Roll Back Modi tax of Rs 23.87 and Rs 28.37 on Petrol & Diesel

ALL INDIA CONGRESS COMMITTEE
24, AKBAR ROAD, NEW DELHI
COMMUNICATION DEPARTMENT

Highlights of Press Briefing 27 February, 2021
Dr. Abhishek Manu Singhvi, Spokesperson, AICC addressed the media at AICC Hdqrs. today.

डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज जिस संदर्भ में हम बात कर रहे हैं, उसका संदर्भ तो मेरे शुरुआत के कुछ कोटेशन से ही जाहिर हो जाता है, पेट्रोल-डीजल। तो मैं शुरुआत करना चाहूंगा ये कहकर कि – ‘हो रहा देश में पेट्रोल पर हाहाकार, जुमले छोड़ दाम पर लगाम लगाए मोदी सरकार’।
ये तुरंत आज की मांग है।
‘भाजपा कब तक करेगी अत्याचार, हम कब तक सहेंगे महंगाई की मार’।
एक बात और कहना चाहता हूं कि –
‘जनता की आंखों में आंख डालकर, करीब से पूछो, महंगाई कैसे जान लेती है, किसी गरीब से पूछो’।
और मैं अपने कांग्रेस की तरफ से एक वक्तव्य पर आने से पहले, चौंकाएगा आपको एक वक्तव्य। मैं आपको एग्जेक्ट जैसा कांग्रेस का स्टेंड है, वो पढ़ना चाहता हूं और उसके बाद एक चौंकाने वाला वीडियो दिखाना चाहता हूं। वक्तव्य के शब्द सुनिएगा ध्यान से। ये हमारी मांग है, ये हमारा वक्तव्य है, 100 प्रतिशत।

“देश में जिस प्रकार से पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए गए हैं, ये सरकार के शासन चलाने की नाकामयाबी का ये जीता-जागता सबूत है। देश की जनता के अंदर भारी आक्रोश है और इसके कारण और भी चीजों पर बहुत भारी बोझ होने वाला है।“ एक-एक शब्द ध्यान से सुनें। सरकार पर भी बहुत बड़ा बोझ होने वाला है। मैं आशा करुंगा और कांग्रेस बिल्कुल ये आशा करती है। मैं आशा करुंगा कि प्रधानमंत्री जी देश की स्थिति को गंभीर रुप से लें और पेट्रोल के दाम, जो बढ़ाए गए हैं, उन्हें वापस लें। ये हमारी मांग कृपा आप पहुंचा दें प्रधानमंत्री तक। लेकिन एक क्षमा चाहूंगा, मैं कानूनविद भी हूं, तो कहीं मुझे प्लेगरिज्म (Plagiarism) यानि कॉपी करने का आरोप ना लग जाए। इसलिए मैं खुलासा भी कर देता हूं कि ये मेरे शब्द नहीं हैं। माफी चाहता हूं, ये इनके शब्द हैं। एक-एक शब्द जो मैंने पढ़ा अभी। (विपक्ष में रहते पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर आज के प्रधानमंत्री और तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का वीडियो दिखाया गया, जिसमें वे कह रहे थे- “देश में जिस प्रकार से पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए गए हैं, ये सरकार के शासन चलाने की नाकामयाबी का ये जीता-जागता सबूत है। देश की जनता के अंदर भारी आक्रोश है और इसके कारण और भी चीजों पर बहुत भारी बोझ होने वाला है।“) तो जैसा मैंने कहा कि मेरा विनम्र निवेदन है कि आवाज किसी की भी हो, जो आवाज के अंदर शब्द हैं, उनका अनुपालन कृपया करें। आपको हमारी आवाज पसंद हो तो हमारी आवाज का अनुपालन करें। अपनी आवाज पसंद तो उसका करें। लेकिन पालन तो करें। ये मैं विनती करता हूं, देश विनती करता हैं, कांग्रेस विनती करती है।
दो रोचक बिंदु और एक रोचक बिंदु है कि आपने इसमें शब्द सुना- और चीजों पर भी बोझ बढ़ने वाला है। ये वाक्य याद आया है, ये सुना आपने अभी। तो और चीजों पर बोझ पड़ने वाला है। ये मान्यवर शक्तिकांत दास, आरबीआई के गवर्नर ने अभी तीन दिन पहले कहा है। आपके संज्ञान में होगा, प्रकाशित है। पहले तो बोल रहे हैं आज के प्रधानमंत्री, अब बोल रहे हैं आर.बी.आई. के गवर्नर और वो एक बहुत वरिष्ठ, एक फाइनेंस सेक्रेटरी रह चुके हैं पहले इस सरकार में। उन्होंने इन्हीं कीमतों की बढ़ोतरी के विषय में कहा कि इनको कम करिए, कांग्रेस को भूल जाइए। मैं किसी और के शब्दों की बात कर रहा हूँ। दूसरा कहा कि इनको कम करिए, क्योंकि वही शब्द – और चीजों पर इसका बोझ पड़ेगा।
तीसरा बिंदू, पिछले 3 हफ्तों से मुझे बड़ा रोचक लगा ये। मैं हर हफ्ते एक वाक्य सुनता हूं माननीय वित्त मंत्री से। निर्मला जी, 3 हफ्ते में एक दिन, हर दिन, मतलब एक हफ्ते में एक दिन, 3 बार कह चुकी हैं कि इन सब कीमतों का, पेट्रोल-डीजल और गैस का धर्म संकट है। ये बड़ा रोचक वाक्य है। तो मैं पूछना चाहूंगा माननीय वित्त मंत्री से कि धर्म संकट का मतलब क्या है, क्या प्रधानमंत्री जी आपके धर्म संकट है? क्या इसका अभिप्राय है कि आप कम करना चाहती हैं, चाहें तो कम हो जाए, लेकिन प्रधानमंत्री करने नहीं देते आपको कम? अरे भाई! अगर देश के वित्त मंत्री को धर्मसंकट है, तो आम आदमी की क्या हालत होगी? देश का वित्त मंत्री अगर कीमत कम नहीं कर सकता, तो आप और हम क्या करेंगे? तो ये कैसा धर्म संकट, क्या बाधा है? तीन बार बोला उन्होंने धर्म संकट। मैं डिटेल में जाने से पहले ये कहना चाहूंगा कि आम आदमी ये कह रहा है कि –

