My AICC Press Brief dated 06.09.2017 in Hindi

श्री सिंघवी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि, आज एक बड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है, वो एक स्तर पे आप लोगों से भी सीधा सम्बंधित है। हमने सुना है कि अब इस देश में पूछना गुनाह है। विचारों पे पाबंदी, सोचने की पाबंदी, लिखने पे पाबंदी, लेकिन यहाँ तक पाबंदी सीमित नहीं है, विचारों पे, सोचने पे और लिखने पे, लेकिन अब, विचारों की हत्या हो रही है, सोच की हत्या हो रही है और लिखने पर भी हत्या की जा रही है।

 श्री सिंघवी ने कहा कि यह एक बहुत अजब प्रकार की कश्मकश है, यह कश्मकश मित्रों इस वक़्त की है, बोलें तो मारे जाएँगे,मर गए तो बोल नहीं पाएँगे। यह दुर्भाग्य है आज के समय का, हमारे आज के वातावरण का, कि हमे कहना पढ़ता है कि हमने सुना है, कि अब इस देश में पूछना गुनाह है। विचारों पे पाबंदी, सोचने पे पाबंदी, लिखने पे पाबंदी तक हम सीमित नहीं रहें है। अब विचारों पे हत्या, सोच पे हत्या और लिखने पर भी हत्या का समय आ गया है। आज जो स्वतंत्र सोच, free-thinking, चाहे वो असहमति की सोच हो, चाहे वो intellectuals की सोच हो, यह एक गाली वाला शब्द हो गया है। आपकी हिम्मत कैसे है कि आप स्वतंत्र सोच कर सकते हैं। यह जो आज हुआ है Ms Gauri Lankesh के विषय में, यह कोई एक हत्या नहीं है, यह हमारे गणतंत्र – लोकतंत्र के स्तम्भ की हत्या है। सबसे पहले, यह सिर्फ़ स्वतंत्र, निष्पक्ष, निडर भावना प्रकट करने के हमारे मानव अधिकार की हत्या है। लेकिन उस मानव अधिकार में सामविधानिक जो है, 19(1)(A), उसमें कही प्रेस का ज़िक्कर नहीं किया। यह प्रेस का ज़िक्कर कहा से आया है?

 क्यूँकि 70 साल पहले, और यह आज की बात नहीं है, हमारे उच्चतम  न्यायालय ने कहा था कि, 19(1)(A) अनुच्छेद जो है, वो तो खोखला होगा प्रेस के बिना। आपके लोकतंत्र का स्तम्भ जब तक उसमें नहीं आएगा, तब तक यह मानवाधिकार कैसे है?आज उस स्तम्भ पर सीधा एक वार है, घात है, और यह हमारे लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह है।

श्री सिंघवी ने कहा कि, कांग्रेस पार्टी उन सब सही, स्वछंद, स्वतंत्र, निडर बोलने वालों के साथ खड़ी है, चाहे वो प्रेस के मेंबरान हो या चाहे बाहर के लोग । और आप लोगों ने ज़्यादा शायद कांग्रेस पार्टी की निंदा इसीलिए नहीं की है, लेकिन हम मानते हैं कि यह कसौटी लोकतंत्र में नहीं है कि आपने हमारी निंदा की है कि नही की है। यही कसौटी नहीं समझ पा रही है यह सरकार, इसीलिए यह सब हो रहा है।

श्री सिंघवी ने कहा, माननीय कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी जी, उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी ने तुरंत, व्यापक रूप से,गम्भीर वार्तालाप किया है मुख्यमंत्री कर्नाटक से, और वह हर चीज़, हर प्रकार का यंत्र-तंत्र किया जा रहा है। अभी दोपहर में, 15-20 मिनिट पहले, एक IG के अंतर्गत एक SIT बन्ने का पूरा स्वरूप, आकार आ गया है। 3 पुलीस की टीम, प्रदेश के विभिन्न कोनो में, ऐसे भर्त्सना योग्य कार्यों में उन्हें पकड़ने में लगी हुई है। हमें आशा है, विश्वास है, हम आवान करते हैं कि तुरंत, जल्द से जल्द, सिर्फ़ पकड़ना नहीं होगा, लेकिन दंडित, सबसे ज़्यादा गम्भीर दंड जो मिल सकता है ऐसी चीज़ के लिए वह होगा, इसका हम आशा और विश्वास रखते हैं।

