JEE- NEET Exams- Highlights of Press Briefing by Dr. Abhishek M. Singhvi & others

ALL INDIA CONGRESS COMMITTEE
24, AKBAR ROAD, NEW DELHI
COMMUNICATION DEPARTMENT

Highlights of Press Briefing 28 Aug, 2020

Dr. Abhishek M. Singhvi, MP & Spokesperson, AICC; Shri Hemant Soren, Chief Minister, Jharkhand; Shri Derek O’Brien, MP & Parliamentary Party Leader (Rajya Sabha), All India Trinamool Congress; & Shri Uday Samant, Higher and Technical Education Minister, Maharashtra Govt, addressed the media persons via video conferencing today.
डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि ये जो महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और पुडुचेरी, 7 प्रदेशों का नाम लिया, ये आपको जानना चाहिए कि ये लगभग 30 प्रतिशत जनसंख्या भारत की रखते हैं और पूरे भारत का लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्रफल भी है। ये 7 अकेले नहीं, सिर्फ 7 तो अल्प समय में डेढ़-दो घंटे की मीटिंग के लिए आए थे, देश के और कोने-कोने से कई ऐसे लोग हैं, वर्ग हैं, प्रदेश हैं, राजनीतिक रंग के भिन्न हैं, कई बार राजनीतिक रंग सहमति नहीं रखते, लेकिन कई मुद्दों पर साथ आकर और विशेष रुप से, जैसा संघीय ढांचे के बारे में वित्तीय पक्ष कहा और दूसरा ये नीट और जेईई का मुद्दा। तो 30 प्रतिशत क्षेत्रफल, 30 प्रतिशत जनसंख्या।
दूसरा, ये वो सब लोग हैं जो जुड़े हुए हैं जमीन से, ये युवाओं और विद्यार्थियों की आकांक्षाओं से, मंशाओं से, चाह से एक निकट संबंध रखते हैं। ये लोग बोल रहे हैं और आवाज दे रहे हैं, उन आकांक्षाओं को, अपने इस अभियान द्वारा। हमने बहुत कम समय में ये पुर्नविचार की याचिका डाली है, इसको चार भागों में, जैसा मैं बोल रहा हूं, ये आपको भिजवाई जा रही है, आपके वॉट्सऐप और ईमेल पर, ये है, वो आज दर्ज हो गई थी सुबह, पिछले एक दिन में बनी है करीब-करीब। 4 भागों में, मैंने बताया है, बांटा है –
एक तो सुरक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे। दूसरा – किस प्रकार से लोजिस्टिक इस पूरे मामले की करीब-करीब असंभव है, जिस प्रकार से आज हो रहा है। तीसरा – वो संतुलित तौर-तरीके जिससे कि आप दोनों उद्देश्य उपलब्ध कर सकें, स्वास्थ्य का भी और शिक्षा का भी और चौथा, कि वो कौन से अनिवार्य नीति, नियम होंगे, जिनके आधार पर आप ये कर पाएंगे, अगर आप नवंबर में परीक्षा करते हैं इत्यादि।
