Dr. Abhishek Manu Singhvi, Spokesperson, AICC; Shri Anil Chaudhary, President Delhi PCC; and Shri Aman Panwar, Media Panelist, AICC addressed the media via video conferencing today.

ALL INDIA CONGRESS COMMITTEE
24, AKBAR ROAD, NEW DELHI
COMMUNICATION DEPARTMENT

डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि थोड़ा व्यापक दृष्टिकोण के साथ स्टेटमेंट बनाया गया है। हमारे आज वक्तव्य का मूल आधार है ये कहना कि “देखो भाजपा और आप ने दिल्ली का कैसा हाल कर दिया है, दोनों ने मिलकर राजधानी का बंटाधार कर दिया है”।
It is from the prospective of the common man, who suffers virtual health atrocities and in the middle of political blame game, petty bickering, misgovernance and non governance by the diarchy, the duo which you call the AAP- BJP, in that sense Delhi is a classic diarchy.

ये भी दर्शाता है कि मोदी सरकार का नया ऐलान है कि स्वास्थ्य नहीं, चुनाव मेरी पहचान है। मूल मुद्दा ये है कि भारत की राजधानी है, विश्व के सबसे बड़े गणतंत्र की राजधानी है और उसके बावजूद आप देख रहे हैं पिछले 3−4 महीनों में सिर्फ अपनी गलती को दूसरे के माथे पर मढ़ देना, आपसी अहंकार की, इगो की क्लेशिस, कुशासन, शासन का अभाव और ये दोनों एंटिटी- आप और बीजेपी, दोनों का महत्वपूर्ण रोल, दिल्ली में उत्तरदायित्व अदा करना है, वो एक दूसरे के साथ डिबेटिंग प्वाइंट बनाते हैं, आरोप−प्रत्यारोप करते हैं और ये सब तब होता है जब दिल्ली जल रहा है। ये जो कहावत है रोम के विषय में कि Emperor Nero was fiddling while Rome was burning, there are two emperor Neros here, both are fiddling while Delhi and the common people of Delhi are burning हमें इस बात का गर्व है कि हमारे डीपीसीसी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री माकन जी ने बहुत व्यापक रिसर्च करके राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को एक दस्तावेज पेश किया। उसके ऊपर एनएचआरसी द्वारा 10 तारीख को एक अत्यंत महत्वपूर्ण नोटिस का, कारण बताओ का, जस्टिफिकेशन देने का आदेश आया है और हम आपको वो दस्तावेज एआईसीसी द्वारा देंगे, लेकिन उसका एक बहुत आंशिक भाग मैं आपके लिए पढ़ देता हूं− “This is a serious issue of violation of human rights. The Commission, therefore takes cognizance of the complaint and directs issuance of notices” यानि सिर्फ हवा में गुबारेबाजी नहीं है, बहुत तथ्य, आंकड़ो, जमीनी सच का आलोकन करते हुए हमारे पास शिकायत आई है और बहुत सोच समझ कर हम नोटिस जारी कर रहे हैं।

मैं आपको डिटेल देने से पहले बताना चाहता हूं कि बीजेपी और आप ने मिलकर या आप और बीजेपी ने मिलकर इस प्रथम शहर को, प्रथम उदाहरण बना दिया है कि किस प्रकार से शासन नहीं करना चाहिए क्राईसिस के समय, आपातकाल के समय, कोविड वाले आपातकाल के समय। अंग्रेजी में 3 मुस्केटियर्स होते थे, यहाँ पर 2 मुस्केटियर्स ने मिलकर, अंग्रेजी के साहित्य ने, उन्होंने दिल्ली के लिए बहुत बड़ी कीमत लगा दी है। अस्पताल में बैड का अभाव, जहाँ तक बैड मिलने का सवाल है, घोर, गंभीर अभाव। कोविड़ टेस्टिंग के ऊपर चपत, नकारना, अवहेलना करना। मृत शव क्रिमेशन के स्थलों में लाइन लगा के बैठे हैं? मैं सिर्फ इन चीजों का अलग-अलग आंकड़ों के साथ पहलू देना चाहता हूं, संक्षेप में, जिसके आधार पर श्री माकन ने ये शिकायत की और ये बड़ा स्पष्ट आदेश हुआ।

पहला मुद्दा अस्पताल के बैड का है। वहाँ के पैशेंट के लिए, बीमार लोगों के लिए जो पलंग है, उसके विषय में ये चौंकाने वाली बात है कि यहाँ पर आप देखिए कि कितने सारे अस्पताल हैं- निजी अस्पताल, प्राईवेट अस्पताल, एनसीटी के अस्पताल, केन्द्र सरकार द्वारा संचालित अस्पताल और कहा जाता है कि बीमार लोगों के लिए 57,000 बैड हैं। लेकिन ये दुर्भाग्यपूर्ण और रोचक दोनों चीजें हैं। आंकड़ा है 9 जून का कि इन नंबर के अंतर्गत 12 प्रतिशत बैड दिल्ली सरकार एनसीटी के अस्पतालों में, 8 प्रतिशत केन्द्र सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों में और 7 प्रतिशत निजी अस्पतालों में। इतने ही सिर्फ कोविड पैशेंट के लिए अवेलेबल हैं। प्रेस में आप दिन भर दिखाने के लिए अगर ड्रामा करते हैं और दस्तावेज जारी करते हैं निजी अस्पतालों, प्राईवेट अस्पतालों को, तो क्या फर्क है, 2-3 प्रतिशत का फर्क है। आपके व्यवहार और उनके व्यवहार में 12 और 60, इसका मजाक क्या है – मजाक ये है कि एक तरफ आप कहते हैं कि हमारे पास इतने पलंग है, इतनी जगह है। दूसरा कहते हैं कि आओ, जो भी आएगा हम डिमांड देंगे। तीसरा जो आता है, उसको पलंग मिलता नहीं है। आप सब जानते हैं, मैं तो उदाहरण दे रहा हूं, हर दिन-प्रतिदिन अखबार में ऐसी दर्दनाक, वेदना से पूर्ण दयनीय कहानियां (सच्चाई) हैं कि जिसको कोई जाहिर नहीं कर सकता है।

