My AICC Press Brief dated 28.07.2017 in Hindi

डॉ. अभिषेक सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम नैतिकता, भ्रष्टाचार ऐसे मुद्दों के जरिए कुछ राजनीतिक, कानून की बातें करने वाले हैं और मुख्य फोकस गुजरात को लेकर आपको मैं भ्रष्टाचार, दल-बदल, संवैधानिक, अनैतिकता के कुछ उदाहरण देने वाला हूँ और उसके बाद कुछ बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे हैं कानून के।

हमें हर दिन नैतिकता का एक सबक सिखाया जाता है और नैतिकता के आधार पर वो कहते हैं ना कि भ्रष्टाचार भी करो तो सफाई के आधार पर, तो वही हो रहा है। अभी हमने देखा उसका एक उदाहरण। पहले आपने देखा कि आप गणतांत्रिक, लोकतांत्रिक तरीकों से गोवा हारे, मणिपुर हारे और अनैतिक, अलोकतांत्रिक, अगणतांत्रिक तरीकों से सरकार बनाई। फिर आपने देखा कि अभी कल-परसों बिहार में भाषण दिए गए लंबे-चौड़े नैतिकता के ,क्यों, छठी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए। ये तो सीएम पोर्टेबिलिटी है, जैसे मोबाईल नंबर पोर्टेबिलिटी होती है।

सिर्फ सर्विस प्रोवाईडर बदलता है, दूसरा रखे। ये तो सीएम पोर्टेबिलिटी हो गई 24 घंटो में। मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री रहे, जो उनका सर्विस प्रोवाईडर है ,वो बदल दिया उन्होंने। अगर इतने नैतिकता और भ्रष्टाचार के हमें सबक सिखाए जा रहे थे, तो केयर टेकर मुख्यमंत्री रहते कुछ दिन, चुनाव करवाते, जनादेश लेते बिहार का वापस। आप तो नहीं भूल सकते इतनी जल्दी कि चुनाव से पहले आपका एक पूर्व घोषित एक गठबंधन था, अनैतिक तरीका उसके आधार पर आपने वोट लिया। तो क्या फर्क पड़ता 4 महीनों के लिए, 3 महीनों के लिए आप केयर टेकर रहते, और तो कोई रहता नहीं। तो ये भ्रष्टाचार है, अनैतिकता है, मूल्य हैं, संविधान है इन प्रश्नों के कौन उत्तर देगा? ये बात रही बिहार की।

आज हम गुजरात में क्या देख रहे हैं। सुरजेवाला जी ने गुजरात में प्रैस कॉन्फ्रेस की है। वहाँ आपको बताया गया है। तीन मुख्य बिंदु वहाँ लिए गए हैं। बीजेपी की जहाँ तक नीति है, वो वही नीति है जो मणिपुर में थी, गोवा में थी, बहुत हद तक बिहार में थी, वही गुजरात में प्रयत्न किया जा रहा है कि – फूट डालो, अहंकार पालो, जनमत हरो और राज करो। एक अनैतिकत, भ्रष्टाचारी तौर तरीकों से राज करो। ये दो शब्द हैं अंततोगत्वा उद्देश्य वाले। उसके लिए –

वो उद्देश्य हमें स्थापित करने हैं और इसका आधार है 3 बल- सत्ताबल, धनबल और बाहुबल। तीनों का आपने एक नंगा प्रदर्शन देखा है गुजरात में भी और आपको बताया मेरे मित्र ने अहमदाबाद में, करोड़ों में खरीद-फिरोख्त की बातें चल रही हैं। पुना भाई कामिद का किस्सा भी सुनाया।अब 2 सीधे महत्वपूर्ण कानूनी आयाम आते हैं। पहला आयाम है Prevention of Corruption act. ये जो एम एल ए आजकल प्रयत्नशील हैं रुपए कमाने के तरीके में। उसके अलावा रुपए को आप भूल भी जाएँ और जैसा मैंने कहा कि अहमदाबाद में स्पष्ट रूप से बताया आपको कि कैसे करोड़ों रुपए में खरीद-फिरोख्त हो रही है। अगर आप रुपयों को साईड में रख दें तो सच्चाई क्या है, सच्चाई ये है कि-

