My AICC Press Brief dated 18.09.2017 in Hindi

help with math homework algebra 1 डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि, सच्चाई तो आंकड़ों के आधार पर होती है और मैं समझता हूं कि 70 वर्षों में कोई ऐसी सरकार नहीं आई जिसने इस निपुणता से इस बात को पूरी तरह से अपने में आत्मसात कर लिया है कि किस प्रकार से आर्थिक रुप से आप सबसे जबरदस्त घोटाले और घपले करेंगे इस देश के आर्थिक ढांचे से और साथ-साथ अपनी पीठ थपथपाते रहेंगे, अपने आपको बधाई देते रहेंगे। हर वो चीज जिसको उठना चाहिए, वो गिर रही है।

writing paper for college students विकास की दर, निवेश की दर, आयात-निर्यात की दर, रोज़गार की दर और हर वो चीज जिसको उठना चाहिए,वो और गिर रही है। क्रूड ऑयल और सब्जियों के विषय में कीमतें और deficit (घाटा), मैं समझता हूं कि आप आम आदमी को अपमानित कर रहे हैं, उसका मजाक उड़ा रहे हैं,एक बहुत सस्ता और क्रूर मजाक उड़ा रहे हैं, ये कहकर,कभी तो आप कहते हैं ‘Technical Reasons’ , जो माननीय सत्तारुढ़ पार्टी के अध्यक्ष ने कहा है। उससे ज्यादा मजाक उड़ाते हैं आप यह कहकर कि माननीय प्रधानमंत्री की सरकार ने वो आर्थिक integration किया है जिसको वो राजनीतिक integration से तुलना करेंगे, सरदार पटेल जी के। जिसको वो सामाजिक integration से तुलना करेंगे,बाबा साहब अंबेडकर जी से। क्या ये मजाक नहीं है इस देश का, क्या ये तमाचा नहीं है आम आदमी के चेहरे पर?
क्या ये सच है नहीं है कि आपने कभी legacy शब्द का इस्तेमाल करके, कभी तकनीकि कारणों का सच इस्तेमाल करके, हर उस आंकड़े को छुपाने का प्रयत्न किया है, जो आंकड़ा एख चपत है, इस देश के आर्थिक मैनजमेंट के विषय में। मैं आपको 4-5 संक्षेप में उदाहरण दूंगा, आंकड़े आपके पास हैं, लेकिन ये हर दिन विविध रुप से सामने आते हैं और यद्दपि कुछ हिस्सा इसका आपके समक्ष रखा गया, उनको दोहराना, अंडरलाईन करना, अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि सच्चाई छुपाई नहीं जा सकती है। लोग इस देश में घास नहीं खाते हैं। आप कुछ लोगों को मूर्ख बना सकते हैं इस प्रकार से दिन-प्रतिदिन जुमलों के आधार पर सबको मूर्ख नहीं बना सकते हैं। ये आर्थिक ढांचे को नष्ट करने के जबरदस्त मिस मैनेजमेंट (Mismanagement) के उदाहरण हैं।

homework help for middle schoolers पहला- 6 क्वार्टर, 2015-16 के फाईनेंशल ईयर (Financial Year) के अंतिम क्वार्टर, Q-4 से लेकर इस वर्ष के पहले क्वार्टर, 2017-18 के पहले क्वार्टर तक, हर वर्ष 9.2% से आप आर्थिक विकास की दर को ले आए हैं 5.7%। अगर दुनिया में कोई सरकार या कोई मंत्रालय देश के GDP को साढ़े 3, पौने 4 % से कम कर दे, तो वो सरकार निक्कम्मी कहकर खुद इस्तीफा दे दे। आपको इसके ऐवज में 3-4 चीजें मिली हैं – तकनीकि कारण, legacy (विरासत) कारण और All is well कारण, (सब ठीक है)। लेकिन ये समुदाय हम लोग सब, 3-idiots नहीं है। वो 3-idiots भी बहुत बुद्धिमान लोग थे, हम 3-idiots नहीं हैं। हर वर्ष में, साढे 3, पौने 4%, हर क्वार्टर में, ये कभी नहीं हुआ देश में।