इस शिकायत में हमारा कहना है और याद रहे कि एक एफिडेविट के साथ, व्यापक रुप से एक भेजा है ज्यूडिशियल बहुत हद तक न्यायिक बॉडी, स्टैचूटरी बॉड़ी, एनएचआरसी, स्टैचूटरी है; किसी ऐसे ही कार्यपालिका द्वारा संचालित ऐसा आयोग नहीं है, जिसको ये शिकायत दी गई है। उस शिकायत में हमने कहा गया है कि 38 हैल्थ इंस्टिट्यूशन में से 33 कोविड़ पैशेंट को ले ही नहीं रहे हैं और उसमें कहा है एनएचआरसी ने कि अगर ये आंशिक रुप से भी सच है, तो ये एक प्रकार से बड़ा स्कैम है, बडा जबरदस्त कुशासन है, शासन का अभाव है, सोच गलत है, कार्य गलत है, जमीनी सच गलत है। इसलिए हमारी पहली डिमांड एनएचआरसी को है और उसके निकट भविष्य में आपको दस्तावेज मिलेंगे। वो ये है कि बाकी सब चीजें छोड़िए, आप सब पलंगों को टोटल करके लगभग 70 प्रतिशत बैड कपैसिटी तुरंत कोविड़ के लिए आरक्षित कर दीजिए। ये तीनों कैटेगरी के लिए वैसे नोर्म होना चाहिए। लेकिन और दो कैटेगरी में थोड़ा ऊपर-नीचे हो, एनसीटी के कैटेगरी में मैं अंदाजे से बात कर रहा हूं 70 प्रतिशत, क्योंकि आप खुद कह रहे हैं कि जून-जुलाई में ये आंकड़े सबसे ऊपर पहुंचेंगे, पीक सीजन है।

दूसरा, जमीन पर टेस्टिंग में अजीबो-गरीब स्थिति है। अगर टेस्टिंग में ये दुर्भाग्यपूर्ण ना होती, ट्रैजिक ना होती तो मैं इसमें मजाक समझता, कोमिक होती। सरकार 8 जून को, मैं बड़े दुख के साथ सरकारी आंकड़े दे रहा हूं, इसमें कोई डिबेट नहीं हो सकती। वो कहती है कि जून 8 को हमने 3,700 टेस्ट किए और वहीं सरकार के औपचारिक, ऑफिशियल आंकड़े कहते हैं कि 29 मई को ये आंकड़ा था 7,649, लगभग डबल से ज्यादा, तो आप सीधे गति और दिशा आगे की तरफ चल रहे हैं और वहीं सीट के साथ आप पीछे चल रहे हैं। It is astonishing then instead of progression you are regressing. अच्छा इसका बहुत ही गंभीर दुष्प्रभाव होता है, भारत और दिल्ली की जनता पर। 8 जूने को, आंकड़ों के अनुसार, 27 केस, प्रति 100 के निकल रहे थे टेस्टिंग के आधार पर, यानि 100 टेस्ट करने पर 27 पॉजिटिव केस निकल रहे थे और रिक्वरी रेट बहुत ही लो है हमारे शहर में, ये भी प्रकाशित है। अगर आपके 100 में से 27 निकल रहे हैं तो आप ऑवर टेस्टिंग से घबरा कर टेस्टिंग कम कैसे कर सकते हैं? ये एक पुरानी कहावत है अंग्रेजी में कि शुतुरमुर्ग अपना माथा जमीन में अंदर डाल देता है और सोचता है कि आस-पास जो आक्रमण हो रहा है या बहुत ज्यादा स्ट्रोर्म चल रहा है, वो उसको अफेक्ट नहीं करेगा, तो क्या आप टेस्ट नहीं करके सच्चाई को झुठला देंगे? बल्कि प्रकाशित रिपोर्ट तो और भी विडंबना दर्शाती है कि धमकी दी गई है कई संस्थाओं को, सरकारी भी और निजी को भी कि आप ज्यादा टेस्टिंग क्यों कर रहे हैं? 4 जून की प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर सरकार की एनसीटी ने 8 लैब्स को ऑवर टेस्टिंग के लिए नोटिस दिया। मुझे आज तक समझ नहीं आय़ा कि ये ऑवर टेस्टिंग नाम का शब्द क्या है? ऑवर टेस्ट की आपको मायने लगता हैं, अभिप्राय समझ आता है कि अगर कोई टेस्ट चाहता है, टेस्ट करते हैं आप और 27 प्रतिशत, 100 का आंकड़ा 50 हो जाता है, तो उस सच्चाई से दूर भागेंगे या उस सच्चाई का सामना करने के लिए अपने आपको सक्षम बनाएंगे? इस प्रकार की बेहूदा और कुतर्की बातें हो रही हैं, इस आप सरकार में और बीजेपी बहुत हद तक संचालित करती है दिल्ली को, केन्द्र सरकार। हम कहते हैं कि ‘वॉर फुटिंग’, मैंने लिखकर दिया है उस दस्तावेज में एनएचआरसी को, ये टेस्टिंग का विषय बदलना चाहिए।

जहाँ तक मृत शवों का सवाल है। जिनकी मृत्यु हो रही है, उनके लिए हमने तुरंत मांगा है कि कम से कम ये फैसिलिटी, जिस व्यक्ति को मृत्यु के बाद शांति चाहिए, जिसके परिवार के लोगों को मरने के बाद शांति चाहिए, वो मृत्यु के बाद ऐसे क्यू (लाइन) में जुड़ेंगे, ये भारत का, दिल्ली का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। हमारा माथा शर्म से झुक जाना चाहिए। स्थलों की, फैसिलिटी की जो अभी स्थिति है, उसको तुरंत दोगुना- तिगुना करना चाहिए।