तो मैं संक्षेप में कहता हूं, बताऊं आपको कि आंकड़ा है और इस साल बढ़ सकता है, 25 लाख लोगों का और मैं आपको डिटेल में ले जा रहा हूं, नीट के लिए 16 लाख और जेईई के लिए साढ़े 9 लाख। तो लगभग 25 लाख विद्यार्थी हैं न्यूनतम मैं समझता हूं इसमें। ये दुर्भाग्य की बात है कि अभी हमारा आंकड़ा कोविड़ का साथ-साथ चल रहा है 33 लाख का और 60 हजार मृत्युओं का। अब इसमें हमने जो पहले वर्ग में सुरक्षा और स्वास्थ्य की बात की है, उसमें हमने कई चीजें दी है और बताया है कि जेईई के लिए मात्र 660 सेंटर हैं, लगभग साढ़े 9 लाख लोगों के लिए 1400 या 1500 लोग प्रति सेंटर का बंटवारा किया गया है। नीट के लिए थोड़ा बेहतर है, 450 लोग लगभग प्रति सेंटर। अब एक तरफ आप बात करते हैं सामाजिक दूरी की और दूसरी तरफ इस प्रकार की डेंसिटी की। 1500 और 450, इसमें क्या विरोधाभास नहीं है? किसी ने अपना दिमाग लगाया या नहीं इस चीज के ऊपर और इसका कारण ये है दोस्तों कि अप्रैल में ये था, अप्रैल से ये स्थगित हुआ जून में, जून से अब सितंबर से। इस वक्त सिर्फ जल्दबाजी में तारीखें दी गई और ये समय करीब-करीब साढ़े 5 महीने का समय है, किसी रुप से इसका उपयोग नहीं किया गया, एक विकल्प निकालने के लिए, एक हल निकालने के लिए और इसलिए बेबसी में जिसको आप नई जर्क रिएक्शन कह सकते हैं, अचानक एक फरमान आ गया कि अगस्त में 1 सितंबर से एक परीक्षा शुरु होगी और 13 सितंबर से दूसरी।
अनलॉकडाउन में एक और विरोधाभास देखें आप, अनलॉकडाउन में भी अगर एक ऐसा वर्ग है, जिसको बंद रखा गया है, वो पूरे शिक्षा के वर्ग को। स्कूल से, किंडर्न गार्डन से लेकर, स्कूल और स्कूल में सेकेंडरी से लेकर हायर सेकेंडरी और उससे लेकर विश्वविद्यालय, पूरा बंद है, आज भी बंद है। 6 महीने से आपने पढ़ना-लिखना नहीं किया है। आपको पढ़ने का मतलब, शिक्षा का मतलब सिर्फ परीक्षा नहीं होता, शिक्षा का मतलब होता है – पढ़ना, सुनना, सीखना और आत्मसात करना। ये प्रक्रियाएं नहीं हुई हैं, लेकिन अचानक क्योंकि आप अप्रैल से जून तक स्थगित करते रहे और जून से अगस्त तक स्थगित करते रहे, आपने एक फरमान दे दिया कि अब परीक्षा तो होने वाली है 1 सितंबर से।
अब आप लोजिस्टिक पर अगर ध्यान दें 2 मिनट के लिए, तो आवागमन का कोई भी तौर-तरीका हो, 25 लाख का आवागमन शहर के अंदर और ज्यादातर शहर से बाहर और उस आवागमन में आप जो खतरा पैदा उनके लिए ही नहीं करते, लेकिन आवा एक तरफ और गमन दूसरी तरफ। आने-जाने में वो अपने परिवार, अपने वृद्ध पैरेंट्स के लिए, अपने सभी साथियों के लिए कितना खतरा पैदा कर सकते हैं, इस पर भी ध्यान नहीं दिया गया। आज जो हमने किया है, कोविड़ के विषय में उसमें पानी फेरने का कोई उद्देश्य नहीं हो सकता किसी का कि उस सबको हाथ धो कर पानी फेर दें उस पर। आप उस पर मल्टिप्लाई इफेक्ट का क्या करेंगे, आप जिसको कहते हैं वेक्टर, वेक्टर के हिसाब से जो फैलती हैं चीजें या जिस पर स्पाईक होता है, क्या करेंगे? ये कोई छोटा आंकड़ा नहीं है।