‘जिंदगी की तन्हाई लिखूं या, भाजपा की रुसवाई लिखूं?
बढ़ती हुई महंगाई लिखूं या घटती हुई कमाई लिखूं?’

इसका उत्तर सिर्फ सन्नाटा है और या ये गूंजती हुई आवाज, जो पुरानी आवाज मैंने अभी चलाई। दो ही चीजें हैं। आज की एक्स पैसा, वाई पैसा, कल के 10 पैसा, उसकी बात नहीं है आज की प्रेस वार्ता में। एक कहावत है अंग्रेजी में – Even a straw breaks a camel’s back. आपको मैं स्ट्रॉ बताऊं, ये स्ट्रॉ नहीं हैं ये। 20 दिन में, 8 फरवरी से 27 फरवरी, 20 दिन होते हैं। 20 दिन में 14 बार ये सॉ-कोल्ड स्ट्रॉ रख चुके हैं ऊंट की पीठ पर। ऊंट है आम आदमी, पीठ वैसे ही टूटी हुई है, कमाई से भी, टैक्स से भी, महंगाई से भी। 20 दिन में 14 बार। आज विडंबना देखिए, दुर्भाग्य देखिए, शर्मनाक बात है। 39 प्रतिशत सस्ता है क्रूड ऑयल। देखिए इनके कार्यकाल में कई ऐसे सौपान आए हैं, जब क्रूड ऑयल 50 प्रतिशत सस्ता है, 70 प्रतिशत सस्ता रहा है। लेकिन मैं सिर्फ आज की बात कर रहा हूं, सरकार के हक की। आज भी 39 प्रतिशत सस्ता है और कितना ज्यादा है पेट्रोल, 27 प्रतिशत और डीजल 42 प्रतिशत। तो ये तो रिवर्स कोरिलेशन (reverse correlation) कभी सुना ही नहीं किसी ने। आपका 80 से 85 प्रतिशत आयात होता है, ये रिवर्स कोरिलेशन आयात होता हुए गिर रहा है और आप जो पे कर रहे हैं, बढ़ रहा है।
मोदी टैक्स, जो सबसे महत्वपूर्ण टैक्स है इस देश का। वो है 23 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल में और 28 रुपए प्रति लीटर डीजल में, मैं आपको दशमलव नहीं दे रहा हूं। 23 रुपए 87 पैसा है पेट्रोल, 28.37 डीजल है, अगर आप डीजल की बात करें। सबसे महंगी सरकार इस देश की लेफ्ट ले लीजिए, सेंटर ले लीजिए, राइट ले लीजिए। सबसे महंगी सरकार ही नहीं है, सबसे अहंकार से ग्रस्त सरकार है। इनका ऐजेंडा अगर अंग्रेजी में कहा जाए तो है – Divide, Deceive, Dupe, Distract and Delude, हिंदी में कहा जाए तो ये – तोड़ती है, बरगलाती है, मूर्ख बनाती है, भटकाती है और सब्जबाग दिखाती है और ये सब साथ-साथ होता है, हम दो-हमारे दो वाले स्लोगन के साथ-साथ। पिछले कुछ वर्षों में एक और बिंदु, फिर मैं बहुत संक्षिप्त में आपको बिंदू दे रहा हूं, क्योंकि आप जानते हैं आम तौर पर क्या बात है, लेकिन मैं वो स्ट्राईकिंग बिंदू हैं, सिर्फ वो दे रहा हूं। मई 2014 में जब इसका प्रादुर्भाव हुआ, इस सरकार का, तो 108 डॉलर प्रति बैरल थी अंतर्राष्ट्रीय कीमत और दिल्ली में हमें मिल रहा था लगभग 71 रुपए पर पेट्रोल। डीजल मिल रहा था लगभग 57.28 रुपए पर। 25 फरवरी, 2021 यानि दो दिन पहले 65 डॉलर है। ये मैंने फिगर दे दिया, कीमत 40 प्रतिशत गिरी है। 65 डॉलर और पेट्रोल हो गया है 91 रुपए, तब था 71 रुपए। डीजल हो गया है 81 रुपए, तब था 57 रुपए। ये है 39 प्रतिशत गिरना, इस हाथ गिरो, इस हाथ आप ज्यादा दो।
