Dr. Abhishek Manu Singhvi, MP, Spokesperson AICC addressed the media today at AICC Hdqrs.

Highlights of Press Briefing                                                              19 January, 2020

 

डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि दोस्तों, मैं आज एक बड़ी विशेष विडंबना के विषय में बात करने आया हूँ, त्रिकोणीय विडंबना है। विडंबना का मैं संक्षेप में विवरण कर दूँ, ये त्रिकोणीय विडंबना क्या है।

एक तरफ आप जानते हैं कि बेरोजगारी का क्या हाल है। उसके आंकड़ों से आप अच्छी तरह सुपरिचित हैं, मैं कुछ दोहराऊँगा, उनको बताऊँगा, ये सिर्फ बेरोजगारी की बात कर रहा हूँ, लेकिन जो व्यापक आर्थिक दुर्दशा है, उसके संदर्भ में ये और भी खतरनाक हो जाती है।

दूसरा, बेरोजगार और आर्थिक दुर्दशा एक तरफ, दूसरा, जो जुमलेबाजी आप सुनते हैं, दिन प्रतिदिन, मेक इन इंडिया, यानि औद्योगिक उत्पादन, हमने एक जुमले से हल कर दिया, जबरदस्त औद्योगिक उत्पादन होगा, ये उस विडंबना का दूसरा अंग है। और तीसरा है, कि आप उस मेक इन इंडिया को किस आधार पर प्रमाणित कर रहे हैं। बेरोजगार क्या कर रहे हैं, आप मेक इन इंडिया कर पा रहे हैं या नहीं कर पा रहे हैं और उसका आपने हल क्या निकाला है, अभी आपको पूरी तरह से समझ नहीं आया होगा, मैं जरा आपको स्पष्ट रुप से बता दूँ। क्या है ये त्रिकोणीय बेरोजगारी?

आम बेरोजगारी की जब बात करते हैं तो आप जानते हैं और कई बार हमने इसी पोडियम से आपको आंकड़े दिए हैं कि आर्थिक और बेरोजगार के विषय में कोई भी आंकड़ा लें आप, वो बहुत ही दयनीय है। लेकिन आज जिस त्रिकोण की मैं बात कर रहा हूँ, उसका मुख्य बिंदु है कि एक बहुत ही दुखद लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण रिपोर्ट आई है, एनसीआरबी द्वारा। उन्होंने जो ये बहुत ही दुखद हमें समाचार दिया है कि इस देश में औसतन 36 लोग प्रतिदिन बेरोजगारी के कारण आत्महत्या करते हैं। वर्ष  2018 का आंकड़ा उन्होंने प्रकाशित किया है, जिसके अंतर्गत लगभग 26 हजार लोगों ने आत्महत्या की है, इसी कारण से। जो स्वयं स्वरोजगार हैं, या बेरोजगार हैं, उनके विषय में ये प्रकाशित हुआ है आंकड़ा।

अब इस देश की आर्थिक स्थिति की क्या दुर्दशा होगी, जहाँ सवा सात बेरोजगारी की दर है, इतने सारे लोग आत्महत्या कर रहे हैं और तीसरा आंकड़ा कि जो कृषक हमारे देश में कई वर्षों से आर्थिक दुर्दशा का प्रकोप झेल रहे हैं, उनसे दुगने से ज्यादा यानि 26 हजार बेरोजगार आत्महत्या कर रहे हैं। यानि जो आंकड़ा कृषकों के लिए हैं, उससे 10,340 से ज्यादा फिगर है बेरोजगारों द्वारा आत्महत्या की।

आत्महत्या के जो आंकड़े दिए गए हैं, एनसीआरबी द्वारा उनमें वृद्धि हुई है, लेकिन मेरा संदर्भ आज आर्थिक दुर्दशा के कारण जो आत्महत्याएं हो रही हैं उससे लेकर हैं, और इनको आपको समझना पड़ेगा और जो ज्यादा व्यापक संदर्भ है, आर्थिक दशा का और मेरे मित्र चिदंबरम जी ने अभी कुछ दिन पहले आपके सामने आंकड़े रखे मैं वो दोहराना चाहता हूँ क्योकि वो इस आत्महत्या के आंकड़े से सीधा सरोकार रखते हैं।

इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन जो साढ़े 6 प्रतिशत थी, आईआईपी इंडेक्स कहते हैं उसको, 4.6 थी, वो 2016 से लेकर अब 2019 में 2.4 हो गई है। बीच के आंकड़े हैं मेरे पास साढ़े छ से सवा चार हुई, चार हुई, अब 2.4 पर चल रही है।