लेकिन यह सिर्फ़ Ms Gauri Lankesh की बात नहीं है, वो एक शहीद बनी है इसमें, लेकिन यह मुद्दा जो है वह इससे कई ज़्यादा व्यापक है। आज यह एक कोरी घटना नहीं है, न ही यह पहला है, और हमें दुर्भाग्य से कहना पढ़ रहा है कि आख़री भी नहीं।

क्यूँ 2014 के बाद इस वर्ग के विरुध, इस regularity से, हर हफ़्ते, हर महीने हो रहा है? यह प्रश्न मैं सरकार से पूछना चाहता हूँ और इसका उत्तर भी मैं आपको देना चाहता हूँ, इसके उत्तर में कोई संदेह नहीं है।

यह एक व्यक्ति विशेष की बात नहीं है, यह बात है एक वातावरण  जो बनाया गया है संदेह का, असहिष्णुता  का, एक अविश्वास का, finger pointing का, यह एक नया भारत है, यह नए अच्छे दिन है, यह नया Normal है। और यह सब उसी चीज़ की एक आप विद्यमान incident देख रहे हैं, लेकिन इसका जो मूल कारण है, वो यही है। 2016 में जब एक BJP के सांसद ने जब मुक़दमा दायर किया था, और जब न्यायालय का आदेश आया, तो जो पहला ट्वीट जो आया, वो सांसद भाजपा के MP थे, वो भाजपा के राष्ट्र अध्यक्ष IT सेल के, श्री अमित मालवीया का आया, मैं क्वोट कर रहा हूँ “Hope journalists have learnt their lesson”. तो आप सबक़ सीखिए, मेरा अनुरोध है कि आपको सबक़ सिखाया जा रहा है और आप लोग सबक़ नहीं सीख रहे है – यह आज का वार्तालाप है, यह आज का dialogue है, यह आज का New Normal  है। यह गणतंत्र की नई परिभाषा है। और क्यूँकि आप वो अलिखित आदेश का पालन नहीं कर रहें है, इसीलिए यह सब हो रहा है। ऐसे कई लोग है जिनके ट्विटर और फ़ेस्बुक अकाउंट PMO फ़ॉलो करता है, आप चेक कर लीजिए। माननीय वरिष्ठ नेता, कैबिनेट के मेंबरान उन्हें फ़ॉलो करते है। कोई सीधा पीठ थपथपा के औपचारक वक्तव्य देने की ज़रूरत नहीं होती है, प्रोत्साहन एक आँख से, मुँह से, और चेहरे के भृकुटि से प्रोत्साहन दिया जा सकता है। और यह प्रोत्साहन करने के वातावरण ही इसके मूल्य कारण है जिसकी मैं भ्रष्टना करता हूँ।

George Orwell का बिलकुल सही कहना है,  ‘The further a society drifts from truth, the more it well hate those who speak it.’

तो आज यह जैसा मैंने कहा, अजब कश्मकश है, इसका निवारण सिर्फ़ गणतंत्र – लोकतंत्र की सही परिभाषा समझ कर ही हो सकता है और उसको समझना के लिए, जाग्रुत करने के लिए, व्यक्त करने के लिए, जिनको Presititute कहा गया है, जिनको बाज़ारू कहा गया है, वही वर्ग है जिसको हिम्मत से बोलना पढ़ेगा, स्वतंत्र, स्वछंद, निडर और निष्पक्ष।

एक प्रश्न – जैसा कि आपने कहा क्या पिछले तीन साल में, हत्यायें करने वाले और उसके लिए माहौल बनाने वालों के हौसले इसीलिए बढ़ गए हैं क्यूँकि इनके जो आरोपी थे, उनको पिछले तीन सालों में जेलों से बाहर कर दिया गया है के उत्तर में श्री सिंघवी ने कहा, मैं जेनरल बात नहीं कहूँगा, लेकिन हमारा स्पष्ट आरोप लिखित रूप से कई महीनो पहले से है, की जहाँ तक कर्नाटक का सवाल है और महाराष्ट्र का विशेष रूप से सवाल है, बहुत सारी चीज़ें कर्नाटक में महाराष्ट्र के प्रभाव से, दुशप्रभाव से, हो रही हैं, एक सनातन संस्था कर के जो नाम है, और उसके कई cadre, इधर-उधर, महाराष्ट्र कह ले,कर्नाटक कह ले, और उनके कई अभियुक्त महाराष्ट्र पे हमने स्पष्ट रूप से नाम लेकर कहा है, उन पर कोई दण्ड का कार्य नहीं हुआ है। आपने अपने माथे, अपने भृकुटि, अपने चेहरे, अपने आँख से यह संकेत दे दिया है कि यह प्रोत्साहित है ऐसी प्रक्रिया और आपने निंदा न कर के भी एक और प्रोत्साहन दिया है। दण्ड तो बहुत दूर की बात कर रहें हैं आप, इसीलिए निश्चित रूप से यह nexus है और इसका दुशप्रभाव एक प्रदेश में नहीं, अखिल भारत में फैल रहा है,