गैस सिलेंडर 200 रुपए से बढ़ा है, लगभग 3 महीने में। सब्सिडी की बात, अभी मैं आने वाला हूं गैस सिलेंडर के बारे में। किस प्रकार से आपको झुठलाया गया है, बहकाया गया है, बरगलाया गया है उसमें। मोदी टैक्स के अंतर्गत लगभग 21.5 लाख करोड़ की कमाई ड्यूटी से हुई है सरकार को। सिर्फ इस पेट्रोल-डीजल की बात कर रहा हूं मैं। सिर्फ इन दो चीजों से 21.5 लाख करोड़ , क्या आप उसमें से छोटा सा हिस्सा भी नहीं दे सकते वापस आम आदमी को? 10 प्रतिशत, 20 प्रतिशत, 30 प्रतिशत, कुछ तो दे सकते हैं आप, सब आपको ही हड़पना है?
मोदी सरकार के कार्यकाल में मोदी टैक्स 820 प्रतिशत बढ़ा है डीजल पर। डीजल के पुराने दाम याद हैं आपको, जो पुराने दाम हुआ करते थे। 820 प्रतिशत, मतलब 8 गुना और पेट्रोल पर बढ़ा है 258 प्रतिशत, ढाई गुना।

अब एक और रोचक बात और ये बड़े शर्म की बात है। कांग्रेस सरकार के वक्त हमें बहुत बोझ सहना पड़ता था। यूपीए- 1 और यूपीए- 2, दोनों में हमारे ऊपर बहुत प्रेशर था और मैं ये नहीं कह रहा हूं कि वो प्रेशर बहुत आसान था, लेकिन क्या किया यूपीए सरकार ने। यूपीए सरकार ने आम आदमी को सबसे आगे, प्रथम श्रेणी में रखा। यूपीए सरकार के वक्त यद्दपि इतना प्रेशर था, तो भी हमने अंडररिक्वरी की। अंडररिक्वरी, जो हमारी आयात की कोस्ट होती है, उससे कम हमने रिक्वर(वसूला) किया आपसे, यानी सरकार ने भुगता। अगर 10 रुपए में मुझे ये बोतल मिलती है, तो मैंने आपसे सिर्फ 7 रुपए लिए। मैं सिर्फ उदाहरण दे रहा हूं। अंडर रिक्वरी की 3 रुपए की। उसके आंकड़े क्या हैं – 2012-13 में 1.64 लाख करोड़, ये बोझ सरकार ने लिया। 2013-14 में वापस डेढ़ लाख से कुछ थोड़ा सा आंशिक रुप से कम वापस उन्होंने बोझ लिया। To be précise, 1.64 and 1.47 lakh crore, अपने ऊपर लिया। अपने ऊपर लिया, मतलब पास ऑन नहीं किया आपको, बढ़ाई नहीं कीमत। और एलपीजी सिलेंडर पर भी हमने वही बोझ लिया है। अब क्या हुआ है, ये नोट करें आप, ये सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात है। ये चार्ट है हमारे पास, आपको दिया गया है, बाद में देख लीजिएगा।

