Dr. Abhishek Manu Singhvi, Spokesperson, AICC addressed the media at AICC Hdqrs. today.

Highlights of Press Briefing                                                                                                                                             19 December, 2019

 

डॉ. अभिषेक सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि बड़ी अजीब बात लगती है कि भारत देश की राजधानी दिल्ली में ये चीजें होना, ये सुनना, ये अपने आप में अजीबो-गरीब बात है। पूरे लालकिले के आस-पास 144, कभी 16, कभी 18, कभी 19 मेट्रो स्टेशन बंद। सब तरफ देखें, यहाँ आने वाले कई लोगों को, मुझे खुद को पता है कि हर जगह ओब्स्ट्रक्शन (obstruction) है, रोड़ बंद हैं और अद्भुत बात है कि जिस प्रकार की नोर्मलसी कही जा रही है, कश्मीर सी नोर्मलसी यहाँ भी आ रही है। कश्मीर वाली नोर्मलसी कौन सी है यहाँ पर कि खुद एयरटेल के मालिक ने कहा है कि निर्देशानुसार हमने इंटरनेट सर्विस बंद की है। खुद जीओ से औपचारिक स्टेटमेंट आया है कि निर्देशानुसार, ये मेरे शब्द को नोट कर लें, इंटरनेट बंद हो रहा है, कहाँ – दिल्ली में।

 

येदियुरप्पा जी ने करीब-करीब पूरे प्रदेश में, बैंगलोर में तो विशेष रुप से, लेकिन कई और अतिरिक्त स्थानों पर, 144 एक बड़ा रोचक प्रावधान है, जिसकी बात मैं करुंगा आपसे, 144 लगा दिया है। कोलकाता में, मुलाली में और कई जगह आप जानते हैं आपकी टी.वी. स्क्रीन पर कितने जबरदस्त डेमोंस्ट्रेशन हो रहे हैं। आज जो प्रस्तावित जितने भी अभियान थे उत्तर प्रदेश में, उनके लिए कल रात से उत्तर प्रदेश में, विशेष रुप से लखनऊ में गिरफ्तारियां की गई है। डीजीपी ओपी सिंह हैं, वहाँ पर, उनके अनुसार 3,000 लोगों को, 149 सीआरपीसी का नोटिस चला गया है। असम तो खैर, एएसयू का पूरे असम के कोने-कोने पर अभियान चल रहा है, एक चाक आउट हो गया है कि 20 तारीख को ये होगा, 19 को ये होगा, 21 दिसंबर को ये हो गया है, इत्यादि-इत्यादि, सब में व्यवधान करने का प्रयत्न चल रहा है, 144 लगाया जा रहा है, रोकथाम है, लेकिन अभियान पूरी तरह से प्रकाशित है।


बिहार में पोस्टर लग गए हैं – मिसिंग मुख्यमंत्री। पोस्टर हैं, मैं नहीं बोल रहा हूं। लापता या गायब मुख्यमंत्री माननीय नीतीश कुमार जी। म्युनिसिपल कारपोरेशन बंद हैं, स्कूल-कॉलेज बंद हैं और विशेष रुप से बिहार में, पटना में कोतवाली गांधी मैदान और शास्त्री नगर पुलिस स्टेशन एरिया में बहुत ही बड़े रुप से, व्यापक रुप से अवरुद्ध हुआ है, 144 लगा है। इतने सारे लोग हैं और ये मैं दिल्ली की बात कर रहा हूं, ये मैं कश्मीर से बाहर की बात कर रहा हूं, कोलकता, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश की बात कर रहा हूं। डी राजा, उनका 144 के नाम पर उठा लिया, सीताराम येचुरी, रामचंद्र गुहा, हमारे अजय माकन जी के परिवार के सदस्य, संदीप दीक्षित और उनकी पत्नी मोना जी, नदीम जावेद, मेरे पास नाम की सूची बढ़ती जा रही है, जब मैं अंदर आ रहा था, तब मुझे और नाम दिए गए।

