Press Briefing on Jammu and Kashmir and Ladakh

ALL INDIA CONGRESS COMMITTEE

24, AKBAR ROAD, NEW DELHI

COMMUNICATION DEPARTMENT

Dr. Abhishek Manu Singhvi, MP and Spokesperson AICC addressed the media today at AICC Hdqrs. 

डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि हम इसको बहुत गंभीर बात मानते हैं, अत्यंत चिंता का विषय है कि जो आज लगभग 6 दशकों से नहीं हुआ, वो हमारी नाक के नीचे, इतने सारे वक्तव्यों, राष्ट्रवाद की सीख और जुमलेबाजी के दौरान हो रहा है, संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा समिति में आज साढ़े सात बजे लगभग, और सरकार देख रही है, प्रधानमंत्री चुप हैं। आप जानते हैं कि शुरुआत से हमारी विदेश नीति, भारत सरकार की विदेश नीति का एक अभिन्न स्तंभ है, एक ऐसा स्तंभ जो बदला नहीं जा सकता कि ये मुद्दे अंतर्राष्ट्रीय तो दूर या तो पारस्परिक बॉयलैट्रेल हैं और इस केस में अगर हम कानून बदलते हैं तो आंतरिक हैं, बॉयलैट्रेल भी नहीं हैं।

एक तरफ तो ये बॉयलैट्रेल भी नहीं है और एक तरफ आप इसका अंतर्राष्ट्रीयकरण हो रहा है और क्या ये आपकी पूर्णतया डिप्लोमेटिक असफलता नहीं दर्शाता? क्या सुरक्षा नीति और स्ट्रेटेजिक मुद्दों में आपकी घोर असफलता नहीं दर्शाता कि एक तरफ माननीय प्रधानमंत्री जी अपने विदेश मंत्री को इसी विषय के लिए चीन भेजते हैं। चीन में विदेश मंत्री बैठ कर इस बारे में बातचीत कर रहे हैं और भारत की नाक के नीचे चीन पीछे से जाकर पाकिस्तान की पैरवी करते हुए ये समिति की मीटिंग पूरी तरह से संयोजित कर लेता है और आज साढ़े सात बजे वो हो रही है।

मैं आपके समक्ष जो सर्वविदित है, वो दोहराना चाहता हूं, क्योंकि सर्वविदित चीजें आजकल भंग हो रही हैं, उनका खंडन हो रहा है। जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अक्षुण अंग है, जम्मू-कश्मीर के विषय में इसके विपरीत जहाँ तक भारत का सवाल है, कोई व्यक्ति विशेष, कोई संस्था, कोई देश नहीं कह सकता। इस विषय में भारत का स्टेंड दशकों से स्पष्ट है और अगर उसमें लेष मात्र भी बदलाव इस प्रकार से किया जा रहा है और ये स्टेंड दोहराया गया, विरोध के बावजूद लिखा गया, हस्ताक्षर हुए, शिमला एग्रीमेंट में, माननीय श्रीमती इंदिरा गांधी जी द्वारा। तो ये आज कैसे हो रहा है, क्यों हो रहा है, क्यों होने दिया जा रहा है? ये चुप्पी नहीं चलेगी, ये अवसरवादिता नहीं चलेगी, ये जुमलेबाजी नहीं चलेगी।

मैं अनुरोध करुंगा हाथ जोड़कर माननीय प्रधानमंत्री जी से कि फोन उठाएं और सुयंक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में हमारे जितने मित्र हैं, उनके जरिए इस मीटिंग को निरस्त करवाएं, तुरंत कैंसिल करवाएं। मैं अपनी बात अंत करने से पहले ये कहूंगा स्वत: ही कि हमें इस बात की परवाह नहीं कि इस प्रेस वार्ता के 15 मिनट बाद वो सभी ताकतें जिनका काम है, ये चीज कहना शुरु कर दें कि ये राष्ट्र विरोधी हैं, गैर राष्ट्रीय हैं, एंटी नेशनल हैं।