5 वर्ष से 2015-16, 2016-17, अगर आप हॉरिजोंटल चार्ट पर जाएं, जिसमें कि पीपीएसी लिखा है ऊपर, तो आप चौंक जाएंगे। 2015-16, 2016-17, 2017-18, 2018-19 और 2019-20, यानि करंट ईयर के एक साल पहले तक सब्सिडी जीरो है पेट्रोल और डीजल में, जीरो, as in Zero, as in ‘Anda’ (अंडा) जो कि कोई वर्ष में कोई सरकार डेढ़ लाख करोड़ और सिर्फ हमने ही नहीं, वाजपेयी सरकार ने भी बोझ लिया था। हमारे समय में सवा लाख करोड़, डेढ़ लाख करोड़ और उसको एकदम जीरो कर दिया और सरकार के पांच साल की बात कर रहा हूं, एक साल छोड़कर, 15 से लेकर 20 तक। एक साल रहा सिर्फ आंशिक रुप से और ये जो एलपीजी है, इसमें मैं, क्योंकि डीपीटीएल सब्सिडी मान रहा हूं, तो आशिंक कर दी है। एलपीजी में थोड़ी सी सब्सिडी बची है, आंशिक। पहले से मैं समझूंगा कि 30 प्रतिशत भी कम हो गया है। ये फिगर आपको दे रखे हैं, हम तथ्यों में बात करते हैं, हवाबाजी में नहीं करते हैं, ना हम जुमलेबाजी में विश्वास करते हैं।
तो कोई तो जनता को बताए कि – पेट्रोल क्यों आग लगाए, रोजमर्रा का सामान भी दूर से क्यों लाल आंख दिखाए हर आम आदमी को, आपको, हमको? मैं इसलिए बहुत मजबूती से, आग्रह से, विनती से, अनुरोध से हाथ जोड़कर आपसे कहता हूं कि माननीय मोदी जी, मोदी टैक्स वापस लीजिए और न्यूनतम, वैसे आपके अंदर क्षमता है और भी करने की, लेकिन न्यूनतम 23 रुपए 87 पैसे पेट्रोल पर और 28 रुपए 37 पैसे डीजल पर, ये तुरंत वापस लीजिए। अहंकार नहीं मानिए, जिद्द नहीं मानिए, राजनैतिक जिद्द नहीं समझिए, आप छोटे नहीं हो जाएंगे इससे। ये कोई आम टाइम नहीं है, नोर्मल टाइम नहीं है, कोविड का समय है। 20 दिन में आप 14 बार अगर बढ़ाएंगे प्राइस और फिर अहंकार की एक तख्त पर बैठ जाएंगे, तो मैं समझता हूं इस देश का दुर्भाग्य है।