 

ये क्या है? ये भाजपा काल नहीं, ये देश में अघोषित आपातकाल है। ये भाजपा काल नहीं, ये देश का अघोषित आपातकाल है, जिसको नोर्मलसी के नाम पर चलाया जा रहा है। जैसा मैंने कहा वही परिभाषा है नोर्मलसी की जो आपने अपनाई कश्मीर में, वही आप भारत के अन्य भागों में अपना रहे हैं। हर और हिंसा का माहौल दिखाई देता है। भाजपा का शासन जैसे कोई आदमखोर दिखाई दे रहा है। इसलिए लगता है कि देश में शांति तभी आएगी, जब इस सरकार को बताया जाएगा कि इनका देश से जाने का समय आ गया है।

 

आज क्या हुआ है – इस देश में आज आपके अगर मानवाधिकार हैं, संविधान का, स्वतंत्र, मुक्त रुप से अपने विचार व्यक्त करना, उसके अलावा 19 (1) ए के अलावा प्रावधान है, 19 (1) सी, 19 (1) डी, कि आप एकसाथ मिलकर हर प्रकार का डेमोंस्ट्रेशन कर सकते हैं। ये कहा गया है, ये बात सही है कि पुराने जमाने में हम ब्रिटिश को कहते थे कि रॉलेट एक्ट (Rowlatt Act) है, ये है, वो है, आज रॉलेट एक्ट तो नहीं है लेकिन गांधी जी के सिद्धातों पर अगर कोई सत्याग्रह करे, सत्य का आग्रह करे, डेमोंस्ट्रेशन करे, अभियान निकाले तो उस पर आप इस प्रकार का व्यापक रुप से रोकथाम कैसे लगा सकते हैं और रोकथाम किस नाम से? ये 144 बड़ा रोचक प्रावधान है। 144 का मतलब ये नहीं कि वो आपके अनुच्छेद 19 A यानि मुक्त विचार व्यक्त करने के मानवाधिकार या अभियान चलाने का, मिलकर साथ चलने का, उसके ऊपर हनन नहीं हो सकता 144, ये सिर्फ एक एक्ट है और उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि 144 के लिए आपको देखना पड़ता है कि शांति को ऐसा जबरदस्त खतरा है, उच्चतम न्यायालय ने पब्लिक ट्रेंकुलिटी (Public Tranquility) शब्द इस्तेमाल किया है कि बिना 144 के, हिरासत के काम नहीं चल सकता है। आज ये नहीं हो रहा है, आज 144 के नाम पर प्रिवेंटिव अरेस्ट हो रहे हैं। आप पहले जाकर डेमोंस्ट्रेशन ना कर पाएं, इसलिए आपको एडवांस में अरेस्ट किया जा रहा है। ये 144 का उद्देश्य नहीं हो सकता है, अगर ये उद्देश्य होगा तो फिर आप इस काले कानून के बारे में कैसे बोल सकते हैं?

 

सबसे महत्वपूर्ण ये सरकार चाहती है कि हम अनदेखी करें, ये सरकार चाहती है कि अनसुनी करें, Its uncaring, its unconcerned, ये भारतीय जिद्द पार्टी हो गई है, भारतीय जनता पार्टी नहीं, भारतीय जिद्द पार्टी है। सुधार के लिए कभी-कभी आपमें जो ह्युमिलिटी होगी, तभी आप सुनेंगे, जब सुनेंगे तभी समझेंगे और जब समझेंगे तब कुछ बदलाव लाएंगे। आज आप जिद्द पर चल रहे हैं। आज अगर इतना बड़ा आक्रोश है देश के कोने में तो क्या अवश्यकता है कि आप ना सुनें, अनदेखी करें, अनसुनी करें और बरकरार रहें अपनी जिद्द पर और इसी का आप प्रादुर्भाव देख रहे हैं।

 

