My AICC Press Brief dated 07.06.2017 in Hindi

डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज किसानों के साथ जो दुखद प्रसंग हुआ है उसके बारे में आपके साथ विश्लेषण करना है और वो मंदसौर तक सीमित नहीं है।  सच बात ये है  – किसान ने मांगे थे फसलों के दाम और भाजपा ने ले ली अन्नदाता की जान। किसान लगाते हैं कर्ज माफी की गुहार और भाजपा करती है गोलियों की बौछार। बिचौलियों से किसान है बेहालभाजपा ने दे दी है उनको बंदूकों की नाल ये सिर्फ कविता में वक्तव्य नहीं हैये एक पूरी दुखद सच्चाई है मंदसौर कीकल की।

क्या किसानों की व्यथा डी.डी. किसान चैनल ने दिखाई थीआपका चालचेहराचरित्रआपकी पार्टी काआपके बाकि सहयोगी संस्थाओं का सिर्फ मीडिया मैनेजमेंट है। सच्चाई को ना दर्पण करनाना दर्शानाना हल करनाना किसी को दिखाने देनासिर्फ मीडिया मैनेजमेंट करना जिसके लिए इंटरनेट तक बंद कर दिया। डी.डी. किसान चैनल ने कुछ दिखाया नहीं।

और जो आप मजाक बनाते हैं भारतीय नागरिकों और कृषकों का न्यायिक समिति बनाकर। मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि किसी चीज से अगर ध्यान दूर करना हैवहाँ से ध्यान भटकाना हैकई न्यायिक कमीशन आपने पहले कई बार बनाए हैंउनका हाल क्या हुआ है?

 2006 में दतिया में जबरदस्त दुर्घटना हुई थीउसके लिए H.K Pandey न्यायिक समिति बनाई गईआज 11 साल हो गए हैंकोई रिपोर्ट H.K Pandey समिति की नहीं आई है। 2012 में AK-47 फाईरिंग हुई थी रायसेन के पास,माननीय सुषमा स्वराज की Constituency के पासएक न्यायिक कमीशन बनाया गयाआज कर कोई रिपोर्ट नहीं देखी किसी ने। स्थगित करना झुठलाना बस। झबुआ में 90 लोगों की मृत्यु हुईन्यायिक समिति बनीलेकिन आज तक कोई रिपोर्ट नहीं बनी। तो हम ये पूछना चाहते हैं मोदी जी से कि इनकी सरकार ने कृषकों के विरुद्ध क्या कोई जंग छेड़ रखी हैमैं आपको कुछ आंकडें दूंगा।

 2014, 2015, में 12 हजार 360 कृषकों की मृत्यु, 12 हजार 602 और 2016 का आंकड़ा है- 14 हजार। ये ट्राँसलेट होता है 35 प्रतिदिन। ये सिर्फ 2-3 साल हैं इस सरकार केजिनका मैं आपको बड़ा स्पष्ट विवरण दे रहा हूं।

 पृष्ठ 44 में entry पढ़ने का मैंने जिक्र किया लेकिन हालत ये है कि 50 प्रतिशत से ऊपर प्रोफिट पर आपने स्पष्ट कह दिया उच्चत्तम न्यायालय को कि हम नहीं कर पाएंगे। जो Procurement Price दी है आपने गेहूं और चावल की,जो 50 प्रतिशत से बहुत कम हैउसमें भी आप कम मात्रा प्रिक्योर कर रहे हैं यानि जितनी उपलब्ध हैजितनी करनी चाहिए हर वर्षआपके शासन काल में Procurement की मात्रा गिर रही है। उसके भी आंकडें हैं- गेहूं 288 मैट्रिक टन से 229 मैट्रिक टनयानि 60 मैट्रिक टन कम हुआ है Procurement. प्राईस अलग बात है, Procurementकीमात्रा भी कम हुई है। चावल में 342 से 304 हुआ है। 37 लाख मैट्रिक टन कम। जितनी भी स्कीम हैवो अलग बात है हमने शुरु की थी- नेशनल फूड सिक्योरिटी मिशनराष्ट्रीय कृषि विकास योजना, National Horticulture Mission, Rainfed Area Development Programme, और इनकी पूरी सूची है हमारे पास। ये सब स्कीम करीब-करीब हमने शुरु की लेकिन 2014, 2015, 2016 और 2017 में हर वर्ष इनके ऊपर जो एक्च्वुअल खर्चा है वो कम हो रहा है। एक तो दूसरा आयाम ये है कि आप बजट में कटौती कर रहे हैं। जो बजट दे रहे हैं उसमें भी खर्चा कम हो रहा है। सब आंकड़े हैं।