मैं विनम्रता से सरकार, माननीय प्रधानमंत्री जी को याद दिलाना चाहता हूं कि आपकी राष्ट्र विरोधी इस कसौटी पर तो आप कहीं कल वाजपेयी जी को तो राष्ट्र विरोधी ना कहना शुरु कर दें, क्योंकि वाजपेयी जी ने कैसे हिम्मत कर ली इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत की बात करने की? वो तो राष्ट्र विरोधी बातें हो गई, आपकी परिभाषा से, मैं नहीं कह रहा हूं। वाजपेयी जी की बस यात्रा तो उससे भी बड़ा राष्ट्र विरोध था और माननीय प्रधानमंत्री जी आपकी सरकार का इंटर-लोकूटर जो बातें कर रहे थे सबसे, चाहे हुर्रियत या गैर हुर्रियत, वो भी क्या राष्ट्र विरोधी काम कर रहे थे?

मैं अंत में आपको याद दिलाना चाहूंगा कि ये जो आपका गठबंधन विवाह हुआ था जम्मू और कश्मीर में, जिसके विषय में आपने ‘ऐजेंडा फॉर गवर्नेंस’ हस्ताक्षर किए थे पीडीपी के साथ, बड़े अद्भुत कारण रहें होंगे इसके लिए, “It will be the guiding framework for Governance” लिखा था इसमें, तो ये तो पूरा राष्ट्र विरोधी हो गया, क्योंकि इस पर तो आपने विशेष स्टेटस की बात की है, संवैधानिक प्रावधानों की बात की है। इसकी कॉपी आप देख सकते हैं, इसमें आपने Reconciliatory environment; Build stake in the peace and development, society and exchange, travel and commerce, trade business और सबसे जरुरी कहा था, Meaningful dialogue with all stakeholders मैं कोट कर रहा हूं, एक भी शब्द मेरा नहीं है। इसी प्रकार से माननीय प्रधानमंत्री आपने ही 15 और 16 में पांडे जी को इंटर लोकूटर बनाया था, बाद में आर एन रवि को बनाया था, जिसके अंतर्गत नागालैंड के विषय में एनएससीएन से फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे आपने। तो बल्कि दो प्रकार की सॉवरैनिटी की बात करता है, ये तो पूरा ही राष्ट्र विरोधी है। नागालैंड में तो वार्तालाप के दौरान एक समय तो भारत की अक्षुण्णता और संप्रभुता को भी मानने को तैयार नहीं था, वहाँ भी आपने फ्रेमवर्क एग्रीमेंट किया। तो कृपया ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करके आप ये ना समझें कि हम अपनी बात रखने से झिझकेंगे। मैं सिर्फ इसलिए आपको बता रहा हूं कि आप अकबर इलाहाबादी के बड़े प्रसिद्ध वाक्य को, मुहावरे को उल्टा सिद्ध कर रहे हैं कि हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम, वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती। इस प्रकार के आंडबर नहीं चलेंगे, आज की मांग, आज की स्पिरिट ये है कि ये एक अद्भुत चीज जो हो रही है इस सरकार की नाक के नीचे, उसको तुरंत रोका जाए।

एक प्रश्न पर कि जम्मू-कश्मीर के चीफ सेक्रेटरी ने कहा है कि अगले कुछ दिनों में जम्मू कश्मीर में पाबंदियां कम हो जाएंगी, डॉ. सिंघवी ने कहा कि मेरा आज का विषय भिन्न है, संयुक्त राष्ट्र के विषय में है, इससे खास संबंध नहीं है, लेकिन मैं इतना ही कहूंगा कि ये आपने जो वाक्य बोला, एग्जेक्टली यही वाक्य, हुबहु बिना एक कोमा, फुल स्टोप के बदलाव के, शायद ये पूरा देश एक हफ्ते से सुन रहा है। सिर्फ बोलने वाले बदल सकते हैं, आज चीफ सेक्रेटरी ने कहा, कल गवर्नर ने कहा, परसों सिक्योरिटी ऐजेंसी ने कहा और मैं आपको विश्वास दिला सकता हूं कि कल यानि आने वाले कल में चौथा व्यक्ति कहेगा। तो आप हमें कोट करते रहेंगे, देश सुनता रहेगा, जब होगा तब बात करेंगे।