तो मैं ये कहना चाहता हूं कि सीधा भारत के हर निवासी के मानवाधिकार का हनन है, इस प्रकार से आप अनदेखी करके और बार-बार गाली – गलौच देकर विपक्ष को और ये कहकर कि उनके द्वारा ऑर्केस्ट्रेटिड (orchestrated) है, आप बिल्कुल मुंगेरी लाल के स्वप्न लोक में हैं, आप उस ऑस्ट्रिच के प्रकार जो, अपना सिर जमीन के बहुत नीचे गाड़ चुके हैं।

 

मेरे पास कुछ रोचक आंकड़े हैं जो एक इंटरनेट शटडाउन ट्रेकर होता है। एक ट्रेकर होता है कि इंटरनेट शटडाउन कितनी बार हुआ। 2012 में 3 बार हुआ। 2013 में 5 बार, 3 और 5, सिंगल आंकड़े दे रहा हूं। 2014 में 6 बार। 2015 में 14 बार। 2016 में 31 बार। 2017 में 80 बार करीब-करीब। 2018 में 134 बार। 2019 में अभी तक लगभग 95 या 94 बार। तो अगर आप 2014 से देखें तो हर साल आंकड़ों में वृद्धि हो रही है। 5,6,7 से 31, 31 से 80, 80 से 134, 134 से 94 या 95, इंटरनेट शटडाउन और आज औपचारिक रुप से इन बड़ी-बड़ी कंपनियों के मालिकों ने वक्तव्य जारी किया है ये बताने के लिए कि हम नहीं कर रहे हैं, हमें निर्देश हुआ है, हमें आदेश हुआ है।

 

Dr. Abhishek Singhvi said I think, friends, this is a very sad day because I am speaking from the capital of India. It is a sad day for the rest of India outside J&K. We now have dissatisfaction, anger reaction, strong statements, demonstrations, campaigns, speeches across the country in every nook and cranny. I want to tell you that in Delhi you are imposing 144 almost over the entire or substantial chunk of old Delhi although it is called Red Fort ‘Ke Aaspass’. You have stopped roughly 19 Metro Stations – it is a large chunk – actually half the Metro system has come to stand still. Every part of Delhi is choking with snarls, with obstruction. JIO and Airtel have officially issued statements. It is a very-very rare deal saying that under ‘directions’ ‘under orders’, we are suspending Internet connection. Bengaluru has almost the whole city under 144. Other parts of Karnataka have done. Molali in Central Calcutta has huge demonstration. Assam and AASU campaign is known to everyone but all parts of it, all parts of Assam have declared a calibrated staggered programme on each day – 19th December, 20th December etc. for the next ten days. All this is being met by preventive arrests. In the name of 144 simply preventing people from assembling and expressing their views.

Uttar Pradesh yesterday is supposed to have arrested 3,000 people in anticipation of action being taken today. Mr. D. Raja had been picked up on 144 ground, Mr. Sitaram Yechury arrested, Mr. Ramchandra Guha, our Congress leaders Mr. Maken’s family, Mr. Sandeep Dikshit and his wife Mona and so on and so forth. I have many examples.

Gandhi Ji taught us that when you do ‘Aagrah’ for ‘Satya’, it is a ‘Satyagrah’. If people want to do ‘Aagrah’ for ‘Satya’, how can you stop them in this brazen arbitrary manner? Because you want to brush under the carpet, you want to suppress dissent; you want the country to know everything is ‘hunkey-dory’ ‘Sab theek thaak hai’, ‘Acchhe din chal rahe hain’.

You have redefined a new definition of normalcy, the J&K definition on normalcy nor prevail in the rest of the country. The point is that this is uncaring, unthinking, unseeing, unhearing Government and ruling party. It has become the ‘Bhartiya Zid Party’. Unless you hear, you must then listen, not only hear. Unless you listen, you must then absorb. If you absorb, then become aware, if you become aware, then there is some chance of change. This is not an ego issue. It is not a ‘Bhartiya Zid Party’ campaign that we will hear this terrible dissent, anger and outpouring of opposition but we will not budge. Not budging should never be an end in itself for any Government which deserves to be responsive. If there is so much feeling about this black-law, you have in your power to rethink, to redraw, to withdraw but you are too egotistical, too arrogant and too ‘ziddy’, to even contemplate hearing and listening, leave aside, recalibrate it. That is the tragedy of India. That is the tragedy of the ruling party.

