Dr Abhishek Manu Singhvi,Spokesperson AICC Addressed the Media in Hindi

डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते कहा कि आज हम आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं- छत्तीसगढ़ के विषय में जहाँ CAG की एक बड़ी दुखभरी रिपोर्ट आई है जिसका संबंध है कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विकास के लिए जो योजना बनाई जाती है, खर्चे तय किए जाते हैं, उसके विषय में CAGने छत्तीसगढ़ के बारे में अपनी रिपोर्ट में लिखा है और छत्तीसगढ़ विधानसभा में औपचारिक रुप से प्रकाशित हुई है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग हजार करोड़ से ज्यादा का व्यर्थ का व्यय किया गया है। Anicutsअर्थात् छोटे बांध जिससे सिंचाई और भूमिगत जल को बढ़ाने के विषय में नियत लक्ष्य की तुलना में 100 की जगह 30 प्रतिशत काम हुआ – ये CAG की प्रकाशित रिपोर्ट है। 1095 करोड़ का व्यर्थ खर्चा हुआ और ये काम, खर्चा, योजना बनाई गई बिना इसे ध्यान में रखे कि जमीन से संबंधित झगड़े पहले निपटाए जाने चाहिए थे, मुआवजा वाले मामले पहले निपटाए जाने चाहिए थे। कॉन्ट्रैक्टर के द्वारा दी गई समय सीमा के अंदर वो बहुत फीट होनी चाहिए थी। इन सब विषयों का उल्लंघन हुआ है। अंत में टिप्पणी करते हुए CAG ने कहा-

 “Concerned Department neither resolved with these bottlenecks to ensure completion nor assessed the damage to old structures and foundations of the anicuts”.

ये आखिरी वाक्य बड़ा मजाकिया भी है कि आपने हजार करोड़ तो खर्च किए और व्यर्थ खर्च किए। 30प्रतिशत काम किया यानि 70 प्रतिशत काम नहीं किया। लेकिन इन सब घपलों के साथ-साथ जो पुराने Anicuts या छोटे बांध थे जो कृषि और सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, उनको नुकसान पहुंचाया और जो पुराने स्ट्रक्चर थे उनको भी क्षतिग्रस्त किया।

इसके बाद उन्होंने कहा है- पानी के विषय में जो एक नीति होती है और योजना होती है उसमें भी घपला हुआ है। बार-बार दावा किया मोदी सरकार ने प्रदेशों के विषय में कि हमने जमीन का पानी रिचार्ज किया, जिसको ग्राउंड वॉटर रिचार्ज कहते हैं।

CAG कहता है कि हमने 72 सैंपल उठाए हैं। 72 में से लगभग 48 में कोई ग्राउंड वॉटर रिचार्ज में बढ़ोतरी नहीं पाया गया। यानि कि 80 या 75 प्रतिशत में ग्राउंड वॉटर रिचार्ज का दावा झूठा निकला। 80 प्रतिशत में Irrigation उपलब्ध नहीं था। मैं बाकि CAG की टिप्पणी के विषयों की बात नहीं कर रहा – गुणवत्ता कार्यक्रम था, मेडिकल एजूकेशन का था, उसमें बहुत सारी असफलताएं बताई, CAG ने छत्तीसगढ़ में। मैं उन सब मुद्दों में नहीं जा रहा हूं। असली बात ये है कि CAG ने खुलासा किया है छत्तीसगढ़ के कई ऐसे दांवों के विषय में। आपने पहले भी और मुद्दे देखे हैं वहाँ पर लेकिन हमें पूरी निराशा इसलिए है कि उसके उपर कोई ठोस कदम उठाना सिवाए जुमलों और दावों के, और कुछ नहीं हुआ।

यहाँ 3 बातें महत्वपूर्ण हैं। ये मूलत: ग्रामीण क्षेत्र हैं अर्थात् ये गरीबों फायदे के लिए हैं। यह एक सूखा प्रदेश है,गर्मी बहुत पड़ती है। Irrigation में हजार करोड़ व्यर्थ में खर्च होना, पुराने बांधों को खराब करना और जितने भी मुद्दे होने चाहिएँ उनका पहले से बगैर आकलन किए ग्राउंड वॉटर रिटार्ज के विषय में बनाए गए सारी योजनाएं कागजी निकले और साथ ही जो दावे किए वो झूठे साबित हुए।

एक और संबंधित मुद्दा है केन्रीए य मंत्री श्री एस.पी.सिंह के सचिव के उपर ED अटैचमेंट नोटिस भेजे जाने का, जिसमें प्रश्न उठता है कि इसके लिए जवाबदेह कौन है? एक सचिव जो श्री वी.के सिंह के इतने निकट माने जाते हैं, जो जाने-माने सचिव रहे हैं श्री एस.पी.सिंह, उनको लगभग 21 करोड़ से ज्यादा के लिए ED ने अटैचमेंच का नोटिस भेजा है। तो किसी रुप से पूछताछ के विषय में, विचार-विमर्श के विषय में मंत्रीमहोदय को नोटिस भी नहीं गया है। क्या उनके सचिव श्री एस.पी.सिंह के पास इतनी बड़ी राशी का, जो लिखित EDका नोटिस है, उनके पास इतनी बड़ी राशी मिलना और उनके मंत्री महोदय हैं, निकटतम महानुभाव हैं,उनको एक सूचना के आधार पर भी प्रश्न-उत्तर के आधार पर या नोटिस के आधार पर बुलाया तक नहीं गया,क्या ये आपको संभव लगता है? ED के नोटिस में उनके सचिव को लिखा गया है कि हम 22 करोड़ के विषय में ये अटैचमेंट नोटिस दे रहे हैं। हमारा प्रश्न है कि पूछताछ क्यों नहीं की?

वास्तव में ये कार्यक्षेत्र हैं, आर्मी – रक्षा मंत्रालय का। क्या इससे इनके महानुभाव का कोई संबंध नहीं है और क्या आप, हम और ED समझता है कि ये व्यक्ति इतने प्रभावशाली हैं इस वर्ग, विषय में कि बिना किसी प्रभाव के, बिना किसी प्रोटेक्शन के ऐसा हुआ? मैं समझता हूं कि ये बहुत अजीबो-गरीब है कि कोई तहकीकात नहीं हुई। ये महत्वपूर्ण प्रश्न है।

एक प्रश्न पर कि क्या विरभद्र सिंह जी के आय से ज्यादा संपत्ति के मामले में चार्जशीट किए जाने पर इस्तीफा देने की जरुरत है, श्री सिंघवी ने कहा कि निश्चित रुप से नहीं। ये बहुत पुराना केस चल रहा है। सिर्फ चार्जशिट फाईल हुई है। एक पूरी प्रक्रिया चल रही है। इसमें कोर्ट के कई आदेश हुए हैं। विरभद्र सिंह जी की याचिकाओं में ये पूरा केस है कि ये मनगढंत बनाया हुआ, राजनीतिक प्रतिशोध से किया गया केस है। उच्चतम न्यायालय तक आंतरिक आदेश गए हैं, वहाँ से नीचे आए हैं। आज की तारीख में हमारे पास पूरा ठोस विश्वास है और मैटिरियल भी है जो उन याचिकाओं में भी आ गया है जिससे ये स्पष्ट है कि ये राजनीतिक द्वेष के आधार पर किया गया है। तो मैं नहीं समझता कि राजनीतिक द्वेष के आधार पर अगर ये है तो कोई डरने वाला है, भय़भीत होने वाला है और विरभद्र सिंह जी ने कहा कि है वो लड़ेंगे और विजयी होंगे।

 

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