टेस्टिंग से संबंधित मृत व्यक्तियों के विषय में एक और मुद्दा है। आप देखेंगे कि आईसीएमआर और WHO के मापदंड, उनके प्रकाशित मापदंड, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक हैं, उन्होंने अत्यंत महत्व दिया है कि मृत व्यक्तियों के शवों के भी टेस्ट करने चाहिए। अब जो लोग ऐसे वाहियात 4 जून को धमकियां देते हैं, कारण बताओ नोटिस देते हैं निजी और प्राईवेट लैब को कि आपने ज्यादा टेस्टिंग क्यों की? वो मृत शवों की तो टेस्टिंग करते ही नहीं है, होने ही नहीं देते हैं। अब मैं समझता हूं कि मृत व्यक्तियों के शवों की टेस्टिंग का कोई फायदा नहीं है। पर अंतर्राष्ट्रीय दस्तावेजों में क्यों कहा गया है? ये इसलिए कहा गया है कि मृत शवों की टेस्टिंग से तुरंत जिसको अंग्रेजी में कॉटेक्ट ट्रेसिंग कहा जाता है, स्थापित हो जाती है। आप ये साबित कर सकते हैं कि वो व्यक्ति मृत्यु के पहले किस पैट्रन में कॉन्टेक्ट ट्रेस हुआ था? कितने व्यक्तियों से कब और उस चेन को कंट्रोल कर सकते हैं? ये तो सिर्फ संज्ञान की बात है, कुछ करने की बात नहीं है। आपने संज्ञान ही नहीं लिया। आपके पास तथ्य ही नहीं है। आप टेस्टिंग ही नहीं करते हैं, वही शुतुरमुर्ग वाली बात।

दो अंतिम बातें, एक तो महेश वर्मा समिति के नाम से समिति बनाई गई। ये बनी बड़ी रोचक तारीख को, चौथे लॉकडाउन के बाद, 2 जून को। समिति ने ढूंढा कि हमें जुलाई के मध्य के आस-पास कोविड़ पैशेंट के बीमार व्यक्तियों के लिए 42,000 पलंग चाहिए। अब उसके साथ-साथ ये कहा कि इसमें से कम से कम एक पांचवा हिस्सा, यानि 20 प्रतिशत वेंटिलेटर के साथ समर्थित पलंग होने चाहिएँ। अब ये बड़ा न्यूनतम मानता हूं कि अगर 20 प्रतिशत भी वेंटिलेटर नहीं होंगे, तो मैं नहीं मानता कि आप इसका सामना भी कर सकते हैं। हमारे यहाँ दिल्ली में 8,600 लगभग बैड हैं और हमें बीच जुलाई में 1,700 वेंटिलेटर चाहिए। अभी के हिसाब से इस 42,000 के आंकड़े के हिसाब से हमें कम से कम 10,000 वेंटिलेटर चाहिएं, यानि 1,700 वेंटिलेटर के आंकड़ों में लगभग 8,500 की वृद्धि वेंटिलेटर की। ये सरकारी रिपोर्ट की बात कर रहा हूं, आज कहा जाता है कि 1700 वेंटिलेटर जिसकी मांग पुरानी है, वो तो दूर की बात है, 472 वेटिंलेटर जो की कोविड के लिए डेडिकेटेड हैं, वो अवेलेबल हैं। तीन फिगर नोट करें- 472 कोविड के लिए वास्तविकता, जमीनी सच। 1,700 पुराने आंकड़ों के अनुसार अगर 8,600 पलंग हैं तो 1,700 चाहिएं आपको उस रेशो में और मिड जुलाई में आप खुद कह रहे हैं कि 42,000 के अनुसार आपको 10,000 चाहिएँ। अब मैं ये कौन से गणित को टोटल करुं? मुझे समझ नहीं आ रहा है, ये कौन सी जादुई छड़ी के आधार पर ये कहाँ से पैदा होंगे? इसकी क्या सोच है, तरीका है? इसलिए एनएचआरसी को कहा गया है कि तुरंत अपना रोड़ मैप बताईए और इसको स्थापित करिए।