Friends, a word about this so-called 144 which we hear everyday – 144 is a statute order called Criminal Procedure Code. 144 cannot affect your freedom of speech under 19 (1) (A). 144 cannot affect your rights of assembly and movement and demonstration under 19 (1) (C) and 19 (1) (D) which we forget are two separate constitutional fundamental rights Article. Now these Articles are constitutional, much higher. Can you prevent me and all of you from expressing your view by just in the name of 144 going and arresting you in advance or not allowing me to express. How else should a person or citizen of this country demonstrate? We know that you will not hear us. We know that you are bent upon passing black laws. At least allow our voice to be heard and the Hon’ble Supreme Court has said that unless there is a very palpable, clear and recordable threat to public tranquility, 144 ought not to be used. 144 is now used in a routine manner. Large sections of old Delhi, parts of Bengaluru, Assam and Uttar Pradesh, Lucknow, Allahabad, the whole cities are put under 144. That is not the object of 144.

I would, therefore, conclude by saying, friends, that we need, and as I told you, we have got the figures of internet shut-down tracker and we have now got official statement from top service providers of Telecom that ‘as per directions’ – ‘Nirdeshanusar’, we are shutting down internet. It is unthinkable in the capital city of India; it is unthinkable anywhere else in India also but intends to think that this is a new normal for Kashmir. Let this new normal become new normal for India. The numbers which the internet shut down tracker has tracked were in the single digit from 2012-2013 – 3, 5 and 6 like that. From 2015 it has become double digit 14, then in 2016 it doubled to 31, 2017 it doubled to 80 almost (79-80), 2018 it again almost registered 80% increase to 134 and so far now it is very high at 94 in the current year. That tells you its own story. That tells that you want to crush the dissent, you want to be an ostrich in sand by bending your head ten feet under the ground. You want to imagine, believe and dream that all this is orchestrated. Blame in on him, blame it on him, and blame it on him – don’t do introspection, don’t look inwards that is the problem with this Government. That is why everybody knows that this Government is in dock – ‘Yeh sarkar katghare mein khadi hai aap ke saamne’. यह सरकार कटघरे में खड़ी है आपके सामने।

 