अब मूल बात यहाँ हो गई है, ये इस्तीफे उतना ही भ्रष्टाचार है। मैं आपको पब्लिक सर्वेंट को लुभावन देकर किसका लुभावन या तो पैसे का और या एक टिकिट का, एक सीट का भी लुभावन होता है। पब्लिक सर्वेंट उस लुभावन से अपना इस्तीफा देकर आगे बढ़ता है तो ये भी Prevention of Corruption Act. में आता है। इसके अलावा बहुत तथ्य हैं जो सीधे रुपए की बात करते हैं, वो भी करोड़ों की। नहीं तो अचानक विभिन्न एमएलए का इस्तीफा लेना, मांगना ये कौन खरीद-फरोख्त कर रहा है, ये सत्ताबल, धनबल और बाहुबल के आधार पर बीजेपी सरकार गुजरात में कर रही है। वो सब एम एल ए सावधान रहें क्योंकि अनुच्छेद 7, 8, 13 है Prevention of Corruption Act. को PC एक्ट कहते हैं। उसके अतिरिक्त Section 120-B जो कॉन्सपिरेसी का Section है Indian Penal code में। ये सभी प्रावधान उन पर लागू होंगे और हम अपने सभी अधिकार क्षेत्र खुले रखते हैं ऐसी सभी कार्यवाही करने के लिए, जिससे आगे भविष्य में उनको काफी तकलीफ हो सकती है, देने वाले को भी और लेने वाले को भी और ये उस प्रधानमंत्री की पार्टी से भी हो रहा है जो बार-बार कहते हैं कि ना खाउंगा और ना खाने दूंगा, ये तो स्पष्ट खिला रहे हैं, प्रोत्साहन दे रहे हैं खिलाने का, लुभावन देने का।

तीसरा मित्रों ,इससे भी ज्यादा गंभीर दल-बदल का मुद्दा है। इसको हमारे संविधान में उच्चत्तम न्यायालय ने बार-बार Constitutional sin, संवैधानिक अनैतिकता कहा है। संवैधानिक बहुत बड़ी भर्त्सना योग्य चीज है और जब 1985 में 10वाँ शेड्यूल बना था पार्लियामेंट संसद द्वारा तो उसमें कहा गया था- Evil of political Defections को रोकने के लिए। दूसरा है-

इतना महत्वपूर्ण माना गया है 10वाँ शेड्यूल। जिसके आधार पर दल-बदली को एक संवैधानिक evil माना गया है। इसमें अन्य विभिन्न निर्णय हैं उच्चत्तम न्यायालय के। एक बड़ा प्रसिद्ध निर्णय है कीतो-पलिअंत, नागालैंड से आया था, वहाँ उन्होंने कहा कि जो कारण से आप अपने व्यक्ति को वापस बुला सकते हैं, सांसद हो या एमएलए हो, जिन कारणों से आपके पास राइट ऑफ रिकॉल हो, हमारे देश में तो नहीं होता है, कई देशों में नहीं होता है। उन्हीं कारणों के आधार बनते हैं दल-बदल प्रिवेंट करने के। अगर दल-बदल आप करते हैं तो उसका आधार वही है कि आप संवैधानिक सिद्ध कर रहे हैं। ये उच्चत्तम न्यायालय कहता है मैं नहीं कह रहा हूं। उसके बाद कहा कि-