आपने कहा कि वहाँ पर टेंपरेचर गन लेकर खड़े हो जाएंगे। हम सब जानते हैं कि कोविड़ एक ऐसी बीमारी है जो सिर्फ टेंपरेचर के आधार पर नहीं चलती है, इसकी शुरुआत होने तक से कम से कम 48 घंटे तक तो मालूम भी नहीं पड़ता है कहीं पर और टेंपरेचर के अलावा कई ऐसे सिम्टमस होते हैं, खुद कोविड़ नोन सिम्टोमेटिक होती है। तो टेंपरेचर गन से कहते हैं आप कि हमने सुरक्षा चक्र बना दिया है और आज बहुत सारे लोग सिर्फ ग्रामीण ही नहीं, अधिकतर ग्रामीण से हैं, लेकिन ना शहर, ना ग्रामीण, अर्बन भी हैं, सेमी अर्बन भी हैं, टायर टू टायर थ्री शहरों के भी हैं। आज आप जानते हैं कि हमारे रेलवे बाकि वाहन 33 से 50 प्रतिशत की कपैसिटी से चल रहे हैं। उसमें ये आवागमन के लिए आप बाध्य कर रहे हैं। एक हमें उत्तर मिलता है हमेशा, माननीय सचिव से भी, माननीय शिक्षा मंत्री से, कह रहे हैं कि इतने लाखों ने रजिस्टर कर दिया, इतने लाखों ने ऐप डाउनलोड कर लिया है, तैयार बैठे हैं। ये कोई तर्क हुआ? आपने निर्णय नहीं किया, आपने स्थगित किया, अप्रैल से जून, जून से सितंबर, तो बेचारा बाध्य लाचार विद्यार्थी क्या करेगा? वो चांस तो ले नहीं सकता, वो रिस्क तो ले नहीं सकता, तो डाउनलोड़ तो करेगा ही, तो क्या डाउनलोड़ करना और रजिस्टर करना इस बात का द्योतक है कि वो खुशी से जा रहा है, उसकी चाह है या उसका मन है? तो ये कुतर्क है, तर्क नहीं है।
मैं आपको सेंटर के बारे में एक बहुत जबरदस्त आंकड़ा देना चाहता हूं और ये बहुत महत्व रखता है, झारखंड के आंकड़े मुझे पता नहीं, पड़ोसी प्रदेश है, लेकिन बिहार में 38 डिस्ट्रिक्ट हैं, उसमें नीट के लिए सभी सेंटर जो हैं, इस एग्जाम के लिए, दो डिस्ट्रिक्ट में हैं और जेईई के लिए 7 डिस्ट्रिक्ट हैं, 38 में से। अब आप नीट को लीजिए, अगर पूरे बिहार के लोग इन दो डिस्ट्रिक्ट में आएंगे और आप क्या दे रहे हैं मुगालता, आप क्या बरगला रहे हैं कि हमने नंबर बढ़ा दिया है सेंटर का, वो नंबर बढ़ाया आपने इन दो डिस्ट्रिक्ट के अदंर। आपने वो हल नहीं निकाला जो हमने बार-बार कहा कि न्यूनतम आप कम से कम हर 38 डिस्ट्रिक्ट के एक डिस्ट्रिक्ट में, हर डिस्ट्रिक्ट में कुछ सेंटर होने चाहिएं। तो आप समझ सकते हैं कि डेंसिटी, आवागमन, मूवमेंट, मोबेलिटी का क्या आधार होगा अगर पूरे बिहार प्रदेश की, बड़ा भी है और जनसंख्या भी काफी है, इन 38 की जगह दो डिस्ट्रिक्ट में आना पड़ता है।
अंत में मैं दो-तीन बातें कहकर मैं अपनी बात खत्म करुंगा कि जो स्थगित करने की बात मेरे मित्र ओ ब्रायन जी ने कही कि ये महत्वपूर्ण क्योंकि हम किसी रुप से नहीं चाहते कि ये कैंसल हो, रद्द हो, लेकिन हमने इस पेटिशन में, इसके अंदर एक रोड मैप देने में हम सफल हुए हैं कि किस प्रकार आप दोनों उद्देश्यों को उपलब्ध कर सकते हैं। आप जनवरी में अपने कार्यकाल को शुरु करके पूरे वर्ष को बचा सकते हैं। You can save the academic year even if you postpone it to November etc and October-November and decide to start by January.