एमएसएमई को जो क्रेडिट दिया जाता है, वो देश का बहुत महत्वपूर्ण एक तौर तरीका है, जानने का कि किस प्रकार से आर्थिक स्थिति को स्पंदन मिल रहा है, प्रोत्साहन मिल रहा है। वो 2.3 और 2.7 के आसपास है। दयनीय, सबसे न्यूनतम जिसको कह सकते हैं आप।

औद्योगिक प्रोडक्शन जिसको आप मेक इन इंडिया के जुमलों के साथ संवारते हैं वो 2016 से 2020 तक तीन बार नेगेटिव रहा है, माइनस, 1.2, 1.4 और .7। सिर्फ 2017-18 में एक दयनीय पोजिटिव फिगर था 1.7, इत्यादि, इत्यादि। लेकिन इनको आप अगर सीधा जोड़ें आत्महत्याओं के प्रकाशित फिगर से तो क्या है इस देश में इतने बड़े-बड़े भाषण देना, इतनी विदेश यात्राएं करना, इतने जुमले कसना, इतने बड़े-बड़े महत्वपूर्ण शब्दों का प्रयोग करना और आप इसको नहीं रोक सकते, ये सीधा प्रश्न मैं माननीय प्रधानमंत्री जी से करता हूँ।

दूसरा पहलू है इसका और वो सब संबंधित हैं, जैसा मैंने कहा एक त्रिकोण है, जिससे संबंधित पहलू हैं। जो कई सारे जुमले कसे गए मेक इन इंडिया के, औद्योगिक प्रोडक्शन के, उनमें एक महत्वपूर्ण अंग था ‘सोलर पावर प्लांट’। सोलर पावर इस सरकार, माननीय प्रधानमंत्री जी का एक  बहुत आकर्षक, एक महत्वपूर्ण वर्ग है, उसकी सच्चाई क्या है? सच्चाई और भी दयनीय है और वो भी सीधा संबंध रखती है कि क्यों आत्महत्याएं हो रही हैं।

फोटो वॉल्टिक सेल, जिसको पीवी सेल कहते हैं सोलर में, जो सोलर का ह्रदय है, आपके अंगों में वो सबसे महत्वपूर्ण अंग है और मॉड्यूल जो होता है पीवी सेल का उसका 85 प्रतिशत सामान, चीन मलेशिया और वियतनाम से आता है, ये सच्चाई आपको बता रहा हूँ मैं मेक इन इंडिया की। आप मेक इन इंडिया क्या करते हैं? एक ऊपर का ढांचा बना देते होंगे शायद। अंदर का ह्रदय, अंदर के अंग, 85 प्रतिशत, चीन, मलेशिया औऱ  वियतनाम से आते हैं। इनके जो आंकड़े हैं, वो भयानक हैं। 2014 के बाद पीवी सेल और मॉड्यूल के आयात का मूल्य 90 हजार करोड़ तक बढ़ गया है। 90,000 crore is the import bill. ये फिगर 90 हजार करोड़ जो डायरेक्ट एफडीआई होता है हमारे देश में, उससे ज्यादा है। कई और सेक्टर के आयात की जो राशि है, लिमिट है, सीमा है, उससे कहीं ज्यादा है और अगर आप 2014 – 19 के लिए रिन्यूवल एनर्जी क्षेत्र की जो बजट राशि है, उसको पूरा जोड़ लें, पांच वर्षों के लिए, ये रिन्यूवल एनर्जी के अंदर आता है, सोलर तो उससे 6 गुणा ज्यादा है ये 90 हजार करोड़। क्या है ये? ये आयात बिल है। आयात किसका है? 85 प्रतिशत चीन का सामान है, मलेशिया का सामान है, वियतनाम का सामान है, जिसको आप मेक इन इंडिया, सोलर में हम ये कर लेंगे, वो कर लेंगे, उसके नाम से लेते हैं।