sample termpaper proposal for humanity दूसरा – रोजगार, आपके पास आंकड़े हैं, लेकिन लैबर ब्यूरो डेटा का एक आंकड़ा, 8 वर्ष में रोजगार की वृद्धि की दर कभी इतनी न्यूनतम नहीं है,जो अब है। मैं सिर्फ एक आंकड़ा देकर अपनी बात रोजगार के विषय में खत्म कर रहा हूं। वो 2 करोड़ प्रतिवर्ष तो एक स्वप्न लोक छोड़ दीजिए आप। CMIE के डेटा के आधार पर, 15 लाख रोजगार इस वर्ष के पहले क्वार्टर Q-1 में, नोटबंदी के परिणाम स्वरुप खत्म हुए हैं। कृषि की बात हम नहीं करेंगे अभी, हमने अलग से की है।

university of north florida creative writing लेकिन मैं वो बात आपको वापस याद दिलाऊँगा, वो पृष्ठ आपके पास है कि जब आपको आकर्षित करने थे वोट, तो घोषणा पत्र में आपने कहा था लिखित रुप से – हम गॉरंटी करते हैं, 50% न्यूनतम MSP के ऊपर हम आपको कीमत देंगे और वही हलफनामा उच्चत्तम न्यायालय में – हम नहीं दे सकते, हम नहीं देंगे, हमें नहीं देना चाहिए, उचित नहीं है देना, हलफनामा उच्चतम न्यायालय जो कि perjury या contempt में आधारित होता है।

live homework help alabama नंबर- 4, और ये बहुत महत्वपूर्ण है, इसके बारे में हमने बहुत कम बात की है आपसे, रोजगार और इसके बार में तो बात हो चुकी है। निर्यात -Exports, हाल में जो स्वतंत्र विशेषज्ञ हैं आर्थिक ढांचे के, उन्होंने कहा है कि, जो दावा करता है और आपको हर दिन दावे मिलते हैं, होना तो 7% चाहिए, होगा 7.5%, 8% तक हम पहुंच जाएंगे, दुनिया के दूसरे नंबर पर हैं, पहले नंबर हैं। आपको हर दिन 6% और 8% के बीच में घुमाते रहते हैं हर दिन, जुमलो के आधार पे। सच्चाई ये है कि कोई देश विश्व में कभी,विश्व में इतिहास में आज तक 8% या 7% पर विकास नहीं किय़ा है,जब तक निर्यात न्यूनतम 15% पर न हो, न्यूनतम। हमने 15% और 20% तक विकास करके दिखाया है। आज के आंकड़े बहुत चौंकाने वाले हैं। 13,14 Positive + 17.3% निर्यात की दर, ग्रोथ की दर। अगले वर्ष 14-15 में माईनस, Negative 1.2, अगले वर्ष 15-16 में Negative (-) -18%, किसी साल में ऐसे आंकड़े नहीं आएं हैं और उसके बाद क्योंकि माईनस -18 से कम तो हो नहीं सकता, Positive 5%, जो कि न्यूनतम होना चाहिए 15%, अगर आपके दावों में एकमात्र भी सत्य है।

college essay helpers निवेश, किसी प्रकार का निवेश, 27% GDP का अनुपात है जो 14 वर्ष में सबसे न्यूनतम है। मैं एक वर्ष, 2 वर्ष, 5 वर्ष की बात नहीं कर रहा हूं,इसमें भाजपा की सरकार आ जाती है, कांग्रेस की सरकार आ जाती है और थर्ड फ्रंट की सरकार भी आ जाती है। 26.9% है। आज आप इसके साथ जो सबसे अच्छा द्योतक होता है, विकास की दर का,उद्योग का, ‘Make In India’ का, वो होता है क्रेडिट कितना दिया बैंको ने, कितना आपने मांगा, कितना लिया लोगों ने। वो absolute terms में 20 हजार करोड़ से गिरा है, जुलाई 2015 से जुलाई 2017 में।Absolute terms में।

homework maker teachers लगभग 1 लाख 20 हजार करोड़ था जुलाई 2015 में, लगभग 1 लाख करोड़ है जुलाई 2017 में, लगभग 20 हजार करोड़ रुपया गिरा है, Credit Optic, Credit Optics से मालूम पड़ता है छोटे enterprises का, medium enterprises का, कि कितना दम है ग्रोथ में। कितनेGreen Shoots of Recovery आ रहे हैं।