न्यूक्लियर नीति के उपयोग के संबंध में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी के दिए बयान पर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि मैं आपके प्रश्न के विषय में ये स्पष्ट कर दूं कि इस देश का हर नागरिक, हर राजनैतिक पार्टी, इस कमरे में हर व्यक्ति इस बात पर 100 प्रतिशत सरकार के पीछे खड़ा है, देश के पीछे खड़ा है, जहाँ तक रक्षा, सुरक्षा की नीति है, जहाँ तक न्यूक्लियर नीति का सवाल है, लेकिन साथ-साथ मैं विनम्रता से ये कहना चाहूंगा कि माननीय रक्षा मंत्री या तो रहस्यमय वाक्य बता रहे हैं या कोई नीतिगत बदलाव नीति में घोषणा कर रहे हैं। तो उनको मुहावरों में बात नहीं करनी चाहिए, देश को स्पष्ट बताना चाहिए कि आज की हमारी न्यूक्लियर नीति क्या है, वो आश्वसत रहें कि देश और हम उसका स्वागत करेंगे, उसके पीछे खड़े रहेंगे, लेकिन ये एक बहुत गंभीर और व्यापक बात है कि जो परोक्ष रुप से मुहावरों में कम्यूनिकेट नहीं की जा सकती, इसके लिए स्पष्टता और व्यापकता चाहिए, जिसके लिए मैं मांग करुंगा और अनुरोध करुंगा।

एक अन्य प्रश्न पर कि धारा 370 को लेकर गृहमंत्री अमित शाह जी हरियाणा में रैली कर रहे हैं, क्या कहेंगे, डॉ. सिंघवी ने कहा कि ये तो स्वतंत्र देश है, इसमें एक नीति पारित है, देश ने उसको पारित किया है, संसद ने पारित किया है। इसमें आपका क्या प्रश्न है। हम लोग संसद में जो नहीं भी मानते हैं, जो उसका विरोध भी करते हैं, उनको भी अनुसरण करना पड़ता है, क्योंकि कानून है देश का, तो इसमें आप क्या नई बात समझ रहे हैं। निश्चित रुप से गणतंत्र में, लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपना रुख और मत रखने का अधिकार क्षेत्र है, उसी प्रकार से जो या तो उस नीति का विरोध करता है या जिस तौर तरीके, प्रोसिजर से नीति लाई गई, या उसमें गैर कानूनी तत्व हैं, उसकी बात करता हैं, तो उसका भी अधिकार क्षेत्र वैसा ही है।

एक अन्य प्रश्न पर कि कांग्रेस नेता श्री पी.चिदम्बरम द्वारा प्रधानमंत्री के भाषण से संबंधित दिए बयान पर आप क्या कहेंगे, डॉ. सिंघवी ने कहा कि मैं नहीं समझता कि कोई भी आपत्तिजनक बात कही गई है, ना तो प्रधानमंत्री ने कोई आपत्तिजनक बात कही है, ना पी.चिदम्बरम जी ने उसका समर्थन करते हुए कही है। मैं नहीं समझता कि हमने इस पोडियम से इन तीन नीतियों की कभी भी कोई निंदा की है, प्लास्टिक के यूज को प्रतिबंध करना, कोई निंदा कर सकता है क्या? पर्यावरण को स्वस्थ रखना, जनसंख्या को कंट्रोल करना, सबसे पहले जनसंख्या के संबंध में कई सारी नीति इस देश में, कांग्रेस सरकार लाई है। तो हमारा विरोध सिर्फ इस बात पर है कि विकास की बातें करने में, विकास की घोषणा करने में प्रधानमंत्री जी बहुत माहिर हैं। हम थोड़ा ये भी चाहेंगे कि कार्याविंत करके दिखाएं, नहीं तो नीतिगत रुप से इस पर कोई भी आपत्ति नहीं है।

Sd/-

(Vineet Punia)

Secretary

Communication Deptt.

AICC

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1 comment

such a nice article and nice information…..

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