अंतिम मुद्दा, ये भी एक रोचक होता, उल्टी गणित का उदाहरण, अगर ये दुर्भाग्यपूर्ण नहीं होता, ये उल्टी सोच, उल्टी गणित। जब अप्रैल के अंत में 29 अप्रैल को हमारे पास 3,500 कोविड़ पॉजिटिव पैशेंट थे, तब हमारे पास 102 कंटेनमेंट जोन थे। आज ये आंकड़ा है 30,000 से ज्यादा और कहते हैं कि 12 दिन या कभी कहते हैं कि 11 या 14 दिन में डबल हो जाएगा। जब ये 30,000 पहुंचा है तो हमारा कंटेनमेंट जोन का आंकड़ा 183 है। 102 when 3,439 patient, 183 when 30,000 patient, positive case, अब ये कैसे किया सरकार ने – जल्दबाजी में, बिना सोचे-समझे, सस्ती कोई राजनीति के आधार पर, उन्होंने सिर्फ कंटेनमेंट जोन की परिभाषा बदल दी। कंटेनमेंट जोन के रंग और मैप बदल दिए। वो यही पूरा जो उदाहरण का सिलसिला है, वही शुतुरमुर्ग वाली बात है कि आप किसी समस्या को दिमाग से हटाओगे, वास्तविक जमीन पर प्रमाणित ही नहीं होगी, वो एग्जिस्सट ही नहीं करेगी। ये सब मुद्दे हमने सकारात्मक रुप से, आंकड़ों के साथ जो कि ऑर्डर में रिकोर्डेड हैं मानवाधिकार आयोग के, रखा है, एक बड़ा स्पष्ट ऑर्डर पास हुआ है। हम आशा भी करते हैं और विश्वास भी करते हैं। लेकिन अगर सच पूछें कि मैं कोई अपेक्षा नहीं करता हूं कि इसमें ये सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी, यद्यपि हमारा उनसे विनम्र निवेदन है, प्रार्थना है कि हमें राजनीतिक पार्टी के हिसाब से नहीं एक सकारात्मक सुझाव देने वाली संस्था के हिसाब से कुछ उसमें अमल करिए, क्रेडिट लेना है उसमें, क्रेडिट लीजिए, लेकिन उसमें कुछ करिए।
Dr Abhishek Manu Singhvi said- “Common man suffers highest degree of health atrocities for the political blame game, bickering and misgovernance – nongovernance of the duo AAP-BJP”
“मोदी सरकार का नया ऐलान,
स्वास्थ्य नही चुनाव है उनकी पहचान।“
“The toll rise in COVID-19 deaths due to untimely medical care despite confirming of available beds by GNCTD has shown the callous attitude of the functioning government.”
It is a supreme irony that India’s premiere city, its capital Delhi, has such dismal and abysmal health facilities and infrastructure for the Covid scourge. It is tragic that the blame game, the internal bickering, the ego clashes, the misgovernance and non governance by the AAP BJP ruling duo has brought Delhi to such a sad and sorry pass. This duo fiddles—through cross allegations, passing the buck and scoring debating points over each other—-while the people and city of Delhi burn. They play 24×7 politics with the lives and well being of Delhi’s common man and compound the felony by hiding facts, figures and reality through multiple veils of obfuscation and non transparency.
What follows is not merely the Congress party’s attempt to pierce through this jugglery  and distortion of truth but a cry for accountability by Delhi’s am aadmi—- the real one, not the one symbolically adopted as nomenclature for crass political gain.
It is heartening that the NHRC, the apex statutory body tasked with protection and promotion of human rights in their widest and most comprehensive facets, has acted promptly, strongly and categorically on the complaint of former DPCC President and former Union Minister, Mr Ajay Maken. While issuing notice to the Chief Secretary, GNCTD and Secretary, Health, Government of India vide order dated 10/6/20, NHRC  sought a detailed report, in a time bound manner on the issues raised noting that “this is a serious issue of violation of human rights. The Commission, therefore takes cognizance of the complaint and directs issuance of notices” while further recording “a large number of people have died and the National capital is one of the worst affected cities so far…..The complainant has not come up with mere allegations, rather he has made apparent sincere efforts to provide data in support of his representation which if true, raise serious issue of inappropriate approach of the government agencies towards the plight of the general public……”
Instead of setting an example, nationally and internationally, in the capital of the world’s largest democracy, the BJP AAp ruling dyarchy has attempted to project an exemplar of how not to manage a crisis. Despite having the largest number of hospitals and the most advanced healthcare facilities in India, these two mismanaging musketeers have cost Delhi dear, both in precious lives and the exponential and unceasing rise of the virus. Thousands of people are running from pillar to post in search of beds and fighting tooth and nail to even get a COVID test. Dead bodies are piled up with unprecedented lengthy waiting lists even to give peace to the dead at cremation sites. Given below are merely some of the more focused listings of complete abdication by those entrusted with Delhi’s  future although diverse news and social media platforms are flooded with many  more tragic and devastating stories.
5.The intervention of the NHRC was based on the following issues, also copiously elaborated in the Mr Maken’s complaint:
Hospital Beds:
As per the official figures of the Government, Delhi has a robust hospital infrastructure of 57,194 beds combined in Central Government Hospitals, Delhi Government Hospitals and Private Hospitals. However, as per the data available on the Delhi Government Corona App as on 09th June 2020, out of the total capacity, only 12% beds in Delhi Government Hospitals, 8% beds in Central Government Hospitals and 7% beds in Private Hospital were occupied and being used to treat COVID patients.
Hence, seemingly comic were it not tragic, while on one hand a large number of Corona affected people are struggling to find a bed in hospitals, the GNCTD, despite confirming availability of beds, is not providing the same to those in need! This non-availability of beds has resulted into various deaths across the capital as people could not get timely medical care.
Delhi Government has 38 Health Institutions (Hospitals) in Delhi. Out of these, 33 Hospitals are not accepting COVID patients.
Our Demand: That the NHRC shall direct the Government that those who are suffering from Coronavirus and in need of beds, must be given admission without any further hardship. Further, at least 70% of Bed Capacity should be prepared and kept reserved for COVID patients. Also the GNCTD shall designate at least 70% of its hospitals as COVID Hospitals. Indeed, the LG and central government should also move in the same direction, though the percentages may be slightly changed, qua institutions and facilities in their jurisdiction and control.
Restriction on Testing:
As per the Health Bulletin dated 08h June, 2020 issued by the GNCTD, the total number of daily tests conducted in Delhi was 3700. This, is less than half of the tests compared to the official data issued for  29th May when 7649 tests were supposedly conducted in Delhi. It is astonishing that instead of progression, the powers that be are practising regression! Restricting COVID testing can lead to serious problems in Delhi as the positivity test ratio in Delhi as on 08th Jun, 2020 was  27 positive cases per hundred tests. Further, even the recovery rate of Delhi is one of the lowest in India. However, despite such high ratios, the AAP Government on 4th June, 2020, gave notice for ‘over-testing’ to the 8 labs and thereafter made them dysfunctional. These 8 labs were testing about 4000 patients per day. Where compliments and rewards may be in order, threats and punishment are being meted out amidst this perverse and warped logic of the ruling dispensation!
Our Demand: That the NHRC direct GNCTD to carry out testing at a war footing level.
Delay in Cremations:
Across Delhi, there has been massive delay in conducting the last rites of those deceased during the pandemic period. Cremations are taking upto 5-6 days after death and relatives of the deceased have been found struggling to find slots. Even the Delhi High Court has taken cognizance of this issue.
Our Demand: We requested that the NHRC to direct the GNCTD and the MCD to augment CNG crematorium facilities across the National Capital.