उदाहरण दूं मैं आपको कि आपको जो करेक्शन करनें हैं, आपके जो रिजल्ट आने हैं, वो आ सकते हैं नवंबर, दिसंबर के बीच में और अगर आप जनवरी में भी शुरु करेंगे, तो आप सफल हो सकते हैं। तो जब दोनों उद्देश्य उपलब्ध होते हैं तो क्यों एक तरफा आप एक रुट अपने इगो में या अपने अहंकार में उठा रहे हैं। देखिए, लेवल प्लेइंग फील्ड का मुद्दा भी आता है, ये मैं इसलिए कह रहा हूं कि समतल जमीन इसलिए नहीं है कि आप कई विद्यार्थियों को बाहर कर रहे हैं, एक्सक्लूड कर रहे हैं, कई ऐसे विद्यार्थी ऐसे हैं जो सक्षम नहीं है, बीमार हैं, कई भय से नहीं आ सकते कि अगर बीमार नहीं है और बीमार हो गए तो परिवार की जाकर क्या हालत करेंगे वो। कई पहुंचने में असमर्थ हैं, हमने दिए उदाहरण कि 100-100 किलोमीटर की दूर पर डिस्टेंस हैं कई बार। मानसिक स्थिति जो है, इसको हम कई बार दरकिनार कर देते हैं, तुरंत ध्यान नहीं देते।
आज 6 महीने कोविड़ के बाद हमारे विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति क्या है – आज
अप्रैल से जून और जून से अगस्त जो स्थगित किया, उसमें किस प्रतारण, किस पीड़ा, किस प्रेशर के अंदर वो लोग काम कर रहे हैं कोविड़ के दौरान, आप कहते हैं कि आप बाध्य हैं एक सितंबर को एग्जाम देने की।
मैं अंत करुंगा अपनी बात आपको कुछ घंटों की खबर बता कर, मुझे मालूम नहीं कि ये सही है या नहीं, कि क्लेट, CLAT जो कानून के विषय में परीक्षा होती है, उसको स्थगित कर दिया गया है 28 सितंबर के लिए, जो अभी 6 या 7 तारीख को शुरु होने वाली थी। देखिए आंकड़े नीट और जेईई में क्लेट से कहीं ज्यादा है, कहीं-कहीं ज्यादा है। आपने क्लेट को कर दिया और इनको नहीं किया, ये एक और तीसरा अजीबो-गरीब विरोधाभास है, but, ultimately friends this Government is a Government, apart from inefficiencies, a Government of apathy and a Government of contradictions and we are telling you as my friend Mr O’Brien said about seven states. These seven states, which made differ or may belong to different political colours have come together on major public interest issues. Two of them, in particular, federal issues of fiscal federalism and this issue of students, was a remarkable convergence of views two days ago. These states, by the way for those who don’t know, represent not only 30% of India’s population, but also represent of 30% of India’s geographical area approximately, the exact figure that 29.6 and 30.54, but, I am saying approximately 30%.
These are people, leaders, Governments, Chief Ministers, who are connected to the soil, have a grassroots connect. They are people, who are alive to the impulses of the student community, the youth, which is what they are trying to convey, please Mr. Government, Mr. Prime Minister, Mr. Home Minister don’t take them as outcastes or outlaws, who are just doing it for some political reasons. They are voicing the concerns of this very-very important segment of students.
We have in this review petition, which you already have got on your systems, I have divided our submission into four heads and you can understand that it was given in a very short while. By the way, I forgot to mention that though a petition had been dismissed earlier, almost none of these points have been taken, in any case they have not been considered by the Supreme Court and we are confident into the Supreme Court can despite the short time give a new look to it, a new analysis.
The four heads are-
1. Security, Safety and Life’s concerns, the issue of Health, Life and Security.
2. The virtual impossibility of logistics.
3. The need for balance by which we have given a road map by which you can balance both of your objectives, health, and security on the one hand and education on the other hand. So, if you can balance that is the third head.
4. Whenever you have the exam in November etc, it should have these mandatory additional safe guards, which you don’t have.
As my friend has said, I am repeating, this is a petition for postponement, deferral, it is not for cancelation and the fourth part of our review petition, demonstrates how you can start the academic year and complete it successfully without losing a year, even if you postpone it to November and decide to start by January.
Very quickly and briefly, the logistics themselves show what a mockery you are making of Covid safeguards. 25 lakh is the figure of students and possibly it may be exceeded. I don’t want to give you the division 16 lakhs NEET and 9.5 lakh JEE, but, 25 lakhs. Ironically, the Covid numbers are 33 lakhs at last count. Deaths are around 60 thousand. Now, you are having exams, bang in the middle of a peaking system. What kind of social distancing are you talking about? What is the use of the Hon’ble Prime Minster’s sermons about masks and social distancing. I will presently give you the density, which such movements involve. We have also made the point that this Government has actually drawn itself into a corner and it is now trying to get out of it as usual by knee jerk, ego centered reactions. This was scheduled in April, you postponed it to June, you then postponed it to August and September and in the meanwhile you just slept. You did not use any of the time to create an alternative, a solution, a remedial framework, which you could have and now at the end of the day you have no options, so you are just shooting a gun and saying- 1st September, we will start, because you are in a corner.