एक प्रश्न पर कि जब आप बात कर रहे थे, उसी दौरान बंद मेट्रो स्टेशनों की संख्या 20 हो गई है और लखनऊ में भी सिचुएशन आउट ऑफ कंट्रोल हो गई है, इसका क्या सोल्यूशन नजर आता है आपको क्योंकि अमित शाह जी ने कहा है कि वो इससे पीछे नहीं हटेंगे, जो प्रदर्शन कर रहे हैं करने दो, इस पर आप क्या कहेंगे, डॉ. सिंघवी ने कहा कि यही मैंने कहा जो आप बोल रहे हैं। वो मेरी बात का बिल्कुल पुष्टीकरण हुआ है। हमें बहुत दुख है कि इस प्रकार से संख्या प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बढ़ रही है और बढ़ती रहेगी शाम तक। ये कोई हर्ष की बात नहीं है, लेकिन किसी भी सरकार का मतलब क्या होता है, सरकार होता है जब मैं आपको वोट देता हूँ। वोट का मतलब क्या होता है, आप मेरे कंसेंट से वहाँ है। आप क्यों जाते हैं अपनी कॉन्स्टीट्यूएसी हर फ्राईडे रात को? क्यों आप रेस्पॉन्सिव हो। जो पल्स है, जो संबंध हैं, वोटर और आपके बीच में, वो आप तक कन्वे होना चाहिए। इसमें कोई विजय नहीं है आपकी कि मैं चुनावित होकर अभी आया हूँ, मैं सुनूंगा नहीं, मैं बज (Budge) नहीं करूँगा, मैं सही हूँ। ‘विनाशकाले विपरीत बुद्धि’, इसलिए कहा जाता है कि जब आप अपनी बुद्धि का इस्तेमाल नहीं करते हैं और बंद कर देते हैं अपने मस्तिष्क को और अपने ह्रदय को, आपके ही नागरिक हैं, आपके ही वोटर हैं, आपके ही बच्चे हैं और ये कोई एक चीज नहीं है। अब आप ये बंद करिए, अपनी आँख बंद करना और बंद करिए ये सोचना कि ये कांग्रेस है, ये लैफ्ट है, ये राइट है, ये ममता बनर्जी की पार्टी है इत्यादि। वो एक बहुत बड़ा अंदर से उबलता हुआ आक्रोश है। मेरे को हर्ष है, मेरे को गौरव है इस बात का कि वो किसी रुप से, यह विरोध किसी एक समुदाय के साथ संबंधित नहीं है। ये गर्व की बात है इस भारत देश में कि शायद अग्रणीय पंक्ति में वो लोग होंगे, जिनको आप बहुमत मानते हैं। जिनको आप बहु समुदाय मानते हैं। ये एक गौरवशाली गणतंत्र की एक बहुत गौरवशाली बात है क्योंकि जो चीज मानवीय अधिकार के विरुद्ध है, उसमें हम सबको एकजुट होकर उठना चाहिए और आप हमारी आवाज रोक नहीं सकते, ये आर्टिफिशियल- कृत्रिम 144 का दुरुपयोग करती है।

बीजेपी के ट्वीटर हैंडल से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी के पूर्व भाषण के संदर्भ में किए गए एक ट्वीट से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि ये आज की बात नहीं है, तीन दिन से चल रहा है। मैं इसमें और जोड़ देता हूँ कि एक लियाकत – नेहरू पैक्ट की बात होती है। एक 1971 की बात होती, क्या आपको लगता है कि ये तुलनात्मक रुप से सही उदाहरण है? क्या पार्टीशन में जो हुआ उसे आज तुलनात्मक रुप से बराबरी मान सकते हैं, जो आवागमन हुआ सैंकड़ों का, लेकिन तब भी और निश्चित रुप से मनमोहन सिंह जी ने औऱ निश्चित रुप से 1971 में किसी ने कानून तो पास नहीं किया, कोई लाया था कानून क्या? आप कभी किसी नोटिफिकेशन द्वारा कुछ लोगों को कुछ दे सकते हैं, आज आपने इस देश में उद्घाटन किया है इस कानून का, जिसके अंतर्गत तीन नागरिकताएं हैं। किस सरकार ने, किस पार्टी ने किया है इस देश में इससे पहले? वाजपेयी जी ने कभी प्रस्ताव रखा? बाकियों को तो आप गिनिये ही नहीं, मानिये ही नहीं। इस देश में कोई पार्टी ही नहीं रही सिवाय  बीजेपी के, लेकिन क्या वाजपेयी जी ने कभी प्रस्ताव रखा कि हम कानून पास करेंगे और उस कानून के अंतर्गत तीन प्रकार की नागरिकताएं होंगी और अगर बाद में संशोधन हुआ तो 4 और तरह की हो सकती हैं, तो ये उदाहरण जो हैं, ये फेक हैं, फरेब है। आप समझते हैं कि हर चीज को धौंस में बरगलाने से, अगर आपने कोई नोटिफिकेशन जारी किया है युगांडा से, वो कोई कानून तो नहीं हुआ न! वो स्थापित रुप से, स्थायित्व रुप से एक आधार तो नहीं हुआ, हमारे संविधान और कानून का आप अद्भुत प्रकार के उदाहरण दे रहे हैं। ये अखिल भारतीय व्यापकता इस कानून की कभी पहले नहीं हुई, कभी पहले किसी ने सोची नहीं, प्रस्तावित नहीं की।