अब एक रोचक प्रसंग है। Defection का एक मतलब होता है कि मैं खड़े होकर संसद में सांसद की हैसियत से कहूं या एमएल की कि मैं आज इस पार्टी को छोड़कर उस पार्टी में शामिल हो रहा हूं। Defection वो नहीं होता है सिर्फ। कानून में, 10वें शेड्यूल में Defection के कई आयाम हैं। बड़ा रोचक प्रसंग है। जो एमएलए अभी इस्तीफा दे रहे हैं अगर वो इस भुलावन में हैं, बरगलाहट में हैं कि वो दल-बदली के कानून 10वें शेड्यूल में नहीं आते तो मैं समझता हूं कि उन्हें अपने सलाहाकारों से बात करनी चाहिए।

रवि नायर का केस आया था उच्चत्तम न्यायालय में, गोवा से। वहाँ उन्होंने बड़ा स्पष्ट कहा कि-
सिर्फ चिट्ठी लिखकर इस्तीफे से नहीं होता, वो कुछ भी चीज करो आप जिससे कि आप स्वत:अपनी मैंबरशिप give up कर रहे हैं ,वो भी दल-बदली होती है। इसमें लिखा है। रवि नायर के उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय से पढ़ रहा हूं-

अब एक और रोचक पहलू- इस प्रावधान में एक और संशोधन हुआ, वो था कि राज्यसभा के चुनाव के विषय में, मैं MLA की हैसियत से वोट देता हूं तो उस वोट को मुझे दिखाना पड़ेगा, चीफ व्हिप हमारी पार्टी को या पार्टी द्वारा अधिकारी व्यक्ति, उसको दिखाना पड़ेगा। ये संशोधन है कानून का, ये आम वोटिंग में नहीं होता है। इसको कुलदीप नायर साहब ने चुनौती दी उच्चत्तम न्यायालय में। एक तीसरे जजमेंट का जिक्र कर रहा हूं, 2006 का। उच्चत्तम न्यायालय ने कुलदीप नायर की चुनौती को खारिज किया, ये कहते हुए कि ये बात सही है कि संदिग्धता वोट की खत्म हो जाती है क्योंकि सिंघवी ने वोट दिया MLA का, राज्यसभा में, सिंघवी का वोट दिखाना पड़ता है सिंघवी वाले व्हिप को कि मैं वोट दे रहा हूं वोट। तो सिंघवी कह सकता है कि मेरे वोट की संदिग्धता, गुप्तता खत्म हो गई। तो उच्चत्तम न्यायालय ने कहा कि वो हो सकता है लेकिन उससे ज्यादा सर्वोपरी उद्देश्य है कि दल-बदली वाला संवैधानिक सीन हम रोकें। इसलिए हम इस प्रावधान, इस संशोधन को Valid, सही मानते हैं जिसके अंतर्गत राज्यसभा चुनाव में संशोधन द्वारा अपने वोट को आपको दिखाना पड़ता है, अपनी पार्टी के चीफ व्हिप को। क्यों, क्योंकि आप गलत वोट करके दल-बदली भी कर सकते हैं। दल-बदली इस्तीफे से होती है, गलत वोट से होती है, क्रॉस वोटिंग से होती है, व्हिप के निर्देशानुसार ना वोट करने से होती है। तो ये दिखाना पड़ता है और उच्चत्तम न्यायालय ने इसको भी सही माना।

ये सब चीजें जो मोदी जी गुजरात में MLA को प्रोत्साहित कर रहे हैं। ये वो मोदी जी और अमित साहब जी हैं जो MLA को प्रोत्साहित कर रहे हैं लेकिन ये नहीं बता रहे हैं इनको कि इसका दंड तो वो बेचारे MLA पाएंगे। ना मोदी जी और ना अमित शाह जी को मिलेगा वो दंड। दंड क्या होता है, वो सभी MLA सावधान रहें, 6 साल की Disqualification. Disqualification इस ऐसेम्बली से, इससे फर्क नहीं पड़ता 6 महीने में 6, जब मैं खुद ही इस्तीफा दे दूं तो Disqualification से फर्क नहीं पड़ता। लेकिन वो भूल रहे हैं कि Disqualification 6 वर्ष तक आगे होता है। यानी अगर मैं दल-बदली के लिए संदिग्ध हूं आज और कल मैं दल-बदली माना जाता हूं तो 6 वर्ष तक मैं Disqualification होता हूं, भविष्य के किसी भी चुनाव के लिए। क्या ये बताया गया उन लोगों द्वारा जिन लोगों ने आपको पैसे दिए दल बदलने के लिए। जिन लोगों ने आपको टिकट का लुभावन दिया, जिन लोगों ने आपको प्रोत्साहित किया भ्रष्टाचार में लिप्त होने के लिए। इसलिए आपको कानून समझाना आवश्यक था।