Violation of ICMR and WHO norms by not testing the Dead:
The AAP Government has taken a unique in-principle decision to not test the symptomatic dead. This practice can be extremely dangerous and may further strengthen the outspread of the deadly Coronavirus as ignoring symptomatic dead also means ignoring and wishing away those who came in contact with such persons. This completely defeats the tracking of the virus in Delhi and is thereby causing a surge in Delhi. Ostriches in the sand are never successful except very transiently.
Our Demand: Appropriate directions be issued to conduct testing of the symptomatic dead.
Recommendations of Dr. Mahesh Verma Committee:
COVID was declared pandemic on 13th March, but the AAP Government formed a committee to give suggestions on Health infrastructure only on 2nd June. This Committee submitted its report 06th June, 2020. The Committee has estimated a requirement of 42,000 beds by mid-July. It also says that 20% of the beds should be ventilator equipped. With 8637 beds available in Delhi, we require 1700 ventilators, and by mid-July, we would require 10000 ventilators! By contrast, the combined number of ventilators in all Delhi Government, Central Government and Private Hospitals in Delhi is only 472 ventilators supposedly dedicated for COVID patients. It appears that the government relies on Alice in Wonderland arithmetic to add up numbers.
Our Demand: We have requested the NHRC to give appropriate directions to augment beds, ventilator capacity and other equipment as per the recommendations of the Committee, within a period of 10 days.
Containment Zones:
While on 29th April, when there were just 3439 COVID positive patients, Delhi had 102 containment zones. Today Delhi has around 30,000 positive cases, but the containment zones are merely 183. This is because the AAP Government has tweaked and relaxed the definition of Containment Zones. This is another example of progress backwards and in reverse!
Our Demand: We have requested the NHRC to intervene and direct the AAP Government to ensure that areas affected with outspread of COVID-19 shall remain contained with realistic, scientific and efficacious definitions and demarcation of containment zones.
We hope and trust (but sadly do not expect) that the AAP and BJP, rather than indulging in optics, advertisements and diversionary tactics, will take our constructive suggestions into account for the betterment of the lives of the people of Delhi.