और दोस्तों, इन तीनों चीजों का हल ये सरकार क्या निकाल रही है, उसका मैं आपको संकेत देना चाहता हूँ अब हमारे पास इसके ऊपर प्रमाणित तथ्य नहीं है, लेकिन हम डरे हैं इस सरकार के पुराने इतिहास से, जब ऐसे तकलीफ वाले आंकड़े आते हैं तो ये सरकार अलग-अलग तौर-तरीकों से, लुके-छिपे, नए-नए षड़यंत्र रचती है। आज एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, आज-कल में एक रिपोर्ट की सरकार कह रही है कि कई सारे हमारे जो आंकड़े हैं, उनको हम रिवाइज करेंगे, वापस देखेंगे, पुनः देखेंगे, और आपको कारण बताया जा रहा है इसलिए क्योंकि वो अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के आंकड़ों को नहीं शामिल करते हैं, ये रिपोर्ट परसों भी आई है, आज भी आई है। यानि हमारे जो आंकड़े हैं, सरकार कह रही है, मैं नहीं कह रहा है, वो पूरी तरह से सही नहीं हों, पूरी तरह से व्यापक नहीं है, सबको शामिल न करें, इसलिए हम उन पर पुनः विचार करेंगे। पुनः विचार इसलिए करेंगे, क्योंकि ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर की इकाईयों को देखा जाता है। देखिए, अगर ये वास्तव में एक्सरसाइज हैं, तो हमें कोई आपत्ति नहीं है, सकारात्मक एक्सरसाइज हैं, अगर उसमें कुछ गलतियाँ है, लेकिन मैं आज एक भविष्यवाणी दे रहा हूँ, आपको पूर्वानुमान दे रहा हूँ, आपको चेतावनी दे रहा हूँ, कि हमें भय है, देश को भय है, क्योंकि हम आपके पुराने हथकंडे जानते हैं कि ये तौर तरीका है, जितने पुराने बेसिस हैं, जितने पुराने आंकड़े हैं, उनको पुनः वापस रिवाइज करना।

आपको मालूम है इसी सरकार के सीईए, श्री सुब्रहमण्यम ने क्या कहा, कि जो आप पढ़ रहे हैं आंकड़े जो ढाई प्रतिशत, जो प्रकाशित आंकड़े हैं, उनसे कम हैं। अब ये होते-होते 6 से साढ़े पांच पहुंच गया, साढ़ें पांच से पांच पहुंच गया, आज 4.9 औपचारिक औफिशियल फिगर है।

बीजेपी के किसी भी व्यक्ति से आप सेंट्रल हॉल में बात कर लीजिए, कहते हैं, ज्यादा से ज्यादा ये 4 या साढ़े चार से ज्यादा नहीं हैं। लेकिन आप 4.9 मान लीजिए।

अगर अरविंद सुब्रहमण्यम के कैलकुलेशन और आंकड़े सही है और ये दो या  ढ़ाई प्रतिशत कम है तो आप समझ सकते हैं कि क्या आंकड़ा है। आज आप ये याद रखिए, सरकार ने एक तो बेसिस जीडीपी का बदल दिया, दूसरा, जो पहले आंकड़े छपे थे, उनको कम दिखा दिया। अब आज तीसरी बात हो रही है कि भाई, ये जो आंकड़ा छपा है 10 रुपए का, इसमें अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर नहीं है, ये वास्तव में 50 रुपए है, ये मुझे लगता है इस रिपोर्ट को पढ़कर। मैं चाहूँगा कि मैं गलत हूँ, मैं चाहूँगा कि ये स्पष्टीकरण आए सरकार से, माननीय प्रधानमंत्री से, माननीय वित्तमंत्री, गृहमंत्री से कि इंटर जनरेशनल कंपेरिजन, ये एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो इंटर जनरेशनल तुलनात्मक एप्रोच होता है।

देखिए, आज अगर मैं सेब ले रहा हूँ, तो कल भी मुझे सेब की कीमत तुलनात्मक रुप से देखनी पड़ेगी। ये नहीं कि आज मैं सेब की कीमत देखूँ और कल नारंगी की। इसलिए आप अगर इसका बेस बदलते हैं, तो आप अलग-अलग वर्षों में, अलग-अलग सरकारों में, अलग-अलग रिजीम्स में तुलनात्मक रुप से विश्लेषण नहीं कर पाएंगे, इसलिए हमारा भय है। इसलिए हमारा भय है क्योंकि सरकार ये पहले भी कर चुकी है।

तो मित्रों मैं ये कहकर अपनी बात खत्म करूँगा कि This Government is desperate to find quick fix solutions, Jumla solutions, misleading solutions, to find sleight of hand solutions, to avoid substance, to camouflage with forums, to avoid the real meat of the matter and give a misleading new issue to digress and divert attention. We are most concerned that this should not happen in the future, because of reports today and recently in the past that the Government has suddenly expressed alarm and this is not be. The Government has said so, that they believe that lot of the figures including what they call it, I am quoting the Government, “Revamp of official statistics”, this is the Government’s words.