चौथा और अंतिम बिंदु- जो ये व्यक्ति हैं पुना भाई कामिद, जो अहमदाबाद में कांग्रेस के मंच पर बैठ कर कॉन्फ्रेस की, पुराने एमएलए हैं, SC-SC के क्षेत्र से आते हैं। उन्होंने पूरा रिकॉर्ड करके बताया कि किस प्रकार से वो कांग्रेस के अधिकारियों से बात कर रहे थे, किस प्रकार से एक ऊँचे स्तर के पुलिस अफसर आए, जो संदिग्ध हैं और जिन्होंने जेल में समय बिताया, इल-लीगल एनकाउंटर और किलिंग में और उन्होंने कहा कि आप यहाँ आकर बैठिए, हमारे साथ बातचीत कीजिए, चाय पीते हैं और चाय पीते हुए कहा कि साहब कांग्रेस को छोड़ दो, हम आपको टिकट दे रहे हैं, यहाँ टिकट किसी और को मिल रहा है और हम आपको नहीं जाने देंगे आप हमारे साथ रहो। ये पूरा बैठकर पुन्ना भाई गावेद, एमएलए ने रिकॉर्ड किया है। ये आज हालत हैं गुजरात में।

महज 15 घंटों में नीतीश जी की अंतर्रात्मा की आवाज ने उन्हें बिहार की जनता के जनादेश को ठुकराने की आकाशवाणी सुना दी।

आज आयाराम-गयाराम की नीति से भाजपा जनादेश की हत्या करने में लगी है। आज भाजपा जनादेश के साथ जोड़-तोड़ की राजनीति द्वारा गणतांत्रिक और लोकतांत्रिक ,सभी संस्थाओं को नष्ट करने में लगी है और साथ-साथ बिहार से गोवा, मणिपुर से दिल्ली, गुजरात तक हमें भाषण देती है, नीतिगत नैतिकता के आधार पर।

डॉ. सिंघवी ने कहा कि जीरो टॉलरेंस के फ्रेज को नए रूप से परिभाषित करुंगा। माननीय प्रधानमंत्री जी की डिक्शनरी में जीरो टॉलरेंस की ये परिभाषा है। इसके अनेक अनेक उदाहरण हैं।

एक प्रश्न पर कि जिस तरह से कांग्रेस विधायक पार्टी छोड़ कर जा रहे हैं क्या आपको डर है कि आप राज्यसभा का चुनाव हार सकते हैं, डॉ. सिंघवी ने कहा कि हमने ये प्रैस कॉन्फ्रेस की आपके सामने, ये एक्सपोज करने के लिए कि किस तरह से सस्ती राजनीति बीजेपी-एनडीए कर रही है, माननीय मुख्यमंत्री और बीजेपी अध्यक्ष के निर्देश पर और आदेश के अंतर्गत। इसका मतलब ये नहीं है कि हम किसी रूप से भयभीत हैं या हार की अपेक्षा करते हैं। ये अत्यंत आवश्यक है कि इनका सही चाल-चेहरा और चरित्र आपके सामने एक्सपोज किया जाए, नकाब हटाकर दिखाया जाए और साथ-साथ आपको कानून से अवगत कराया जाए। क्या खिलवाड़ अग्नि से कर रहे हैं ये। आप खेल किस खतरनाक तरीके का कर रहे हैं, अपने खुद के करियर के विषय में भी और कानून के साथ भी।