नेशनल फूड सिक्योरिटी मिशन का उदाहरण लें तो लगभग आधा हो गया है, 1799 करोड़ से लेकर 998 करोड़ हो गया हैये दयनीय स्थिति है इस सरकार की। जिस प्रदेश ने मांग की हैअकाल के आधार पर वहाँ या तो जीरो दिया गया हैया 7-8 गुना कम दिया गया हैमांग से। तमिलनाडु में 40 हजार करोड़ की मांग की गईउनको मिला जीरो। आँध्रप्रदेश में 2 हजार 281, मिला क्या जीरो। कर्नाटक में लगभग 1/6 हिस्सा मिला, 8000 की तुलना में 1784 के लगभग।

 ये कैसा साथ हैक्या ये किसान का साथ हैये कैसा विश्वास हैक्या किसान को आप पर विश्वास हैये कैसा विकास हो रहा हैक्या किसानों की बढती हत्याएंउस विकास की परिभाषा की बात कर रहे हैं आपतो ना साथ हैना विश्वास है ना हो रहा विकास है। किसान का दर्द पुराने शीर्षक में दिखता है- किसान का दर्द है- आमदनी अठ्ठन्नी,खर्चा रुपया

बात है किसान के उत्थान की और पिछले 24 घंटों में प्रधानमंत्री जी ने एक ट्वीट किया हैसिर्फ उत्तान मंडूकासन के बारे मेंचुप्पी साध रखी हैकिसानों की बदहाली परआत्महत्याओं परहत्याओं पर।

एक प्रश्न पर कि किसानों पर हुई फायरिंग को लेकर भाजपा का बयान आया है कि ये सब कांग्रेस ने करवाया है और दूसरी तरफ भाजपा प्रवक्ता ने दिल्ली में कहा है कि कांग्रेस के हाथ में कोई दम नहीं हैश्री सिंघवी ने कहा कि जहाँ तक कांग्रेस के करवाने का सवाल हैये अगर इतना दर्दनाक वाक्या नहीं होता तो बड़ी मजाक करने वाली बात होती। ये बात उनके खुद के गृहमंत्री साहब ने मानी है कि ये फायरिंग पुलिस ने करवाई है। जहाँ तक हमें मालूम है मध्यप्रदेश का शासन कांग्रेस नहीं चलाता। तो इस प्रकार के मजाकिया वक्तव्य आते हैंगोलियों के ऊपरफायरिंग के ऊपरमृत्यु के ऊपर, ये उनका अपमान करते हैं। ये अंसवेदनशीलता दर्शाते हैं सरकार की। दूसरा आपने पूछा तो हम कहेंगे कि इतना ज्यादा अहंकार 3 साल में कहाँ से आ गया कि हाथ में कोई दम नहीं हैजब उसी हाथ से आपको राजनीतिक चपत लगी थी 10 वर्ष तक केन्द्र सरकार मेंआपको तो 3 वर्ष ही हुए हैं। 30 प्रादेशिक चुनावों में उसी दौरानतब आप हारे और हम जीते थे। तो हम समझते हैं कि अहंकार की भी एक सीमा होनी चाहिए और एक संतुलन होना चाहिए।

 

 एक प्रश्न पर कि प्रधानमंत्री जी ने कैबिनेट बैठक के बाद एक बैठक बुलाई थीइस परश्री सिंघवी ने कहा कि कहाँ अंदर बैठते हैंकब बैठते हैंक्या बैठक लेते हैंउस पर हम क्या टिप्पणी करें। हम तो जमीनी सचनीतिगत सच या परिवर्तन सच पर टिप्पणी कर सकते हैं। क्या कोई कोई परिवर्तन जमीन पर देखा, हमने कुछ नहीं देखाना तमिलनाडु मेंना महाराष्ट्र में और ना मंदसौर में। जहाँ तक कोई नीति, ऐसी घोषणा सुनी आपने, वो ये हैं कि यहाँ फायरिंग ही नहीं हुईफायरिंग कांग्रेस ने करवाईराहुल गाँधी जी आंदोलन में भाग लेने जा रहे थेतो मैं किस पर टिप्पणी करुं। आपका प्रश्न है वो पूछा जाना चाहिए संवेदनशील ऐसी सरकारों से जिनका एक तालमेल है अपनी जनता-जनार्दन से प्रश्नों के साथएक संवेदनशील संबंध है। यहाँ इस प्रकार के अपमान से भरे बयान मैं सुन रहा हूं सरकार से कि इस्तीफा तो दूर एक राहत मिल जाएकोई हल मिल जाए तो बहुत बड़ी बात है। जो आत्म मुग्धता से मदमस्त सरकार होती है सत्ता अहंकार सेजो बहाने बनाती हैजो हर चीज में सस्ती राजनीति देखती हैफोटो ऑपौर्चुनीटि की बात करती हैइंटरनेट बंद करती हैलोगों को जाने से मना करती हैअगर पत्ता हिलता है तो कहती है कांग्रेस ने हवा चलाई है। इस्तीफा वहाँ दिया होता है जहाँ कुछ शर्म होती हैआत्मसम्मान होता हैलेकिन यहाँ ऐसी कोई चीज नहीं है।

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