Dr. Abhishek Manu Singhvi said- Friends, I have already told you, all the agony in couplets, in Hindi and those couplets may be, I need not repeat except to say in brief that ‘Janta Ki Ankhon Mein Ankh Dalkar, Karib Se Poocho,
Mahangai Kaise Jaan Leti Hai, Kisi Gareeb Se Pucho’. This Government has exceeded all limits. In 20 days alone, 14 days, every day of those 14 days and this is the period from 8-27 February, there have been 14 increases in Petrol & Diesel prices. When crude oil, of course, its international price decreased upto 70 percent in that time, at one time, but, it has now decreased by 39 percent, 80 percent of it, we import of our needs. 39 percent decrease is matched by a 27 percent increase in Petrol by this Government and a 42 percent increase in Diesel. Mr. Modi’s tenure has seen in all 820 percent increase in Diesel’s excise duty, total tenure, आठ गुणा and a 258 percent increase in Petrol’s excise duty, ढाई गुना. There should, if you have any shame, any sensitivity, any regard for public opinion, थोड़ी भी शर्म है, then there should be an immediate roll back, at least of this Modi tax of Rs 23.87 and Rs 28.37 per litre on Petrol & Diesel, otherwise, you will continue in your proud designation as the world’s most expensive ‘Sarkar’, as the most arrogant ‘Sarkar’ as the ‘Sarkar’, whose flagpole is to divide, deceive, dupe, distract and delude. Along with these five favourite ‘Ds’, you have practiced ‘Hum Do, Humare Do’.
I have done more than anybody could have, I have paid your own voice back to you. I just played Mr. Modi Ji’s voice, when he spoke as the Chief Minister, I only want to put the Congress statement, word to word as it is, not even a comma, full stop, I don’t want to change. You don’t want to listen to us, please listen to yourself. You don’t want to listen to either that voice from the past or this voice from the present, at least listen to the content. It is unimaginable that in Covid times, this is happening, less than three days ago, no less than the Governor of RBI, who is your eminent Finance Secretary of yesteryears, has used the same words और चीजों पर भी बोझ पड़ेगा, word to word quotation. He has warned that it is not only in Petrol and Diesel, but, it will have a cascading effect, because the most indirect and the worst of the taxes are these taxes. Indirect taxes, worse than the direct tax, but, among indirect tax, Petrol and Diesel is the worst, because it is sector-neutral, it cuts across sectors, this is what Shaktikanta Das said, either listen to Mr. Modi, Chief Minister of Gujarat or listen to Shaktikanta Das, RBI Governor, former Finance Secretary and then this is very funny although, it is tragic or to be otherwise funny, three statements of the Finance Minister over three weeks “Petrol and Diesel are my Dharm Sankat”. So, I am simply asking with great respect to Nirmala Ji ये धर्म संकट कौन सा धर्म संकट है? Is this the Dharm Sankat caused for you by the Hon’ble Prime Minister? Is it that you are very keen to reduce these prices, but, the Prime Minister is prohibiting you or obstructing you? And if this country’s Finance Minister has a Dharm Sankat then what is the Aam Aadmi to do? If this Country’s Finance Minister pleads helplessness through Dharm Sankat then what will be the fate of Aam Admi? That’s why, I said in words of the Aam Admi-

‘Zindagi Ki Tanhai Likhoon,
Ya Bhajapa Ki Ruswai Likhoon,
Badhti Hui Mahangai Likhoon,
Ya Ghatti Hui Kamai Likhoon!’

I think it is agonizing that this kind of approach, which is completely based on Political Zid and arrogance. A haughtiness, which has no place in democracy is being exhibited by this Government, by the Prime Minister in such terrible, difficult times. Thank You!