एक अन्य प्रश्न पर कि भाजपा ने ये आरोप लगाया है कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने कुनबे को संभालना चाहिए, डॉ. सिंघवी ने कहा कि ये बड़ा अच्छा सिद्धांत है। इसके आधार पर तो 10वाँ शेड्यूल बनना ही नहीं चाहिए था, क्यों बनाया। हर व्यक्ति अपने कुनबे का ध्यान रखेगा। मैं अपने कुनबे का ध्यान रखूंगा, आप आकर उसको भ्रष्टाचार के रुप से प्रलोभन देंगे, रुपए देंगे और आप गलती करें और मैं अपने कुनबे का ध्यान नहीं रख रहा हूं। कुनबे के ध्यान में ये किसने लिखा था कि बाहर के लोग आकर प्रलोभन देंगे, सीट ऑफर करेंगे, रुपए ऑफर करेंगे, पुलिस अफसर को भेजेंगे, जिनका नाम मैंने पढ़ा पुना भाई कामिद, जिनके पास भेजे गए, स्टेट के सभी अफसरों का इस्तेमाल, दुरुपयोग किया जाता है। ये कुनबे का ध्यान रखने की बात करते हैं। ये आपके चाल-चेहरा और चरित्र को एक्सपोज करती है ,उस प्रधानमंत्री के, जो कहते हैं कि ना खाऊँगा ना खिलाऊँगा। अपने प्रदेश में, बड़े स्पष्ट रुप से, आदेश पर, क्या ऐसा हो सकता है बिना उनके आदेश के?

एक अन्य प्रश्न पर कि राजनीतिक लड़ाई को आपने कानूनी तरीके से समझाया, क्या आप अपने एमएलए को समझा नहीं पाए, डॉ. सिंघवी ने कहा कि जो प्रैस वालों के पास स्पेशल मीटर होता है, एडिटिंग इस्तेमाल करने का, हमारे पास नहीं है। ये थर्मामीटर मुझे भी दे दीजिए। ये आपके पास हो सकता है। लेकिन जब मैं किसी और को एक्सपोज कर रहा हूं तो मैं डीमोटिवेट नहीं हूं, ये कौन सी भाषा है। ये खुली खरीद-फरोख्त कर रहे हैं, ये सुनने वालों को होना चाहिए या मुझे?
गुजरात में हुए कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि बहाने तो जिंदगी भर कर सकते हैं, इस बात से वो अवगत आज हुए, 28 तारीख को। कांग्रेस पार्टी के अफेयर से उनको सभी चीजों का आभास अब हुआ। तो उनके बहानों और कारणों से हमें अवगत न कराएं। ये बहानेबाजी चलती रहती है जो मैंने बताया। भ्रष्टाचार का आयाम और दल-बदल का आयाम वो मूल मुद्दा है। मैं आपको 50 बहाने बता सकता हूं कि क्यों दल-बदल करना चाहिए और क्यों नहीं करना चाहिए। तो उसका कोई मतलब नहीं है।