एक अन्य प्रश्न पर कि देश के हालात पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा है कि विरोध प्रदर्शनों के रुप में वर्तमान सरकार को अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए एक नया बहाना मिल गया है, क्या कहेंगे, डॉ. सिंघवी ने कहा कि अब इनको भी कह दीजिए कि कांग्रेस पार्टी है, पहली बात तो मैं ये बोल दूँ, सरकार का जवाब तो अभी आ गया, मैं ही दे देता हूँ सरकार का जवाब। आप भी बोल रहे हैं तो कांग्रेस पार्टी है, वो बैठा है पीछे, वो कैमरामैन भी कांग्रेस पार्टी है, ये जज भी कांग्रेस पार्टी है, हर व्यक्ति इस काम में विपक्ष है, या लेफ्ट है या झोलावाला है, या लूटियन्स दिल्ली का गैंग है, पहली बात। यही कहते हैं अनदेखी, अनसुनी, आँख पर पट्टी बांधना, अहंकार रखना। ये लोग क्यों कह रहे हैं, ये लोग कह रहे हैं क्योंकि ये लोग देश का हित चाहते हैं। ये लोग क्यों कह रहे हैं, क्योंकि ये आवाज निकल रही है आज देश के अंदर से और क्या आपको इस पर एक लेशमात्र भी संदेह है कि जो साढ़े चार नहीं होकर, कोई कहता है ढाई है, कोई कहता है, साढ़े तीन है, कोई कहता है चार है। चार से ज्यादा तो बीजेपी वाला भी नहीं कहता है, क्या चीज, आर्थिक दर विकास की। तो क्या आपको लेशमात्र भी संदेह है कि ये भटकाने, बरगलाने, डायवर्ट करने के अलावा कुछ और चीज है, लेकिन कब तक करेंगे आप? इसको आप चलाएंगे, 10 दिन, 20 दिन। क्या आप समझते हैं कि जो आदमी प्याज लेने जाता है या कल कोई और चीज लेने जाता है, जैसे टमाटर, तो क्या वो ये भूल जाएगा क्योंकि आपने उसके सामने सीएए फैला दिया, तो ये लोग समझते हैं कि देश के आप और हम घास खा रहे हैं और ये बहुत बड़ी गलती और भूल बहुत जल्द इनको मालूम पड़ेगी।

एक अन्य प्रश्न पर कि क्या आप अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे, इस बात को रोकने के लिए, क्या लोगों के साथ खड़ी होगी कांग्रेस पार्टी, डॉ. सिंघवी ने कहा कि आप क्या देख रहे हैं पिछले एक हफ्ते से, पिछले एक हफ्ते से आप क्या देख रहे हैं? आज मैंने चार नाम लिए उसमें से 4-5 नाम कांग्रेसमैन के लिए, हम हर पल हर क्षण खड़े हैं, ये प्रेस कांफ्रेंस भी खड़ी है, ये सब तरीके हैं, तौर तरीके लोगों के साथ संबंध बिठाने के, बताने के कि हम आपके साथ हैं। नैतिक रुप से हैं, हम आपके साथ राजनैतिक रुप से हैं, सामाजिक रुप से हैं, मन से हैं और हमें इस पर कोई झिझक नहीं है, हमें इससे मतलब नहीं है कि आप हो कि नहीं हमारे साथ, या वो पार्टी है या नहीं हमारे साथ, कि वो पार्टी है कि नहीं हमारे साथ। हम समझते हैं कि ये सैद्धांतिक रुप से जो कभी नहीं हुआ भारत में वो हो रहा है, इसलिए हर रुप से हमारा उत्तर आपके प्रश्न के लिए हैं, हाँ, Yes और हम खड़े हैं, and I will again quote to you Priyanka Gandhi’s tweet “The voice of a people cannot be silenced by force. Every time force is applied to dominate and rule, every time you beat and suppress, every time you push people to the wall, they will rise up stronger, their resolve will strengthen and their voice will grow louder. Our freedom movement was proof of this, our constitution is the guarantor of it and our people are the soul of it.” और गांधी जी ने कहा था कि जब ऐसी चीज हो तो सत्याग्रह करना आपका हक नहीं है, आपका कर्तव्य है, आपकी ड्यूटी है, आपका ऑब्लीगेशन है।