दूसरा सवाल कि नितिन गड़करी जी कह रहें हैं कि, कर्नाटक की यह घटना है और कर्नाटक सरकार के ज़िम्मे है क़ानून व्यवस्था, हर चीज़ पर प्रधानमंत्री बोले ये ज़रूरी नहीं है, श्री सिंघवी ने कहा कि, वो उनका मत हो सकता है, मैंने तो देखा है कि हमारे सबसे प्रभावशाली वक़्ता माननीय प्रधानमंत्री जी हर चीज़ पर बोलते हैं, ख़ुद नहीं बोलते हैं तो उनका ट्विटर अकाउंट बोलता है,ट्विटर नहीं बोलता है तो उनका फ़ेस्बुक अकाउंट बोलता है, यह प्रकाशित किया जाता है आप लोगों के ज़रिए कि इतने मिल्लियन-लाखों-करोड़ों फ़ालोअर हैं। तो यह ज़ाहिर है कि यह मुद्दा अहम नहीं है उनकी priority लिस्ट में, अब मैं तो नहीं कह सकता कि आप ज़रूर बोले किसी चीज़ पर, मैं तो सिर्फ़ कह सकता हूँ कि आपकी अहमियत और उसकी अहमियत के पीछे क्या कारण है, कारण यह है कि यह एक वर्ग की सोच है और वो जो उस वर्ग की निंदा नहीं करता है कड़े से कड़े शब्द में, मैं उसको इसमें भागेदारी मानता हूँ उस सोच का।

एक और सवाल पर कि अनंत कुमार ने भाजपा की प्रेस वार्ता में  कहा है कि अब तक 18-19 जो राजनेतिक हत्यायें जो हुई है उस प्रदेश में, यह पूरी तरह से क़ानून व्यवस्था का मामला है और उसके ख़िलाफ़ सकट करवाई हो, इसको विचारधारा से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, श्री सिंघवी ने कहा है कि, आप यह बताइये, आप लोगों ने प्रश्न क्यूँ नहीं पूछा अनंत जी से कि क्या ऐसी घटना दस वर्ष में हुई? यह जिनके नाम आप सुनते है, यह संस्था वो संस्था यह अभियान, यह वर्ग, इनका नाम सुना आपने? क्यूँ? यह मूल प्रश्न पूछ रहा हूँ मैं आपसे, इसीलिए क्यूँकि उन्मे भय था, उन्मे परोक्ष रूप से प्रोत्साहन नहीं था। यह मूल-मुद्दा है जो आप भूल रहे हैं। वह क़ानून व्यवस्था का प्रश्न आप लोगों ने किया, वो होता है इवेंट के बाद। मैं आपको मारता हूँ, आप मुझे दंडित करते हैं, वो इवेंट के बाद की प्रक्रिया होगी। हम यह प्रश्न पूछ रहें हैं कि यह तीन साल से हो क्यूँ रहा है?

रोहिंग्या मुस्लिम के ऊपर कांग्रेस के स्टैंड के के सवाल पर श्री सिंघवी ने कहा कि, मैं नहीं कहूँगी इसपे क्यूँकि यह directly subjudice है। उच्चितम न्यायालय ने नोटिस दिया है, अगली तारीख़, 11 तारीख़ है, इसी मुद्दे पर बहस हो रही है, इसीलिए सही नहीं होगा, लेकिन एक बात ज़रूर कहूँगा मैं, हर सरकार की, कांग्रेस के पहले जो सरकार की भी, कांग्रेस की सरकार की भी और यह सरकार की भी, एक नीति है जिसके अंतर्गत पाकिस्तान से, नेपाल से, अफ़ग़ानिस्तान से, कई सारे देश है जहाँ से रेफ़्यूजी आए न आए, उसकी नीती चल रही है। आप उस नीती के अनुसार अगर किसी को हटाए या ले, तो कोई आपत्ति नहीं है,लेकिन आप किसी को सिर्फ़ उनके धार्मिक विचार के कारण अगर निष्पक्ष भावना से व्यवहार नहीं करेंगे तो उसका उल्लंघं होगा। लेकिन, आज मैं यह नहीं कह रहा हूँ, मैं 11 तारीख़ के उच्चितम न्यालय के आदेश के बाद टिप्पणी करूँगा।

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