श्री अनिल चौधरी ने कहा कि आदरणीय अभिषेक सिंघवी जी ने जिस तरह से बातें रखी हैं, एनएचआरसी को जो नोटिस दिया है, उसके बारे में विस्तार से बताया है, मैं सिर्फ ये कहना चाहता हूं कि दिल्ली की परिस्थितियां आपसे छुपी नहीं हैं। एक तरफ जहाँ मरीज बैड को लेकर चिंतित हैं, अस्पताल के गेट पर घंटों इंतजार करते हैं, दर-बदर भटकते हैं, ये जानकारियां ऐसा नहीं है कि सरकार के पास नहीं है। धीरे-धीरे समय बितता गया और स्थितियां और बिगड़ती गई। आज वक्त ऐसा है कि जब सरकार के हाथ से ये स्थिति पूरी तरह से छूट गई है। इसी गंभीरता को लेकर निरंतर हम लोग, माननीय मुख्यमंत्री और दिल्ली के महामहिम साहब, लेफ्टिनेंट गवर्नर साहब से हम लगातार रिक्वेस्ट कर रहे थे, सब परेशानी बताने की की कोशिश कर रहे थे। दिल्ली को लेकर जैसा कि सिंघवी जी ने कहा कि हम केवल एक राजनीतिक दल के तौर पर नहीं, मानवता के तौर पर भी, एक अच्छे सुझाव के तौर पर, एक अच्छे संस्था के तौर पर उनको सुझाव देना चाहते थे। बहरहाल समय बित गया, दो महीने से ज्यादा हो गए, उसको लेकर वो चिंतित दिखाई दिए, सरकार गंभीर दिखाई नहीं दी और इस लॉकडाउन को लेकर जिस तरह से बयानबाजी दिल्ली में चल रही है, मुख्यमंत्री जी प्रतिदिन आते हैं, आकंड़े पेश करते हैं और चले जाते हैं।
सवाल ये है कि दिल्ली का जो रहनुमा, जिनको चुना था, आदरणीय केजरीवाल साहब केवल अपने वक्तव्यों में अब तक दिल्ली की चिंता व्यक्त करते हैं। लेकिन जब उन चिंताओं का समाधान करने की बात की जाए, तो उसका वो जवाब नहीं देते। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि 2 दिन पूर्व जब महामहिम साहब ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, तो जो उनका रवैया आज भी दिखता है ना तो स्वयं से, ना उनके कैबिनेट से कोई मंत्री उपस्थिति होता है, तमाम दल के लोग इकट्ठा होते हैं। कांग्रेस अपना दायित्व निभाते हुए वहाँ पर भी कुछ अच्छे पॉजिटिव वे में सजेशन देकर आते हैं। महामहिम साहब ने उनमें से एक सजेशन माना भी है, जिसमें अस्पताल के बाहर डिस्प्ले लगाने की बात कही गई है।
जबसे ये लॉकडाउन शुरु हुआ केवल दिल्ली सरकार नहीं, भाजपा को लेकर भी जिस तरह से अभिषेक सिंघवी जी ने अपनी बात रखी, उसमें अपनी बात जोड़ना चाहता हूं कि दोनों सरकारों का रवैया, चाहे श्रमिकों का यहाँ से पलायन करने को लेकर हो या उनकी रोजी-रोटी को लेकर हो या दिल्ली में भारत सरकार या दिल्ली सरकार के अस्पतालों में जो सुविधाएँ हैं, उसको लेकर हों, हर मोर्च को लेकर दोनों सरकारें विफल रही हैं।
केजरीवाल जी को मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि टेस्टिंग के विषय पर हमने सजेशन दिए और बहुत विस्तार से कांग्रेस पार्टी ने अपनी बात रखी है, अजय माकन जी ने उस शिकायत में पूरे आंकड़े प्रस्तुत किए हैं और उसको हमने सरकार को लगातार अवगत कराया है। तकरीबन 32,000 से ज्यादा मरीज दिल्ली में हो चुके हैं। लेकिन अभी भी तैयारियों को लेकर जब हम उनसे सवाल करते हैं तो ये नहीं बताते। वो बताते हैं कि जुलाई के अंत तक तकरीबन साढ़े पांच लाख मरीज हो जाएंगे और इतने बैड की आवश्यकता पड़ेगी। लेकिन प्रश्न ये उठता है कि तैयारी करेगा कौन, ये व्यवस्था बनाएगा कौन? जिसको लेकर हम निरंतर इस सरकार से मांग करते रहे, लेकिन इस सरकार ने एक मांग ना सुनी और आज यकायक केजरीवाल जी कहते हैं कि हमें सबको साथ लेकर चलना पड़ेगा, हम सबकी बात सुनेंगे, मैं स्वयं निकलूंगा। मैं ये कहना चाहता हूं कि केजरीवाल जी को बहुत बहुमत के साथ, विश्वास के साथ लोगों ने अपना अभिभावक चुना था, अपना सेवक कहो, अपना बेटा कहो, उसको चुना था। अरविंद जी के पास एक बडी अपोर्चुनिटी थी, क्योंकि 2013 के बाद जिस तरह से सरकार चल रही थी, प्रलोभनों की सरकार, हर व्यक्ति को खुश करने के लिए जिस तरह से हर व्यक्ति को छूट देने की बातें सरकारें करती रही, चाहे वो दिखावे के रुप में हों या वास्तविक स्थिति से बिल्कुल परे हो; लेकिन एक वक्त ऐसा था, इस महामारी के समय में, इस आपदा में मुख्यमंत्री, जो लोगों के दिलों में अपने आपको एक हीरो के रोल में स्थापित कर चुके थे, उनके पास अपने आपको एक काम करने वाला सीएम प्रूव करने का अवसर था। लेकिन इस आपदा में जिस तरह से सरकार का और केजरीवाल जी का रवैया रहा है, दो महीने घर में बैठे रहे, तो मैं कहता हूं कि आज दिल्ली की जनता ने जिस हीरो को चुना था, मैं समझता हूं कि केजरीवाल साहब आप हर कसौटी पर जीरो साबित हुए हैं और ये मैं अभिषेक सिंघवी जी के आंकड़ों के साथ, इस बात को दावे के साथ कह रहा हूं।
आप लोग पत्रकार साथी भी निरंतर हमारे साथ तमाम अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं और आप देख सकते हैं कि कई अस्पताल के मैं उदाहरण देना चाह रहा हूं- जिस तरह से एलएनजेपी के बाहर एक बेटी ने अपने पिता को खो दिया, शोफिया एक ऐसी लड़की जो एनएफसी में रहती है, जिसने अपने ससुर को खो दिया; जिसने टेस्ट कराया अपोलो में, एक मोती राम गोयल साहब जो बैड के लिए हाईकोर्ट जाते हैं; एक अग्रवाल फैमिली अस्पताल के बाहर अपने सदस्य को खो देती है। ये उदाहरण हैं जो हमने महामहिम साहब के सामने भी रखे थे, जिस व्यक्ति की आर्थिक स्थिति मजबूत थी, वो आदमी सरकारी अस्पताल में क्यों जाएगा? प्रश्न ये उठता है और मैं ये पूछना चाहता हूं, यदि उनको प्राईवेट अस्पताल में बैड मिले होते, तो शायद वो इलाज करवा लेते। इसी उम्मीद में वो दर-बदर भटकते रहे और फाईनली इन लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को खो दिया, जो कोविड -19 की वजह से संक्रमित थे।
तो मैं आपसे ये आग्रह करना चाहता हूं कि केजरीवाल साहब हर मोर्चे पर नाकाम साबित हुए हैं, चाहे श्रमिकों को घर भेजने की बात हो, चाहे दिल्ली में लॉकडाउन के दौरान फंसे हुए लोगों को खाना मुहैया कराने की बात है या इस दौरान जब आंकड़े बड़ी तेजी से दिल्ली में बढ़ रहे हैं, उनका इलाज प्रदान करने की बात हो। केवल पेपर में बातें चल रही हैं, जैसा सिंघवी जी ने कहा, इस बात को मैं दोहराना चाहता हूं, अपने भाषणों में इन बात को दोहराते हैं। लेकिन हर प्रेस वार्ता में, उनके भाषण में विरोधाभास है। अपने ही आंकड़ों में उनका फेर बदल है, तो आखिर केजरीवाल साहब क्यों जनता को गुमराह कर रहे हैं, ये सवाल उठता है?