एक अन्य प्रश्न पर कि आपने कहा था कि सरकार पीछे हटेगी तभी शांति होगी, तो क्या आपके पास इसका कोई रोडमैप है या एक ऑब्जर्वेशन है, डॉ. सिंघवी ने कहा कि ये कुछ हद तक ऑब्जर्वेशन है। मैं नहीं समझता कि हटने का मतलब है कि तुरंत हटेगी, लेकिन मैं समझता हूँ कि जिस प्रकार से आप जिद दिखा रहे हैं, जिस प्रकार से आप कानूनों पर और जैसा इन्होंने अभी बोला कि हम नहीं हिलेंगे, ये कर रहे हैं तो निश्चित रुप से अंत की शुरुआत तो हो चुकी है।

एक अन्य प्रश्न पर कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय का अभी-अभी फैसला आया है कि उन्होंने सरकार को आदेश दिया है कि असम में शाम पांच बजे तक इंटरनेट सेवा बहाल करें, क्या कहेंगे, डॉ. सिंघवी ने कहा कि मैंने देखा नहीं है ये ऑर्डर, लेकिन ये चीजें तो अभी शुरु हो रही हैं। ये इंटरनेट कोई नैचुरल टैक्निकल कारण से थोड़े ही गया है, ये तो बहाल अभी दो मिनट में हो सकता है लेकिन सरकार अभी वापस जायेगी उच्च न्यायालय में, उस अपील में जाएगी क्या पता हो सकता है उच्चतम न्यायालय के अवकाश वाले पीरियड में जाएं, वैकेशन जज के सामने, ये आप जो इंटरनेट की बात कर रहे हैं ये तो निर्देशानुसार बंद हुआ है, तो सरकार बार-बार ये प्रयत्न कर रही है, प्रयत्न का मतलब होता है, इंटरनेट बंद करने का क्या मतलब होता है आज के जमाने में मैं आपसे पूछना चाहता हूँ। इंटरनेट बंद करने का मतलब एक ही होता है कि आपका और हमारा संबंध नहीं हो सके और क्या मतलब होता है। आज अगर आपको भय नहीं है, कोई गलत काम नहीं हो रहा है, सब चीज ठीक है, अच्छे दिन चल रहे हैं, सूरज चमक रहा है, तो आप ये सब क्यों कर रहे हो और ये कहाँ कर रहे हो, कश्मीर के कहीं बाहर, असम की बात कर रहे हो आप, उधर आप नागरिकता की बात कर रहे हो, इधर दिल्ली की बात कर रहे हो, ये तो सुनील भारती मित्तल का स्टेटमैंट जो है, अभी यहाँ पर है और ये उच्च न्यायालय को क्यों कहता है, क्योंकि गाइडलाइन्स हैं नेशनल ब्रॉडकास्टर एसोसिएशन, जिसके ये सब लोग मैम्बरान होते हैं, जिसमें एक सेवा निवृत जज हैड होता है, पहले जस्टिस जे एस वर्मा हुआ करते थे, उनका गाइडलाइन है कि आप ऐसे ही किसी के कहने पर नहीं कर सकते बंद। लेकिन क्या करे बेचारों को अपना काम चलाना है, उनको अपनी रोजी-रोटी करनी है, कोई निर्देश आ जाए तो एक सेकेंड में मना भी नहीं कर सकते, लेकिन ये सच्चाई दर्शाता है, सबकुछ ठीक है, सबकुछ नॉर्मल है, उसकी सच्चाई दर्शाता है ये।

Sd/-

(Vineet Punia)

Secretary

Communication Deptt.

AICC

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