This is being done, or being proposed, or being thought of because they believe that unorganized sector has not been looked at. We have no problem with the constructive exercises, but, surely, from when India was born from 1947 till today, from 1947 till today, we have had the unorganized sector. We have had statistics. Please don’t do something, where you cannot do Inter Generational Comparisons. Please, don’t do something, where you artificially boost your 4.9% official rate of growth, which your own CEA believes, may be 2 to 2-1/2% less than what is projected and stated, even every BJP member in private, in Central Hall of the Parliament confesses that the rate is at least 1% or .6 or .7% less than the official figure of 4.9 and why is this important? It is important because the Government does not have a clue, how to control this wild horse of a runaway economic distress. There is no rider, there is no dexterity, and there is no skill.

The Government today, in another body has published the most distressing figure, which are all aspects with the same triangle. That distressing figure is published by the NCRB, which publishes many statistics, what it has published is extremely worrying and frightening because it says that 36 people commit suicide everyday on issues related to unemployment, or lack of employment, or under unemployment.

In 2018, I am not talking of deaths, I am talking of suicides, in a depressed, manic, self build manner, and you take your life, because you have no employment. Deaths in 2018 alone are 26,085 deaths on this count. That figure is 10,349 more than the deaths caused by farm distress, which is an altogether different, also a very sad, but a different category. 10,349 more deaths by suicide, by people concerned and troubled by unemployment than by farmer distress. What is the reality behind this? The reality is, Jumlas, like ‘Make in India’ along with the clueless Finance Minister, Prime Minister, Home Minister, Government of India, no Idea what to do? An enemy a day, an issue a day, a pot boiler a day, keeps all these issues away and will solve the economy is the approach of this Government.

Take for example the Jumla, Make in India that is the other part of this triangle. The truth is what; one of the show pieces of Make in India was the solar sector. So many subsidies, so many jumlas, so many speeches, we will make India, one as you know there is a special international organization, which India have joined with much fan fare, one of the ministers traveled for the inauguration on solar promotion, we know the reality. It is now being published, in fact today that 85% of the inputs, the resources, the material into a solar PV Cell, it is photovoltaic cell and module, which is the heart of the solar plant, 85% of that comes from China, Malaysia, Vietnam. What is this Government, what is the Prime Minister talking about Make in India? Is it not a fraud on the people to mislead them like this? This photovoltaic cell and module, which is the heart of the solar, 85% is the import bill and it benefits these three countries, not India. The actual figure is Rs. 90,000 crores. You know Rs. 90,000 crores is more than the Renewal Energy Ministry bill, six times more than the bill for 2014-2019. I am sorry, not the bill, the scheduled budget amount for this period. The scheduled budget amount for 2014-2019 of the Renewal Energy Ministry is six times less than this Rs. 90,000 crores. Who is doing Make in India? What is Make in India, nothing but Jumlebazi.

Friends, I end with that the general strategy of the economy is known. Within the economy the particular state of all relevant parameters including parameters of unemployment are known. My colleagues have taken briefings, former Finance Minister has taken, so, I am just repeating a few figures. The Industrial Production Index has declined from 2016 to 2019. From an already small, 4.6 in 2016 is just pitiable to 2.4%, 2.4 is the Index Number in 2019-20. Credit growth to MSMEs, which is the heart and soul of economic kick, economic growth is (.9), (-.4), 2.3 and 2.7 in the last 4 years, all decimal figures. Manufacturing is the worst, which is why you have 80% import, which is why you have no credit to MSMEs, so these are all linked, -1.2 in 2016-17, 1.7 in 2017-18, -1.4 in 2018-19 and -.7 in the current year. Why will you not have 36 deaths per day related to unemployment, when this is the state of the economy? Who will give employment? If there is no credit off take, there is no manufacturing.

I conclude friends, by saying that we need more action, more results, less words. We need more concrete beneficial changes, than digressions, diversions. We need less of issues, which are non-productive, irrelevant issues, like NRC, like CAA, like NPR in a modified form. We need lesser issues of pure political rhetoric. We request the Prime Minister with folded hands to attend these issues, which are of life and death. 26,000 deaths related to unemployment, this is under reporting, highly under reported, related only to official NCRB reports on unemployment.

Sd/-

(Vineet Punia)

Secretary

Communication Deptt.

AICC

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