दूसरा दिल्ली के एमपी के साथ-साथ माननीय हर्षवर्धन जी हिंदुस्तान के स्वास्थ्य मंत्री भी हैं और एलएनजेपी अस्पताल, जो शायद उनके ही संसदीय क्षेत्र में आता है, जो WHO के अंदर भारत की तरफ से प्रतिनिधित्व करते है। मैं समझता हूं अब तक भारत सरकार की जो एक तरह से व्यवस्थाएं दिल्ली में भी होनी चाहिएं थी, वो भी शून्य नजर आती हैं और कहीं ना कहीं दोनों सरकारें अपने बचाव को लेकर एक दूसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप में लगी हुई हैं।
मैं इतना ही आग्रह करता हूं कि इस आपदा में, इस दिल्ली को बचाने को लेकर कांग्रेस निरंतर अपने सकारात्मक सुझाव दोनों ही पार्टी के लोगों को करती रही है। उन सुझावों को मानने की बजाए लगातार इनके मंत्री, इनके नेतागण इस तरह के आपसी मतभेद शायद अपनी कमियों को छुपाने के लिए दिखाते रहे।
On a question that Delhi Government have delayed in putting in place the system and the apparatus which was required for Covid management, the Centre had sent in circular as early as March 28 to set up dedicated Covid hospitals in Delhi, but, the Delhi Government took almost a month, on April 30 they notified setting up of two Government and 3 private dedicated Covid hospitals, not only this when the situation started going out of hand, they have roped in the private hospitals forcing them to reserve 20 percent beds in private hospitals whereas the SOP of the Centre had clearly said about not mixing up of the Covid and non-Covid patients because at least 40 percent cases were because of the inter mixing of patients, so do you think that the Delhi Government defiance of the Center’s norms and SOPs is because of lack of coordination or you think this is just ignorance at play, the cost of which the Delhi people are paying, Dr. Singhvi said-
Please be assured that there is a complete lack of coordination, that is the mildest word of the mild moderation which you can choose. There is not mere coordination lack, there is absolute egotism, bickering, allegation, counter allegation and the idea is to score a point without any real change on the ground.
You talked about Delhi Hospitals and Covid beds, see the hospitals need not be Covid, portion of the hospital; the section has to be Covid. I have just given you figure, which shows that you do drama every day before channels because you want to show to the public of Delhi, how much you are punishing people, but, by merely shouting and threatening people, you don’t get results. The difference between your figures of Government hospitals and private figures are marginal difference.
You do not know how to carry anybody with you. Central Government cannot carry State Government, State Government cannot carry Central Government and both are unable to carry institutions with them. For this you have to have a constructive spirit that I will not score a debating point, I will sit down and solve. Most of the figures, you are giving, are correct, I have given you 4 sets of figures, which perhaps had many more. The point is that you are into 24X7 politics and that is the crux of the politics. You think that by painting you black, I will win more votes. That is why, you don’t want any change on the ground, otherwise what is the use of all these threats to hospitals, nothing changing anything on the ground. It seems like much has been done, we will seal this, we will break this, we will take away the license of this, but, what is the net result on the ground? So, the whole theme of this press conference is that these are people punch-drunk with 24X7 political motives and not with public interest approaches.
भारत और चीन के तनाव से जुड़े एक प्रश्न पर कि सेना के कुछ रिटायर्ड अधिकारियों ने एक पत्र लिखा है और ये कहा है कि श्री राहुल गांधी जी को चीन और भारत की सीमा पर तनाव को लेकर ट्वीट नहीं करने चाहिए, डॉ. सिंघवी ने कहा कि आपने बड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा बड़ा स्पष्ट आपको जवाब देता हूँ।
1. अब मेरे मित्र ने अभी कहा अगर आप ऐसी चिट्ठी लिख रहे हैं तो बता दें जिससे पारदर्शिता है। इसमें किससे लिखवाई गई है, क्यों लिखी गई, किसकी प्रॉक्सी के लिए लिखी गई? तो आपको और कुछ कहने की जरुरत नहीं है। मैं अपना संबंध लिखवाता हूँ, मैं जब बोलता हूँ तो मैं एआईसीसी स्पोक्सपर्सन बताकर बोलता हूँ। आपको जितना डिस्काउंट करना है कर लीजिए। कम से कम अपना तो आप सिर्फ लैफ्टिनेंट जनरल और मेजर जनरल न लिखिए साथ में, ब्रैकिट में लिख दीजिए कि आप कौन सी संस्था से जुड़े हैं और वो कभी नहीं मिलेगा आपको, क्योंकि ये लिखवाई हुई चीजें होती हैं। लेकिन दूसरी बात ज्यादा महत्वपूर्ण है।
2. आपने ये लिखा लेकिन आपने ये कभी पूछा जो हम बड़ा स्पष्ट श्री राहुल गांधी जी ने ही पूछा नहीं, हम सब कांग्रेस पार्टी और पूरा देश पूछ रहा है कि जिस प्रकार से हम आपका समर्थन करते हैं, गणतंत्र में कि जो आपकी मर्जी है, आप बोलिए। आप क्या उस बात को वोल्टेयर की कहावत है कि I will defend to death, your right to speak against me, just as I would like you to defend to death… क्या आप उस पर विश्वास करते हैं स्वतंत्र, स्पष्ट, निडर, बोलने में? नहीं, आपकी चिट्ठी में इस बात की बू आ रही है कि आप गणतंत्र, लोकतंत्र में आवाज दबाना चाह रहे हैं। क्यों एक आवाज I, Me, Myself वाली होनी चाहिए।