एक प्रश्न पर कि पेट्रोलियम मंत्री की तरफ से बयान आया है कि सर्दी की वजह से पेट्रोल-डीजल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें बढ़ी हैं, अब कम हो जाएंगी? डॉ. सिंघवी ने कहा कि पहली बात तो अगर आप समझते हैं कि हमारे प्रश्न-उत्तर का जवाब है कि वेदर (मौसम) बदलने के लिए इंतजार करिए, तो जवाब आ गया और तो कोई जवाब मैंने सुना नहीं। हम अगले कोविड के लिए इंतजार करें, अगले 2022 के लिए इंतजार करें या मौसम बदलने के लिए, मौसम बदलेगा तो जमाना बदलेगा, ये तो बड़ा अच्छा जवाब है, नंबर एक। नंबर दो, गणतंत्र में कुछ सीमाएं हैं, उन सीमाओं का गलत फायदा सरकार ना उठाए। गणतंत्र में मैं उनकी गर्दन नहीं पकड़ सकता, ना पकड़ना चाहता हूं, हिंसा की कोई जगह नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप इतने अहंकार के पद पर बैठे हैं कि आपको जो कुछ बोला जाए, आप इग्नोर करें। हम आपके जरिए अभियान करते हैं, हम रोड़ पर अभियान करते हैं। पिछले दो हफ्तों में, 10 स्टेट में बड़े-बड़े अभियान हुए हैं कांग्रेस के इसी मुद्दे पर। हम बार-बार आवाज उठाते हैं और मरते दम तक उठाते रहेंगे। अब आप इसको समझते हैं कि और क्या कर सकते हैं आप? तो हम तो गन निकाल कर करने का कोई इरादा नहीं रखते हैं और ना होना चाहिए, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि अगर आपमें कुछ भी दया है, जागरुकता है, तो आपको इस पर 20 दिन पहले से रिएक्ट करना चाहिए था। 14 बार आपने दाम बढ़ा दिया है। और हमारी कही को अनसुनी करने से आप अपने आपको ही एक्सपोज कर रहे हो। बढ़ती महंगाई पर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि नहीं, शांति नहीं कहा मैंने कभी। महंगाई पर जितना आक्रोश है और दर्द है, मैंने तो शांति शब्द कभी इस्तेमाल ही नहीं किया। इससे ज्यादा आक्रोश, अशांति, गुस्सा, दर्द और पीड़ा तो मैं कभी सोच भी नहीं सकता। अब ये अलग बात है कि अशांति, दर्द और पीड़ा का मतलब ये नहीं कि मैं आकर आपकी गर्दन पकड़ लूं। क्योंकि यहाँ के लोग सभ्य हैं। देश में गणतंत्र है, इसलिए और ज्यादा कर्तव्य बनता है आपका सरकार का, कि आप हर चीज के ऊपर ध्यान दें, एक्शन लें, सहानुभूति दिखाएं, सेंसिटिविटी दिखाएं।

On a question on new social media rules, Dr. Singhvi said- You see, nobody suggesting that there should be ‘Jungal Raaj’ or unregulated, unknown territory for ever in any area, but, equally, there should be no attempt in the guise of non statutory, delegated legislation rules and executive orders, in getting control of such a vast field. The problem is that no act has been passed, yet you have taken almost 3-4 years in even doing a Data Protection Act. I, myself opened the speech in the Rajya Sabha and pointed out the dates between the starts of the ‘Shri Krishna Committee’, the report of the Shri Krishna Committee and the number of times, your bill has come and has been taken away by you. Now, while all that is pending, you have brought such far reaching changes and the Czar, the monarch, the master of the universe is a bureaucrat. So, I would say that it is extremely dangerous for free speech, for creativity, unless extreme restraint is exercised and unfortunately, I do not find any restraint in this ‘Sarkar’ in any sector. So, the answer to your question in a nutshell is-
1. Humongous, vast powers have been granted.
2. Humongous vast powers have been granted without statute, without parliamentary assent, without parliamentary scrutiny.
3. Their operation depends on the wisdom and restraint of bureaucrats, who exercise them.
4. Such restraint in 20 other sectors is conspicuous by its absence as far as this Government is concerned.
So, I will say, we have to hasten very-very slowly, time will tell and I hope, my words are not prophetic.
सोशल मीडिया रूल्स के बारे में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि मैं ये कहना चाहूंगा कि ये एक ऐसा विशाल एरिया है, जहाँ आपने बहुत विशाल अधिकार क्षेत्र दिए हैं और वो सब अधिकार क्षेत्र कार्यपालिका के ब्यूरोक्रेट्स को दिए गए हैं। निश्चित रुप से इसमें पोटेंशियल बहुत बड़ा है। स्वतंत्र सोच पर आघात का, स्वतंत्र क्रिएटिविटी पर, स्वतंत्र बोलने, विचार रखने, प्रस्तुत करने, वितरण करने पर। इन सबके लिए अति आवश्यक है कि ज्यादा से ज्यादा धीरज, धैर्य और सीमाएँ बांधी जाएं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस सरकार में धीरज, धैर्य औऱ सीमाएँ किसी सेक्टर में नहीं हैं। इसलिए ऐसी अपेक्षा करना इस विषय में भी गलत होगा। संक्षिप्त में मैं ये कहूंगा कि इतने बड़े विशाल अधिकार क्षेत्र दिए गए हैं बिना संसद के कानून के। संसद ने कुछ पारित नहीं किया है। नंबर दो, लगभग तीन, साढ़े तीन वर्ष निकाल दिए हैं आपने डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के आने में। श्रीकृष्णा कमेटी हो गई, रिपोर्ट आ गई, संसदीय समिति में चली गई, उसके बाद आज तक नहीं लाए हो, तो जब-जब आप ऐसे कानून लाते हो कार्यपालिका के क्षेत्र में तो कानून को आप अवोयड कर जाते हो, विधायिका की स्पीच पर। नंबर तीन, ऐसे अधिकार क्षेत्र पूरा आघात कर सकते हैं, इसलिए आपको बहुत ही रिस्ट्रेंट एक्सरसाइज करना होगा और मुझे ऐसा रिस्ट्रेंट, धैर्य, सीमाएँ इस सरकार में नहीं दिखती।