पनामा केस को लेकर पाकिस्तान के पीएम ने इस्तीफा दिया, क्या इसको भारत के परिप्रेक्ष्य में देखा जाएगा, डॉ. सिंघवी ने कहा कि पहली बात तो लाहौर और अमृतसर में कितने किलोमीटर का फर्क है, मुझे ध्यान में नहीं। लाहौर में या इस्लामाबाद में जो हो रहा है वो हजार किलोमीटर दूर छ्त्तीसगढ़ में भी होना चाहिए। पनामा का जब आप नाम लेते हैं, तो अगर पड़ोसी देश, जो पूरी तरह से गणतांत्रिक तो नहीं मानते हम, उस पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री का इस्तीफा है तो हम चाहेंगे कि मुख्यमंत्री हमारे देश के उसी आधार पर इस्तीफा दें, उसी रिपोर्ट में उसी पर्चों में, उसी बैंक के उसी अकाउंट में, मिस्टर रमन सिंह साहब के पुत्र का नाम आया था। उसके बाद माननीय प्रधानमंत्री और एनडीए ने पूरे देश में लालू जी से लेकर कई और व्यक्तियों के विरुद्ध कई और अभियान कर दिए, कभी आपने छत्तीसगढ़ का नाम सुना, क्या कार्यवाही हुई? दूसरा जांच तो निश्चित हो इस्तीफा हो गया, आप जांच की क्या बात कर रहे हैं। सिलेक्टिव जांच नहीं हो सकती है। अपॉर्चुनिस्टिक जांच नहीं हो सकती है। आपने क्या सुना सिर्फ लालू जी को पकड़ा गया, उदाहरण बनाया, 4-5 और बनाए तो उससे क्या आप सिलेक्टिव नहीं होते हैं?

एक अन्य प्रश्न पर कि रमन सिंह के पुत्र के अलावा पनामा मामले में बच्चन परिवार का भी नाम आया, डॉ. सिंघवी ने कहा कि सिलेक्टिविटी देखिए। मैं किसी एक व्यक्ति की बात नहीं कर रहा हूं। मेरा कहना है कि मापदंड वही रहेगा, ऐसा नहीं कि इसमें कांग्रेस का नाम नहीं आएगा, मापदंड कैसे बदल सकता है? अगर किसी कांग्रेस एमएलए का नाम आता है तो आपको उसी मापदंड से करना होगा। आज ये नहीं कर सकते कि एक तरफ तो नीतीश कुमार जी कहते हैं कि सिर्फ एफ.आई.आर के आधार पर मैं बीजेपी में शामिल हो रहा हूं क्योंकि तेजस्वी जी ने पूरा एक्सप्लेनशन नहीं दिया एफआईआर का और दूसरी तरफ माननीय उमा भारती जी चार्ज शीट होने के बाद 4 साल के आॉफेंस में, एफआईआर पर नहीं, उच्चत्तम न्यायालय के आदेश में डे-टू-डे ट्रायल चल रहा है फिर भी कैबिनेट में हैं। ये कौन सा आयाम हुआ। ये जो सिलेक्टिविटी की बात हो रही थी, आप देखिए तेजस्वी जी के विरुद्ध एफ.आई.आर है, इसका मतलब होता है First Information Report.उमा भारती जी और बहुत दिग्गज नेता हैं जो अभी मंत्रीमंडल में नहीं है, जिनके विरुद्ध ट्रायल चल रहा है और उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय ने 2 महीनों पहले कहा है कि इस ट्रायल को जल्दी खत्म करना है, फिर भी वो मंत्रीमंडल में हैं ,कैबिनेट मंत्री हैं। तो इसमें मापदंड का कहाँ सवाल उठता है?

एक अन्य प्रश्न पर कि गुजरात मामले पर आप कोर्ट में जाएंगे, डॉ. सिंघवी ने कहा कि सब ऑप्शन मतलब सब-राजनीतिक, सामाजिक, सबसे जरूरी जनता से संबंधित और कानून।एक अन्य प्रश्न पर कि गुजरात नतीजे पर क्या प्रभाव पड़ेगा, डॉ. सिंघवी ने कहा कि डिफेक्शन की बात मैंने आपको विस्तार से बता दिया कि कानून क्या होता है। जहाँ तक परिणाम का सवाल है हमें विश्वास है कि, संदेह नहीं है। लेकिन साथ-साथ ये भी अति आवश्यक है कि इन्हें एक्सपोज करना और दूसरी तरफ उन सब व्यक्तियों को अवगत करना इन सब परिणामों से।

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