Secondly, remember that we are entitled to fire on multi barrel guns. When we talk to you and draw your attention we talk to the nation through the media which is the heart and soul of our democracy. It doesn’t mean that subsequently somebody may not go to Court, but, that is the more medium term and long term process. In the immediate term, it is important to jog public memory, to shock public conscience and that is why, this is important so each is not brutally exclusive from the others.

(वीडियो दिखाया गया…)

श्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि आप सबने वीडियो देखा और वीडियो में क्लियरली बता रहे हैं और उसमें अमित शाह, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी जी और गुजरात के अध्यक्ष जो हैं, उनके बारे में जिक्र किया गया है कि उनके साथ बातचीत हुई और डील भी हुई। डील में बात हुई है और दस करोड़ से कम किसी को नहीं दिया है आर आगे ये भी कहा है कि इस्तीफा देते हैं तो मुफ्त में नहीं देते, कुछ मिल रहा होता है तभी देते हैं।

तो ये बहुत बड़ा स्कैम है, जिसमें आठ एमएलए शामिल हैं। पांच को टिकट दिया तीन को सिर्फ कैश ही दिया और उनको ये दूसरी बात ये बता रहे हैं, ये वीडियो में नहीं है, लेकिन बताया जाता है कि उनको बोर्ड कॉर्पोरेशन भी दिया जाएगा, जिनको टिकट नहीं दिया है। तो 80 करोड़ का मामला है, उसकी जांच होनी चाहिए, कालाधन भाजपा कहाँ से जनरेट करती है, कौन से डिपार्टमेंट में से भ्रष्टाचार करती है और उस पर व्हाइट पेपर लेकर एक कानून में संशोधन होना चाहिए और जांच में जो जिम्मेदार हैं, उनके सामने एंटी करप्शन एक्ट के तहत एक्शन लेना चाहिए और जांच एजेंसियां तो अभी भाजपा की एक ब्रांच बन चुकी हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जो सिटिंग जज हैं, उनकी अध्यक्षता में ये जांच होनी चाहिए।

Watch Video Here : https://www.youtube.com/watch?v=fzH3_SG70uM

Sd/-

(Dr. Vineet Punia)

 Secretary

Communication Deptt,

AICC

Leave a reply