victorian toys primary homework help मैंने सब्जियों और तेल के विषयों में कीमतों की बात कर ली है।ये बात सही है कि एक एवरेज दरों के आधार पर अगर आप बहस करते हैं तो गिरावट हुई है इन विषयों में। 44% सब्जियों में और प्याज में 88% और 72 रुपए के पेट्रोल में औसतन रुप से 30 या 35 रुपया टैक्स है। एक पैसा उसको आपकी तरफ नहीं दिया जा रहा है और ये भी नहीं किया जा रहा है कि वो 35 रुपए का जो अंतर है, उसको किसी टाईड फंड में डाला जाए, जिससे ये कहा जाए कि इससे सिर्फ सड़के बनेंगी, सिर्फ इससे ग्रामीण टॉललेट बनेंगे।जबकि अंतर्राष्ट्रीय कीमतें बहुत ही न्यूनतम और अच्छे स्तर पर हैं, तेल के विषय में।

business plan written by students सबसे अंतिम उदाहरण, जो बहुत चौंकाने वाला है, इतनी बातें आप सुनते हैं हर दिन, क्या समागम होता है बैंक का, अभी हुआ था, पिछले वर्ष भी हुआ था, उसका नाम मैं भूल रहा हूं, मोदी जी ने सब नए नाम दिए हैं मीटिंग के। हर दिन कई बड़े-बड़े दावे दिए जाते हैं कि हमने ऐसा कर दिया है, वैसा कर दिया है कि NPA’s तो आज के बाद,जितने NPA’s हुए थे इतिहास में वो पहले हुए हमारे और इसके बाद सब NPA’s नाम ही शब्द हम डिक्शनरी से हटा देंगे।

दो आंकड़े छपे हैं अखबारों में स्वतंत्र संस्थाओं द्वारा। राष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त वृद्धि हुई है 3 वर्षों में NPA’s में। उनके आंकड़े आप देख लीजिए,छपे हुए हैं आज , जबरदस्त वृद्धि हुई है और गुजरात में जहाँ आप बहुत सारी चीजें करने का प्रयत्न कर रहे हैं, चुनाव को लेकर. वहाँ पर भीNPA’s सबसे ज्यादा वृद्धि में गए हैँ। अब ये क्या है, legacy है, अच्छाईयाँ हमारी हैं, गलतियाँ पुराने लोगों की हैं, वो सब आप कहते रहीए,लेकिन इन दो आंकडों से आप कहीं नहीं भाग सकते और कोई उत्तर नहीं है आपके पास सिवाए इसके,कि बार-बार इस शब्द का दुरुपयोग करना-legacy।

अंत में, Make In India, शेर और बब्बर शेर ऐसी आवाजें नहीं करते हैं। ये तो किसी बिल्ली वाली आवाज भी नहीं है कि 1.7% एक आंकड़ा है,1.3% दूसरा आंकड़ा है और 1.2% तीसरा आंकड़ा है, अगर आप दो महीनों का लें, एक क्वार्टर का लें या एक महीने का लें, कोई भी ले लीजिए। उद्योग की वृद्धि का ये आंकड़ा कभी ‘Make In India’ के लिए कोई लाज्मी हो सकता है? मैं अंत में ये कहूंगा कि, शब्दों का प्रयोग करना,शब्दजाल में आपको फंसाना और आंकड़ों से दूर भागना, जनता को अपमानित करना, उनको समझना कि वो बेवकूफ हैं, ये खासियत हो गई है,जुमलों में फंसाए रखना, ऐसे शब्दों का प्रयोग करना जिनका कोई मायने नहीं है, कभी तकनीकि, कभी legacy, ये सब इस सरकार की, इस सत्तारुढ़ पार्टी की विशेष पहचान है।