On a question that the Government says that the new guidelines have been notified in the section 69 of IT Act, but, you say, these are non statutory, so who is right, Dr. Singhvi said- Now, of course, this is non-statute. This sentence itself shows they are non statutory. These are guidelines under an Act. There is no act created for OTTs. There is no act created for other social media. You have exercised general power under the IT act. Now, everybody here, in this room and in the country, say for anything directly, genuine in the national security, you must stop it, but do you think, put your hand on your heart, in the last five years, every arrest has been made on the genuine ground of the national security? So, here is another of our bureaucrats, who will decide, what is the national security to arrest him/her. That is the issue and you have created it, look, there is an act called a Cable Television Act, which governs Cable TV, that is Parliament’s act, under that you make rules. There is an act which covers, TV. There is an act which is called a Censor board, which covers movies, films. There is no statute, which covers OTT. Guidelines covers it under the IT Act, this must go through Parliament and one of the acts, which was done so is data protection, why have they not passed Data Protection Act after four years?

जम्मू और कश्मीर में हुई एक सभा में श्री ग़ुलाम नबी आज़ाद और कुछ अन्य कांग्रेस नेताओं की भागीदारी के सन्दर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि मैंने आपके प्रश्न सुने, उन प्रश्नों के संदर्भ में मैं कह रहा हूं, मैंने खुद ना मालूम किया है ना देखा है, लेकिन मैं बहुत आदर सहित कहना चाहता हूं -3-4 बिंदू। नंबर एक, जो-जो लोग गए हैं, जिन्होंने ये भाषण दिए हैं, जिन्होंने ये कहा है, जिनके ऊपर आप प्रश्न पूछ रहे हैं, वो बहुत सम्मानित व्यक्ति हैं, आदरणीय व्यक्ति हैं। कांग्रेस उन सबका बहुत आदर करती है। और हमें गर्व है कि उनके बहुत लंबे राजनीतिक जीवन कांग्रेस पार्टी में बीते हैं। नंबर दो, ये सभी हमारे कांग्रेस परिवार का एक अभिन्न हिस्सा हैं। हम सबकी इज्जत करते हैं और जो कुछ मैं कह रहा हूं, बहुत आदरपूर्वक इसलिए कह रहा हूं। मैं समझता हूं, कांग्रेस पार्टी समझती है कि जब 5 प्रांतों में चुनाव हो रहे हैं, जिस पर कांग्रेस संघर्ष कर रही है, तो ज्यादा उपयुक्त होता, अगर ये सभी नेता इन प्रांतों में अभियान करते, कांग्रेस का हाथ मजबूत करते, कांग्रेस की बात आगे बढ़ाते।
आपमें से कुछ ने ‘इस्तेमाल’ शब्द का इस्तेमाल किया है। तो मैं वहाँ भी विनम्रता से कहना चाहूंगा कि जिस व्यक्ति के बारे में ये टिप्पणी की गई, उन्होंने कोई शिकायत नहीं की है और(अन्य) व्यक्ति उनका नाम लेकर शिकायत कर रहे हैं। तो मैं सिर्फ ये कह सकता हूं कि उनको शायद पूरे रुप से संज्ञान नहीं है- कांग्रेस के समकालीन इतिहास का भी और कांग्रेस के पुराने इतिहास का भी। जहाँ तक इस्तेमाल की बात है, सिर्फ उसी संदर्भ में बोल रहा हूं क्योंकि प्रश्न पूछा गया है मुझसे। उनको भी गर्व है और हमें भी गर्व है कि 7 टर्म संसद में कांग्रेस के झंडे के अंदर उन्होंने बिताए, 5 राज्यसभा में, 2 लोकसभा में। हमें गर्व है, उनको गर्व है। हमें भी गर्व है, उनको भी गर्व है कि माननीय सोनिया गांधी जी ने उनको जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री मनोनीत किया और बड़ा सफल उनको टैन्योर रहा। हमें भी गर्व है, उनको भी गर्व है, उन्होंने कभी शिकायत नहीं की कि इंदिरा गांधी जी के कार्यकाल से और यूपीए-1 और यूपीए-2 लगभग 20 से 25 वर्ष गिन लीजिए, वो केन्द्रीय मंत्री रहे। हमें भी गर्व है, उनको भी गर्व है कि वो उस समय भी उसी 20 या 25 वर्ष से ज्यादा महासचिव रहे। देश के हर कोने-कोने में, विभिन्न प्रांतों में अगुवाई की। तो ये जो जिन लोगों ने उनके विषय में इस्तेमाल का शब्द इस्तेमाल किया है, मैं नहीं समझता कि उन्हें संज्ञान है इस इतिहास का और मैं वापस अपनी बात खत्म करना चाहूंगा ये कहकर, बड़ी विनम्रता से कि सच्ची निष्ठा कांग्रेस के प्रति तब होगी, जब आप सभी लोग, सभी व्यक्तियों को याद दिलाएं कि अभियान इन 5 प्रांतों में करना अति आवश्यक है, जहाँ अभी चुनाव हो रहे हैं, जहाँ कांग्रेस संघर्ष कर रही है। मैं नहीं समझता कि बाकी जो आपके प्रश्न हैं, क्योंकि सभी हमारे आदरणीय नेता हैं, बाकी आपके प्रश्न जो जानबूझ कर आपने पूछे हैं, अनुशासन वाले और ये वाले, उनका कोई संदर्भ बच जाता है, मेरे ये कहने के बाद?