3. हमारी परिभाषा गणतंत्र की वैसी नहीं है। मैं ये पूछना चाहता हूँ आपको, हमने, मैंने खुद ने चार बार आपके सामने ये कहा है कि हम राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे में सौ प्रतिशत अग्रणी पंक्ति में खड़े होकर सरकार का समर्थन करते हैं, सब आपकी रिकॉर्डिंग में है। साथ-साथ हम ये भी पूछते हैं कि जब तक आप हमको कॉन्फीडेंस में नहीं लोगे। हमारे में अविश्वास नही करोगे; हमको एक सिलेक्ट ग्रुप को, नोमिनेटेड ग्रुप को किसी भी नियंत्रण के अंदर आप बुलाओगे नहीं, बताओगे नहीं; इतना भी नहीं बता पाए आप किसी रूप से परोक्ष रुप से, सीधे रुप से कि कितने ही किलोमीटर पर कब्जा किया है।
4. क्या ये बहुत ही महत्वपूर्ण और बड़े विशाल व्यक्ति जो 70 का नंबर दिया आपने, इन्होंने रक्षामंत्री के वक्तव्य और पीआईबी के वक्तव्य में कोई विरोधाभास नहीं देखा? रक्षामंत्री कहते हैं कि अच्छी खासी संख्या में, मैंने कोट किया था आपको और वो प्रीवियस वाक्य में उस इलाके की बात करते हैं, तो क्या रक्षामंत्री अच्छी खासी संख्या में चीन अपने टेरेटरी में आने की बात कर रहे थे क्या? जब चीन का कोई व्यक्ति शंघाई से बीजिंग जाता है तो रक्षामंत्री बोलते हैं क्या? उन्होंने साफ कहा है कि अच्छी खासी संख्या, यानि वो इलाका जिस पर अधिकार क्षेत्र भारत का है और अगले दिन पीआईबी चाहता है और शायद ये 70 लोग आँख मूंदकर मान लेते पीआईबी की बात कि रक्षामंत्री उस इलाके की बात कर रहे थे, जो कि चीन का खुद का इलाका है।
5. क्या प्रश्न पूछना लोकतंत्र में गलत है? हम चीन नहीं है, हमें गर्व है कि हम चीन भी नहीं है, पाकिस्तान भी नहीं है, बांग्लादेश भी नहीं है, हमारे कई और एशिया के देश नहीं है। हमारे यहाँ बोलने की स्वतंत्रता है। हमारे यहाँ 19 (अ) है संविधान का प्रावधान जो और देशों में है, लेकिन वहाँ पालन नहीं होता। हम अगर ये पूछते हैं कि हमको ये बताइए, हमको कॉन्फिडेंस में लीजिए हम आपके साथ खड़े हैं, तो ऐसे 70 लोग जो पढ़े-लिखे माने जाते हैं, वो उसका विरोध करेंगे। ये आपने पूछ कैसे लिया, ये जो आप चिट्ठी बोल रहे हैं ये मेरिट्स की बात नहीं है, ये कह रहे हैं कि आपकी हिम्मत कैसे हुई पूछने की? अरे हिम्मत दिखाईए कि आँख उठाने की नेपाल और चीन की कैसे हुई। हमसे नहीं पूछिए कि हिम्मत कैसे हुई पूछने की, क्योंकि हमें गणतंत्र और लोकतंत्र में विश्वास है।
एक अन्य प्रश्न पर कि राजनाथ सिंह के बाद लद्दाख के एक बीजेपी लीडर है जो लेह डवलपमेंट काउंसिल के काउंसलर भी हैं, उन्होंने एक अखबार से बातचीत मे कहा है कि चीन के सैनिक हमारी सीमा में घुसे हुए हैं, रक्षामंत्री के बाद ये दूसरा बयान है, इस पर आपका क्या कहना है, डॉ. सिंघवी ने कहा कि पहला तो मैं ये कहूँगा, काश, इनको भी राष्ट्रविरोधी बोलते हमारी तरह हमारे 70 मित्र। आज उनका ध्यान आकर्षित नहीं किया आपने। आज उनको बता दीजिए तो कल एक और दस्तावेज आएगा, जिसमें ये बीजेपी के काउंसिल को भी राष्ट्रविरोधी कहेंगे।
नंबर दो, काश वो उनको भी कहते कि हिम्मत कैसे हुई गणतंत्र में ये बोलने की आपको। आप तो बीजेपी में हैं, और बीजेपी का मतलब है कि अपने आप जीभ और मुंह बंद करके चलते हो, जहाँ पर नंबर एक या नंबर दो का विषय हैं, वहाँ पर आप कुछ नहीं बोल सकते।
नंबर तीन, ये जमीन की सच्चाई कोई छुपा सकता है क्या? हाँ, हम भी इस मुद्दे पर शुतुरमुर्ग बन रहे हैं कि चीन और हमारे बीच में जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं है और क्या हम ये मानते हैं कि फिंगर पाइंट 4 से फिंगर पॉइंट 8 का जो इलाका है, उसमें एक इंच भी चीन नहीं घुसा है? बल्कि आप, सरकार चुप्पी साधकर दुष्प्रचार करके, मिस इंफोर्मेशन फैलाकर इस प्रकार के स्पेकुलेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। अगर आप इन 70 लोगों की बात नहीं सुनें और आप कुछ चुने हुए वरिष्ठ लोगों को कॉन्फीडेंस में लें, तो देश का हित होगा और ऐसा स्पेकुलेशन कम होगा और ये बात अगर कह रहा है वो काउंसलर तो उसके राजनीतिक रंग का मतलब नहीं है, वो जो संदेश दे रहा है उसको देखिए। वो संदेश देने वाले के नाम को नहीं देखिए।
On another question about the fuel prices that has been increased in Delhi, while the entire state is already grappling with Coronavirus, Dr. Singhvi said- Let me tell you that we have and I have the privilege of addressing you many times on this issue. Not only is this, fuel price increase has become a permanence and remember, it is a unaudited, unknown tax, which this government imposes upon you, every one week, every two weeks, every three weeks. It is nothing, but, a tax. We don’t call it a tax, but, there is this mini fuel budget happening every two or three weeks, but, what is worse is, it is happening at the time of Corona, it is cutting across sectors and it affects those, who are economically weak, the most.
Thirdly, why your question is important, because this is in the face of the highest ever surpluses, ever imaginable in the history of India, on account of the twin remarkable achievements of falling prices internationally and consumption levels. I don’t understand why this Government does not pass on a fraction of these large surpluses. If not to the people by way of reduced prices, for direct fiscal stimulus, so that is the fourth point. You have huge surpluses of which you will not give a penny in a fiscal stimulus, which is less than 1-1.1%. Now what can be done, I mean this has been so brazenly, cheaply and blatantly done again and again that we have no words to express our condemnation.

Watch this on: https://youtu.be/E87lEjSiUkQ

Sd/-
(Vineet Punia)
Secretary
Communication Deptt,
AICC

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