Education is a holistic exercise. It is not an end itself; it involves teaching, hearing, absorbing, learning. Now, admittedly during lockdown and even during unlockdown 4, which we are approaching, one sector which has had a complete lockdown and closed is education, from Kindergarten to Higher Secondary and from Higher Secondary to Universities, that is universal. You have all the other intrinsic processes of the education, learning, listening, absorbing etc, closed and you must still have exams, as if on some kind of fixed motion, that is again a second major contradiction.
On logistics, we have pointed out in the petition that apart from the numbers I gave you, the process of movement, mobility, you have lot of distances to centers -hundred kilometres, I have given the examples. Take the density, Bihar is a good example out of 38 districts, Bihar is India’s one of most populous states, not a small state. 38 districts all the centers of NEET are concentrated in two districts, 2/38; for JEE, it is a little better, 7/38. Now at the corner of North-East Bihar or South –West Bihar to travel to these two districts involves logistics, dangers and when they say that they have increased centers, of course they have, but, it is very misleading, it is less than half the truth, the increase is only in these two districts. They have not provided one center per district which is the minimum, I would say, it should be more.
Now, the numbers by the way of NEET are constantly increasing. In 2016, the number and today’s number, in 2019 last year was double for NEET. So, you need to have that infrastructure. In the name of infrastructure, you are touting a temperature gun, not knowing that Covid is a surreptitious, bad disease, it lies dormant, it is non-symptomatic, it need not have a temperature parameter at all, and a temperature gun is hardly a safe guard. How will you ensure in two districts in Bihar for an example, and densities are pretty bad in other states. 25 lakh students are a fraction of them, the average figure we have given, is 1,450 students per center on the average of the total number of centers and the total numbers of students, 1450 for JEE and 420 and 430 for NEET. These densities make a mockery of your Covid safeguards then again, a large number of students are those who come from rural areas, but, also from urban areas, Tier-II and Tier-III cities, with railways and buses running a 33-50% capacity. Such large movements are a recipe for disaster as far as health concerns, life concerns, security concerns, our concerns.
We have tried to provide a road map with full responsibility about how even if you postpone to October and November and expect the results in a curtailed period of 6 week instead of 8 weeks, you can comfortably start by January one and yet complete the academic year. So it is a constructive, non-negative, non-destructive approach, not to cancel and avoid the exams.
We have also raised the issue of non level playing field, which is a serious issue of discrimination; our law also frowns upon discrimination. You are having large segments excluded. They may not come out, they may not voice their concerns, but, segments which are fearful, which don’t have the logistical support, which don’t have the money, which are scared for their family and simply many cases don’t have the wherewithal to travel. You are also ignoring as this Government does 360 degrees complete thinking in a void almost. The mental status of our students, mental situation, … mental illness and mental situation is probably more important than physical constraints. They are under pressure, they are under pain, they are under fear, with 6 months of Covid and they are suddenly forced because you threw yourself into a corner, without thinking of alternative for 3-4 months, into a sudden press button, magic button kind of thinking- start giving exams from 1st September.
May I end by saying that the short order which dismissed in an earlier review petition has given no reasons and the grounds I have told you in brief, exist there. There are many much more material in the short time we are available in our review petition and as I came for this Press Conference, we found that CLAT, the law entrance Exams, CLAT, which have much lesser numbers, have just now a few hours ago been postponed from 7th to 28th September. In other major contradiction with lakhs of, 25 lakh people involved, no question of postponement, I have an ego, but, with CLAT you have adjourned it and you have postponed it.

This is a huge public interest issue and I hope that this great convergence of views by the very-very important states of India, will lead to public interest results.

Watch video here: https://youtu.be/wROK3UdFDxE

Thank you.
Sd/-
(Dr. Vineet Punia)
Secretary
Communication Deptt,
AICC

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