On another question about reported statements of certain veteran Congress Leaders in J&K, Dr. Singhvi said- Let me make it very clear, I am, of course reacting to your questions. I was neither there nor I have heard it, but, I want to say a few things very clearly with the greatest of respect and on behalf of the Congress Party. As a political party, each of the persons, who are in Jammu or who have spoken are senior, highly respected and well regarded members of our party and we are proud to have them in our party and I believe that they are equally proud members of the Congress. They are therefore part of this Congress family.
Number two, therefore whatever I say is, with the greatest respect to these leaders and with respect to the tradition and legacy, which has cross-fertilized between the Congress and them over these last 3- 4 decades.
Number three, you, not me and not the principal person in whose honor this rally was being held, nobody has used the word ‘Istemal’. Other people may have used the word ‘Istemal’ in relation to Mr. Azad. He has never complained. Well, those, who have used the word ‘Istemal’, I think, would betray a certain lack of knowledge and ignorance about the contemporary history of the Congress and about the older history of the Congress. We are proud and he is proud, and has been that he has held the Congress flag aloft more than 7 terms, 5 in the Rajya Sabha and 2 in the Lok Sabha, which is roughly 40 years. He is proud and we are proud that Hon’ble, the then Congress President Smt. Sonia Gandhi nominated him and he had a very successful tenure as the Chief Minister of J&K. He is proud and we are proud and he has never complained as I said other people may be using that name that from Indira Gandhi’s time onwards, he has been a respected Central Minister for over three decades in the Central Government, Cabinet Minister or at least for most of the time. He is proud and we are proud of the legacy that over the same period of three decades, he has been a General Secretary of the entire Congress Party and has exercised great supervision over more than 10-15-20 states across the length and breadth of India. I could go on with these examples.
As, I said, not to remind you of these would betray an ignorance and a lack of knowledge about Congress’s contemporary and past history. I would therefore end by very-very gently and respectfully saying that the best contribution to the Congress cause would be to get active not in any manner amongst ourselves, but, to get active in the various ‘Abhiyaans’ ongoing every day in the five states, where Congress is fighting elections. In the light of what I have said, I don’t think, I need to answer questions which are intended to sensationalize and intended to digress from the core issue, where you have used words like disciplinary action etc, I am certainly not using those words, nor I am commenting on them.
Sd/-
(Dr. Vineet Punia)
Secretary
Communication Deptt,
AICC

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