एक प्रश्न पर कि रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बयान दिया है, क्या कांग्रेस पार्टी उससे सहमत है, डॉ. सिंघवी ने कहा कि मैं इस नाजूक मुद्दे पर कोई ऐसा गैर-जिम्मेवाराना वक्तव्य नहीं देने वाला हूं। हमको बहुत चीजें कहनी हैं, लेकिन जान-बूझ कर मैं अपने आपको सीमित रख रहा हूं और उस सीमित दायरे में मैं ये कहूंगा कि ये अत्यंत आवश्यक है इस सरकार के लिए, पहला, कि वो गैर-सरकारी हर पार्टी को, विपक्ष को, प्रादेशिक और केन्द्र की पार्टियों को पूरी तरह से, सामूहिक रुप से विश्वास में लें। दूसरा, कि ऐसे गैर-जिम्मेवाराना हलफनामे नहीं कहें जिसमें लिखा है और ये बड़े चौंकाने की बात है, ये मेरी बात नहीं है, मैं आज बीजेपी हूं, कांग्रेस हूं, रिजनल पार्टी हूं,नेशनल पार्टी हूं, मुद्दा नहीं है, देश वही है, सरकार वही होती है, पार्टियाँ बदलती हैं। लिखना हलफनामे में, उच्चतम न्यायालय में कि भारत किसी अंतर्राष्ट्रीय Treaty से बाऊंड नहीं है, ये कोई क्षणिक मामला नहीं है।

तीसरा जब आप सामूहिक रुप से उससे बातचीत करेंगे तो ये देखा जा सकता है कि किस सीमाओं, किस दायरे, किस नियमों के अंदर राष्ट्रीय सुरक्षा भी सुरक्षित रह सकती है और हमारे अंतर्राष्ट्रीय ओबलिगेशन, उत्तरदायित्तव रह सकते हैं। इसको किसी द्वेष की भावना से देखने की आवश्यकता नहीं है। हम सब साथ हैं देश के लिए,लेकिन हम सबको विश्वास में लिया जाए।

एक अन्य प्रश्न पर कि BJP अध्यक्ष अमित शाह जी आज कोर्ट में पेश हुए, माया कोडनानी के गवाह के तौर, क्या कहेंगे, डॉ. सिंघवी ने कहा कि मेरा उपयुक्त नहीं है बोलना,किसी राजनीतिक पार्टी का इस मंच से इस पर टिप्पणी करना। ये कानूनी कार्यवाही है, Mr. A, Mr. B के बारे में या महिला के बारे में एविडेंस दे रहे हैं। ये बहुत निष्पक्ष रुप से, कड़े रुप से, सख्त रुप से, गंभीर रुप से और व्यापक रुप से कोर्ट के नियमों एविडेंस एक्ट के अंतर्गत उसकी जांच की जाएगी, सिर्फ किसी के कहने से कुछ नहीं होता। हलफनामा और गवाही दी जाती है, अवलोकन के लिए कोर्ट द्वारा। ये भी साथ-साथ सही है कि हर अभियुक्त का ये हक है, मानवाधिकार है कि वो किसी भी साक्षी या साक्ष्य को बुला लें, तो मैं समझता हू कि इस बात को कोर्ट के नियंत्रण में छोड़ देना चाहिए। लेकिन ये बात निश्चित है कि ऐसे संगीन मुद्दों को विषयों में बहुत Care और Caution के साथ, बहुत ध्यान के साथ कार्यवाही की जानी चाहिए और हमें पूरी आशा और विश्वास है कि ये कचहरी भी और कहीं और भी अगर ये मामला जाता है, appellate level पर, तो सब कचहरियाँ इसको ध्यान से देखेंगी और वो निर्णय के बाद हम टिप्पणी करेंगे।

एक अन्य प्रश्न पर कि जो इक्नोमिक ग्रोथ को आप बताते हैं, रोज चेलेंज करते हैं, इसको बदल कर आप बताते हैं, क्या इस बेस स्केल पर आप प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगते हैं,डॉ. सिंघवी ने कहा कि, मैंने आज नहीं कहा, पहले भी कहा है कि आप सबसे ज्यादा सकारात्मक सरकार की तरफ सहानुभूती रखने वाला मुद्दा ले लीजिए, तब जाकर 9.2 से 5.7 आया है। आप बिल्कुल सही कह रहे हैं कि अगर आप 2013 के पहले के आधार पर चलें तो ये लगभग साढ़े 3.5 और 4 के बीच में है। लेकिन 5.7 अपने आप में collapse के बराबर है और 4% तो निश्चित रुप से collapse है। लेकिन हम क्या करें, हम आपके समक्ष सिर्फ यह जागरुकता फैला सकते हैं। मैं समझता हूं कि यह पूरा देश समझता है कि अब ये जुमले और शब्द ऐसी चीज को ढक नहीं सकते, छुपा नहीं सकते।

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